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Hardoi News: कोरोना के संभावित मामलों से निपटने के लिए मेडिकल काॅलेज में तैयारियां शुरू
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हरदोई। कोविड के बढ़ते दायरे को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के आधीन जिला अस्पताल में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। संभावित स्थिति को देखते हुए मरीजों को बेहतर इलाज मिले, इसके लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था करने के साथ ही आईसीयू व वेंटिलेटर से लेकर दवाओं की उपलब्धता, जांच किटों पर जोर दिया जा रहा है।
वर्ष 2019-20 में कोविड ने पूरे देश में अपना कहर बरपाया था। कोरोना संक्रमण से सैंकड़ों लोगों की जान चली गई थी। वहीं दूसरी लहर ने भी काफी कहर बरपाया था। अधिकांश लोगों का समय पर इलाज न हो पाने के कारण कई लोग इसका शिकार हो गए थे। एक बार फिर देश के केरल व महाराष्ट्र में कोविड-19 के नए वैरिएंट से पीड़ित लोग मिले हैं। बताया जा रहा कि भारत में अभी तक 257 लोग इस रोग से पीड़ित हो चुके हैं। इसको देखते हुए जनपद के स्वास्थ्य महकमे की ओर से तैयारी शुरू कर दी गई है। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला चिकित्सालय में कोविड से निपटने के लिए आईपीडी की 160 बेडों की नवीन इमारत में आईसीयू को तैयार कर लिया गया है। जांच केंद्र को भी अपडेट किया जा रहा है।
ऑक्सीजन संयंत्र नहीं कर रहे काम सिलिंडर व कंसंट्रेटर की हो रही व्यवस्था
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सिलिंडर व कंसंट्रेटर की व्यवस्था की जा रही है, जबकि मेडिकल कॉलेज परिसर में चार करोड़ से चार ऑक्सीजन संयंत्र लगे हुए हैं। दो संयंत्र पीएम केयर फंड से और एचसीएल फाउंडेशन व एक अन्य संस्था से दो ऑक्सीजन संयंत्र लगवाए गए। इमरजेंसी के पास स्थित संयत्र की क्षमता 500 लीटर प्रति मिनट है, जबकि महिला चिकित्सालय के पास लगे प्लांट में 250 लीटर प्रति मिनट और 375 लीटर प्रति मिनट की क्षमता है। परिसर में ही लगे दूसरे संयंत्र की क्षमता भी पांच सौ मीटर प्रति मिनट की है। उक्त संयंत्र काम नहीं कर रहे हैं। मरीजों को ऑक्सीजन के लिए सिलिंडर और कंसंट्रेटर की व्यवस्था की जा रही है। अस्पताल में 70 छोटे व 70 बड़े सिलिंडर हैं। 50 सिलिंडर और मंगवाए जा रहे हैं। कंसंट्रेटर की व्यवस्था भी की जा रही है।
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वार्ड में बंद वेंटिलेटरों की शुरू की जाएगी जांच, दिया जाएगा प्रशिक्षण
हरदोई। तकरीबन 75 लाख रुपये खर्च कर कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद खरीदे गए वेंटिलेटर मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल वार्ड के एक कमरे में बंद हैं। इनका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं किया गया है। वर्ष 2021 में पीएम केयर फंड से 39 पोर्टेबल वेंटिलेटर खरीदे गए थे। एक वेंटिलेटर पर लगभग पौने दो लाख रुपये खर्च हुए थे। अब कोरोना की तीसरी दस्तक के दौरान वेंटिलेटरों को निकाल कर क्रियाशीलता की जांच की जाएगी। प्रधानाचार्य ने बताया कि वेंटिलेटर वैसे तो क्रियाशील हैं, लेकिन उनकी जांच करा ली जाएगी। साथ ही वेंटिलेटर चलाने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा, क्योंकि अभी ऐसा कोई कर्मचारी नहीं है जो वेंटिलेटर चला सके।
दवाओं की उपलब्धता की मांगी गई रिपोर्ट
हरदोई। प्रधानाचार्य डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई ने बताया कि कोरोना अलर्ट आते ही स्वास्थ्य चिकित्सकों के साथ बैठक कर ली गई। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि दवाओं की उपलब्धता के बारे में रिपोर्ट बनाकर सोमवार तक दें ताकि आवश्यक दवाओं की पूर्ति कराई जा सके। प्रधानाचार्य ने बताया कि बेडों की व्यवस्था कर दी गई है। 160 बेडों की आईपीडी भवन में बेडों को लगाने के लिए निर्देशित कर दिया गया है, अगले एक सप्ताह में व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी।
