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Hardoi News: निजी गाड़ियों को बना लिया एंबुलेंस, दोगुने दाम लेकर सड़कों पर दौड़ा रहे
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हरदोई। जिला अस्पताल और आसपास एंबुलेंस संचालन में कमीशनखोरी का गोरखधंधा चल रहा है। आरोप है कि इसमें अस्पताल प्रबंधन के कर्मचारी, गार्ड और बाहरी लोग भी शामिल हैं। बाहर से मंगाई जाने वाली एंबुलेंस पर इनका कमीशन तय होता है। निजी वाहन संचालक मरीज व उनके परिजनों से दोगुनी राशि वसूलते हैं। प्रशासनिक अफसर जल्द व्यवस्था सुधारने की बात कह रहे हैं। लोगों ने बताया कि जितनी बड़ी मजबूरी होती है, उतनी वसूली की जाती है।
शहर से तीमारदार मरीज को लखनऊ मेडिकल कॉलेज ले जाते हैं तो 2500 से लेकर 3000 तक रुपये निजी एंबुलेंस के ड्राइवर वसूलते हैं। अधिक जरूरत पड़ने पर यह रेट चार हजार रुपये तक चला जाता है। जबकि इस दूरी का अधिकतम खर्च एक हजार रुपये होता है।
500 मीटर दूरी के लिए 250 रुपये
सवायजपुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी श्री कृष्ण ने 41 वर्षीय पत्नी सावित्री को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां डॉक्टर ने लखनऊ ले जाने की सलाह दी। जिस पर उन्होंने करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित जिला अस्पताल तक आने के लिए निजी एंबुलेंस का सहारा लिया। उनका कहना है कि मरीज को जिला अस्पताल तक लाने के लिए निजी एंबुलेंस के चालक ने 250 रुपये लिए।
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ऐसे चलता कमीशन का खेल
- निजी वाहनों को एंबुलेंस बनाकर संचालन
- विभागीय कर्मचारियों का कमीशन दूरी के हिसाब से तय
- निजी संचालकों का मोबाइल नंबर अस्पताल के कर्मचारियों के पास रहता
- ये कर्मचारी एंबुलेंस का नाम सुनकर ही मरीज के परिजन के पास आ जाते हैं
- गंभीर मरीजों के परिजन निजी एंबुलेंस की अवैध वसूली का होते शिकार
सरकारी आंकड़ों में एंबुलेंस
ट्रस्ट टूरिस्ट एंबुलेंस 51
स्कूल एंबुलेंस दो
फार्म एंबुलेंस 36
अधीन सरकारी एंबुलेंस 6
स्वतंत्र एंबुलेंस 80
ज्वाइंट स्टॉक कंपनी एंबुलेंस 1
सोशल वेलफेयर एंबुलेंस 8
सरकारी उत्तर प्रदेश एंबुलेंस 75
वर्जन
जनपद में कुल 259 एंबुलेंस अभिलेखों में दर्ज हैं। एक मार्च वर्ष 2019 से कंपनी से ही निर्धारित एंबुलेंस आ रही हैं। अलग से उनका कोई पंजीयन नहीं किया जा रहा है। जिन पुरानी एंबुलेंस का पंजीयन है, वहीं चल रही हैं। - संजीव कुमार सिंह, एआरटीओ हरदोई
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शहर से तीमारदार मरीज को लखनऊ मेडिकल कॉलेज ले जाते हैं तो 2500 से लेकर 3000 तक रुपये निजी एंबुलेंस के ड्राइवर वसूलते हैं। अधिक जरूरत पड़ने पर यह रेट चार हजार रुपये तक चला जाता है। जबकि इस दूरी का अधिकतम खर्च एक हजार रुपये होता है।
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500 मीटर दूरी के लिए 250 रुपये
सवायजपुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी श्री कृष्ण ने 41 वर्षीय पत्नी सावित्री को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां डॉक्टर ने लखनऊ ले जाने की सलाह दी। जिस पर उन्होंने करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित जिला अस्पताल तक आने के लिए निजी एंबुलेंस का सहारा लिया। उनका कहना है कि मरीज को जिला अस्पताल तक लाने के लिए निजी एंबुलेंस के चालक ने 250 रुपये लिए।
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ऐसे चलता कमीशन का खेल
- निजी वाहनों को एंबुलेंस बनाकर संचालन
- विभागीय कर्मचारियों का कमीशन दूरी के हिसाब से तय
- निजी संचालकों का मोबाइल नंबर अस्पताल के कर्मचारियों के पास रहता
- ये कर्मचारी एंबुलेंस का नाम सुनकर ही मरीज के परिजन के पास आ जाते हैं
- गंभीर मरीजों के परिजन निजी एंबुलेंस की अवैध वसूली का होते शिकार
सरकारी आंकड़ों में एंबुलेंस
ट्रस्ट टूरिस्ट एंबुलेंस 51
स्कूल एंबुलेंस दो
फार्म एंबुलेंस 36
अधीन सरकारी एंबुलेंस 6
स्वतंत्र एंबुलेंस 80
ज्वाइंट स्टॉक कंपनी एंबुलेंस 1
सोशल वेलफेयर एंबुलेंस 8
सरकारी उत्तर प्रदेश एंबुलेंस 75
वर्जन
जनपद में कुल 259 एंबुलेंस अभिलेखों में दर्ज हैं। एक मार्च वर्ष 2019 से कंपनी से ही निर्धारित एंबुलेंस आ रही हैं। अलग से उनका कोई पंजीयन नहीं किया जा रहा है। जिन पुरानी एंबुलेंस का पंजीयन है, वहीं चल रही हैं। - संजीव कुमार सिंह, एआरटीओ हरदोई