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Hardoi News: डबलडेकर के स्टॉपेज बढ़ाने की तैयारी, हरदोई में भी रुकेगी, मिलेगी राहत
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लखनऊ। डबलडेकर एक्सप्रेस के स्टॉपेज बढ़ाकर यात्रियों को राहत देने की तैयारी है। हरदोई व शाहजहांपुर आदि स्टेशनों पर ठहराव दिया जा सकता है। इससे पैसेंजरों को राहत हो जाएगी और रेलवे की आमदनी में भी वृद्घि होगी।
गाड़ी संख्या 12583 डबलडेकर एक्सप्रेस पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ जंक्शन से आनंदविहार के बीच चलती है। यह सुबह 4.55 बजे चलकर दोपहर 12.55 बजे आनंदविहार स्टेशन पहुंचती है। यह पूरी दूरी तय करने में ट्रेन आठ घंटे का समय लेती है। ट्रेन रविवार, मंगलवार, गुरुवार, शुक्रवार को चलाई जाती है। ट्रेन में चेयरकार का किराया महज 665 रुपये है, जबकि वंदे भारत एक्सप्रेस की चेयरकार का किराया 1410 रुपये, तेजस एक्सप्रेस की चेयरकार का 1701 रुपये व शताब्दी एक्सप्रेस का किराया 1390 रुपये है।
सस्ता किराया होने के बावजूद ट्रेन को पैसेंजर नहीं मिलते। दैनिक यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल ने बताया कि एक वक्त था, जब डबलडेकर में सीटों की मारामारी रहती थी। आज स्थिति यह है कि फेस्टिवल सीजन के अतिरिक्त पूरे साल ट्रेन में सीटें खाली रहती हैं। रविवार, मंगलवार, गुरुवार व शुक्रवार को इस ट्रेन की चेयरकार में क्रमशः 105, 984, 1032 व 1061 सीटें खाली हैं। वहीं अन्य चेयरकार ट्रेनों में वेटिंग चल रही है। ट्रेन का हरदोई में रोकने की मांग लम्बे समय से हो रही है। ऐसा होने पर यात्रियों व रेलवे, दोनों को राहत होगी।
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डबलडेकर एक्सप्रेस लखनऊ जंक्शन से आनंदविहार के बीच बरेली, मुरादाबाद, गाजियाबाद में ही ठहरती है। ऐसे में यात्रियों की मांग पर ट्रेन का हरदोई, शाहजहांपुर, रामपुर आदि स्टेशनों पर ठहराव दिया जा सकता है। हालांकि, अफसर इस मुद्दे पर अभी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
डबलडेकर एक्सप्रेस को यात्रियों की पसंदीदा ट्रेन बनाने के लिए इसका रूट बदलने की भी योजना बनाई गई। इसे सीतापुर के रास्ते दिल्ली तक चलाने का खाका तैयार किया गया। टाइमटेबल भी बना, पर उसे अमलीजामा नहीं पहनाया गया। ट्रेन को गोरखपुर रूट पर चलाने की भी योजना बनाई गई, जो धरी की धरी रह गई।
एसएस उप्पल बताते हैं कि डबलडेकर एक्सप्रेस जब पटरी पर उतरी थी तो यात्रियों की पसंदीदा ट्रेनों में शुमार थी। पर, जैसे-जैसे दिल्ली रूट पर लग्जरी ट्रेनें बढ़ीं, डबलडेकर पर अफसरों ने ध्यान देना ही बंद कर दिया। मच्छरों का आतंक, गंदगी, ट्रेन का पर्याय बन गई। रूट पर अब तेजस जैसी कारपोरेट ट्रेन के अतिरिक्त सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत व शताब्दी एक्सप्रेस सरीखी ट्रेनों के होने से डबलडेकर को पैसेंजर नहीं मिलते हैं।
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गाड़ी संख्या 12583 डबलडेकर एक्सप्रेस पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ जंक्शन से आनंदविहार के बीच चलती है। यह सुबह 4.55 बजे चलकर दोपहर 12.55 बजे आनंदविहार स्टेशन पहुंचती है। यह पूरी दूरी तय करने में ट्रेन आठ घंटे का समय लेती है। ट्रेन रविवार, मंगलवार, गुरुवार, शुक्रवार को चलाई जाती है। ट्रेन में चेयरकार का किराया महज 665 रुपये है, जबकि वंदे भारत एक्सप्रेस की चेयरकार का किराया 1410 रुपये, तेजस एक्सप्रेस की चेयरकार का 1701 रुपये व शताब्दी एक्सप्रेस का किराया 1390 रुपये है।
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सस्ता किराया होने के बावजूद ट्रेन को पैसेंजर नहीं मिलते। दैनिक यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल ने बताया कि एक वक्त था, जब डबलडेकर में सीटों की मारामारी रहती थी। आज स्थिति यह है कि फेस्टिवल सीजन के अतिरिक्त पूरे साल ट्रेन में सीटें खाली रहती हैं। रविवार, मंगलवार, गुरुवार व शुक्रवार को इस ट्रेन की चेयरकार में क्रमशः 105, 984, 1032 व 1061 सीटें खाली हैं। वहीं अन्य चेयरकार ट्रेनों में वेटिंग चल रही है। ट्रेन का हरदोई में रोकने की मांग लम्बे समय से हो रही है। ऐसा होने पर यात्रियों व रेलवे, दोनों को राहत होगी।
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डबलडेकर एक्सप्रेस लखनऊ जंक्शन से आनंदविहार के बीच बरेली, मुरादाबाद, गाजियाबाद में ही ठहरती है। ऐसे में यात्रियों की मांग पर ट्रेन का हरदोई, शाहजहांपुर, रामपुर आदि स्टेशनों पर ठहराव दिया जा सकता है। हालांकि, अफसर इस मुद्दे पर अभी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
डबलडेकर एक्सप्रेस को यात्रियों की पसंदीदा ट्रेन बनाने के लिए इसका रूट बदलने की भी योजना बनाई गई। इसे सीतापुर के रास्ते दिल्ली तक चलाने का खाका तैयार किया गया। टाइमटेबल भी बना, पर उसे अमलीजामा नहीं पहनाया गया। ट्रेन को गोरखपुर रूट पर चलाने की भी योजना बनाई गई, जो धरी की धरी रह गई।
एसएस उप्पल बताते हैं कि डबलडेकर एक्सप्रेस जब पटरी पर उतरी थी तो यात्रियों की पसंदीदा ट्रेनों में शुमार थी। पर, जैसे-जैसे दिल्ली रूट पर लग्जरी ट्रेनें बढ़ीं, डबलडेकर पर अफसरों ने ध्यान देना ही बंद कर दिया। मच्छरों का आतंक, गंदगी, ट्रेन का पर्याय बन गई। रूट पर अब तेजस जैसी कारपोरेट ट्रेन के अतिरिक्त सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत व शताब्दी एक्सप्रेस सरीखी ट्रेनों के होने से डबलडेकर को पैसेंजर नहीं मिलते हैं।