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Hardoi News: बिल संशोधन के नाम पर उपभोक्ताओं से हो रही वसूली
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हरदोई। बिजली विभाग में बिल संशोधन के नाम पर उपभोक्ताओं का दोहन किया जा रहा है।
उपकेंद्र पर तैनात संविदाकर्मी उपभोक्ताओं से बिल संशोधन के नाम पर धनराशि वसूल रहे हैं और विभाग में जमा नहीं कर रहे हैं और विभागीय अधिकारी मामले में आंख मूंदे रहते हैं। मामला प्रकाश में आने पर पल्ला झाड़ लेते हैं। इससे उपभोक्ता परेशान है।
उदाहरण एक- मन्नापुरवा विद्युत उपकेंद्र से जुड़े नयागांव मुबारकपुर निवासी अजमद खान का एक लाख 27 हजार रुपये का बिल बकाया था। विभाग की ओर से एक मुश्त समाधान योजना में उसने उपकेंद्र पर तैनात कपिल काे जनवरी में एक लाख 15 हजार रुपये दिए थे। संविदाकर्मी ने बिल अदा होने और उसका कनेक्शन जोड़ने का आश्वासन दिया था। मगर उसके बिल में संशोधन नहीं हुआ। अब कर्मी फोन रिसीव नहीं कर रहे। जेई रजनीकांत रावत का कहना है कि इस संबंध में उनसे कोई मतलब नहीं है और एसडीओ केपी सिंह का कहना है जांच कराई जाएगी।
उदाहरण दो- शहर के सिटी पावर हाउस से जुड़े सुभाषनगर निवासी रामबेटी का 65 हजार रुपये बिल बकाया था। उसने संसोधन के लिए प्रार्थना पत्र जनवरी में दिया था, मगर उसका बिल संशोधन अभी तक नहीं हुआ। इससे उसका बिल बढ़ता जा रहा है।
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उदाहरण तीन- शहर के सांडी रोड विद्युत उपकेंद्र से जुड़े रशीद मंसूरी के यहां पर जांच में बिल संशोधित करने के लिए 60 हजार रुपये की मांग की गई। धनराशि न देने पर उसके खिलाफ केबल में गड़बड़ी होने की बात कहकर कार्रवाई की धमकी दी जा रही है।
पहले तो मीटर रीडर के सहयोग से गलत बिलिंग की जाती है और उसके बाद बिल संशोधन के नाम पर उनका संविदाकर्मियों के माध्यम से दोहन कराया जा रहा है। इससे प्रतिदिन उपभोक्ता आर्थिक दोहन का शिकार हो रहे हैं।
शहर में बिलिंग व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए गए हैं। बिल संशोधन के मामले की शिकायतें आ रही हैं, उनकी जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा। उस पर कार्रवाई की जाएगी। -विवेक अस्थाना, मुख्य अभियंता
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उपकेंद्र पर तैनात संविदाकर्मी उपभोक्ताओं से बिल संशोधन के नाम पर धनराशि वसूल रहे हैं और विभाग में जमा नहीं कर रहे हैं और विभागीय अधिकारी मामले में आंख मूंदे रहते हैं। मामला प्रकाश में आने पर पल्ला झाड़ लेते हैं। इससे उपभोक्ता परेशान है।
उदाहरण एक- मन्नापुरवा विद्युत उपकेंद्र से जुड़े नयागांव मुबारकपुर निवासी अजमद खान का एक लाख 27 हजार रुपये का बिल बकाया था। विभाग की ओर से एक मुश्त समाधान योजना में उसने उपकेंद्र पर तैनात कपिल काे जनवरी में एक लाख 15 हजार रुपये दिए थे। संविदाकर्मी ने बिल अदा होने और उसका कनेक्शन जोड़ने का आश्वासन दिया था। मगर उसके बिल में संशोधन नहीं हुआ। अब कर्मी फोन रिसीव नहीं कर रहे। जेई रजनीकांत रावत का कहना है कि इस संबंध में उनसे कोई मतलब नहीं है और एसडीओ केपी सिंह का कहना है जांच कराई जाएगी।
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उदाहरण दो- शहर के सिटी पावर हाउस से जुड़े सुभाषनगर निवासी रामबेटी का 65 हजार रुपये बिल बकाया था। उसने संसोधन के लिए प्रार्थना पत्र जनवरी में दिया था, मगर उसका बिल संशोधन अभी तक नहीं हुआ। इससे उसका बिल बढ़ता जा रहा है।
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उदाहरण तीन- शहर के सांडी रोड विद्युत उपकेंद्र से जुड़े रशीद मंसूरी के यहां पर जांच में बिल संशोधित करने के लिए 60 हजार रुपये की मांग की गई। धनराशि न देने पर उसके खिलाफ केबल में गड़बड़ी होने की बात कहकर कार्रवाई की धमकी दी जा रही है।
पहले तो मीटर रीडर के सहयोग से गलत बिलिंग की जाती है और उसके बाद बिल संशोधन के नाम पर उनका संविदाकर्मियों के माध्यम से दोहन कराया जा रहा है। इससे प्रतिदिन उपभोक्ता आर्थिक दोहन का शिकार हो रहे हैं।
शहर में बिलिंग व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए गए हैं। बिल संशोधन के मामले की शिकायतें आ रही हैं, उनकी जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा। उस पर कार्रवाई की जाएगी। -विवेक अस्थाना, मुख्य अभियंता