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Hardoi News: पाला से आलू की फसल में लग रहा झुलसा रोग

Thu, 02 Jan 2025 11:19 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई Updated Thu, 02 Jan 2025 11:19 PM IST
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Potato crop is suffering from blight due to frost
फोटो 36 : खेत में खड़ी गेहूं की फसल। स्रोत : विभाग
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फोटो 37 : आलू की फसल में लगा झुलसा रोग। स्रोत : विभाग
- कृषि वैज्ञानिक ने आलू, टमाटर, बैगन, मिर्च, मटर और सरसों की फसल के लिए बताया नुकसानदायक
- रबी फसलों में सिर्फ गेहूं के लिए लाभकारी है वर्तमान मौसम
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। तापमान में आ रही गिरावट और धूप न निकलने का असर आलू की फसल पर दिखाई देने लगा है। आलू की पौधों की पत्तियां तापमान में गिरावट और पाला के कारण सूखने और अंडाकार आकृति लेने लगी हैं। जिसका सीधा असर पैदावर पर पड़ेगा। मौसम और पाला सिर्फ गेहूं की फसल के लिए ही फायदेमंद है, जबकि आलू सहित सब्जियों और सरसों व मटर के लिए नुकसानदायक है।
वैसे तो सर्दी का मौसम है, लेकिन मौसम में पिछले चार दिनों से आए अचानक बदलाव से दिन में धूप भी सही नहीं निकल रही है। आसमान में बादल और धुंध छाई रहती है। साथ ही इसके पाला भी गिरने लगा है। पाला गिरने से तापमान में भी गिरावट हो रही है। तापमान में गिरावट और दिन में धूप न निकलने से फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है। तापमान में गिरावट और पाला का सीधा असर आलू, टमाटर, बैगन, मिर्च, सरसों और मटर की फसल की पर पड़ रहा है। आलू की फसल में तो झुलसा रोग लगने लगा है। आलू की पौधा की पत्तियां सूखने लगी हैं और अंडाकार मुड़ने लगी हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र तत्योरा के प्रभारी कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके तिवारी ने बताया कि तापमान में गिरावट और पाला रबी फसलों में सिर्फ गेहूं के लिए ही लाभकारी है। जिससे गेहूं की पौध में ग्रोथ आएगी और पैदावार भी बढ़ने की संभावना है। आलू, मटर, टमाटर, बैगन, मिर्च और सरसों की पैदावार प्रभावित होगी। बताया कि अब मौसम चक्र में बदलाव दिखाई दे रहा है। जनवरी-फरवरी में आलू की फसल में झुलसा रोग लगने लगा है। यह रोग आल्टर्नेरिया सोलेनाई फंगस से होता है।
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किसान बचाव के लिए इन दवाओं का करें छिड़काव
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके तिवारी ने बताया कि आलू की फसल में पिछेती झुलसा नामक रोग लग रहा है। रोग में पौधों की पत्तियां किनारे से ऊपर की तरफ हल्की सी मुड़ने लगती है और किनारे से सूखने लगती हैं। इसकी रोकथाम करने के लिए किसानों को फसल पर दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। बताया कि कैप्टन 79 प्रतिशत और हेक्साकॉनजोल 5 प्रतिशत को 1-2 ग्राम लेकर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। कार्बेंडाइजम 12 प्रतिशत और मैनकोजेब 63 प्रतिशत को मिलाकर 2 से 3 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी, मेटालैक्साइल 8 प्रतिशत और मैनकोजेब 64 प्रतिशत को मिलाकर 2.5 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी जा रही है।
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