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वर्ष 2019-20 में कोविड ने पूरे देश में अपना कहर बरपाया था। कोरोना संक्रमण से सैंकड़ों लोगों की जान चली गई थी। वहीं दूसरी लहर ने भी काफी कहर बरपाया था। अधिकांश लोगों का समय पर इलाज न हो पाने के कारण कई लोग इसका शिकार हो गए थे। एक बार फिर देश के केरल व महाराष्ट्र में कोविड-19 के नए वैरिएंट से पीड़ित लोग मिले हैं। बताया जा रहा कि भारत में अभी तक 257 लोग इस रोग से पीड़ित हो चुके हैं। इसको देखते हुए जनपद के स्वास्थ्य महकमे की ओर से तैयारी शुरू कर दी गई है। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला चिकित्सालय में कोविड से निपटने के लिए आईपीडी की 160 बेडों की नवीन इमारत में आईसीयू को तैयार कर लिया गया है। जांच केंद्र को भी अपडेट किया जा रहा है।
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ऑक्सीजन संयंत्र नहीं कर रहे काम सिलिंडर व कंसंट्रेटर की हो रही व्यवस्था
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सिलिंडर व कंसंट्रेटर की व्यवस्था की जा रही है, जबकि मेडिकल कॉलेज परिसर में चार करोड़ से चार ऑक्सीजन संयंत्र लगे हुए हैं। दो संयंत्र पीएम केयर फंड से और एचसीएल फाउंडेशन व एक अन्य संस्था से दो ऑक्सीजन संयंत्र लगवाए गए। इमरजेंसी के पास स्थित संयत्र की क्षमता 500 लीटर प्रति मिनट है, जबकि महिला चिकित्सालय के पास लगे प्लांट में 250 लीटर प्रति मिनट और 375 लीटर प्रति मिनट की क्षमता है। परिसर में ही लगे दूसरे संयंत्र की क्षमता भी पांच सौ मीटर प्रति मिनट की है। उक्त संयंत्र काम नहीं कर रहे हैं। मरीजों को ऑक्सीजन के लिए सिलिंडर और कंसंट्रेटर की व्यवस्था की जा रही है। अस्पताल में 70 छोटे व 70 बड़े सिलिंडर हैं। 50 सिलिंडर और मंगवाए जा रहे हैं। कंसंट्रेटर की व्यवस्था भी की जा रही है।
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वार्ड में बंद वेंटिलेटरों की शुरू की जाएगी जांच, दिया जाएगा प्रशिक्षण
हरदोई। तकरीबन 75 लाख रुपये खर्च कर कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद खरीदे गए वेंटिलेटर मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल वार्ड के एक कमरे में बंद हैं। इनका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं किया गया है। वर्ष 2021 में पीएम केयर फंड से 39 पोर्टेबल वेंटिलेटर खरीदे गए थे। एक वेंटिलेटर पर लगभग पौने दो लाख रुपये खर्च हुए थे। अब कोरोना की तीसरी दस्तक के दौरान वेंटिलेटरों को निकाल कर क्रियाशीलता की जांच की जाएगी। प्रधानाचार्य ने बताया कि वेंटिलेटर वैसे तो क्रियाशील हैं, लेकिन उनकी जांच करा ली जाएगी। साथ ही वेंटिलेटर चलाने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा, क्योंकि अभी ऐसा कोई कर्मचारी नहीं है जो वेंटिलेटर चला सके।
दवाओं की उपलब्धता की मांगी गई रिपोर्ट
हरदोई। प्रधानाचार्य डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई ने बताया कि कोरोना अलर्ट आते ही स्वास्थ्य चिकित्सकों के साथ बैठक कर ली गई। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि दवाओं की उपलब्धता के बारे में रिपोर्ट बनाकर सोमवार तक दें ताकि आवश्यक दवाओं की पूर्ति कराई जा सके। प्रधानाचार्य ने बताया कि बेडों की व्यवस्था कर दी गई है। 160 बेडों की आईपीडी भवन में बेडों को लगाने के लिए निर्देशित कर दिया गया है, अगले एक सप्ताह में व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी।