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आंगनबाड़ी केंद्रों पर अव्यवस्थाएं हावी
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Fri, 15 May 2015 12:54 AM IST
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विकास क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों का बुरा हाल
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है। कार्यकत्रियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी और बाल विकास परियोजना कार्यालय
पर स्टाफ की कमी से भी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। एक अरसे से किराए के
खंडहर में चल रहे केंद्र के अंदर बैठ कर कार्य करने से कर्मचारी खौफ खाते
हैं।
बाल विकास परियोजना कार्यालय पर स्टाफ और भवन की समस्या के बीच योजना का संचालन हो रहा है। इस माह आए भूकंप के झटकों के बाद से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां केंद्र के अंदर बैठक कर कार्य करने से कतरा रही हैं। गुरुवार को भी कार्यकत्रियां बाहर बैठ कर कार्य करते नजर्र आइं।
उधर, सीडीपीओ मंजू वर्मा ने बताया कि स्टाफ की कमी से दिक्कतें आती हैं। उनके पास दो लिपिकों के सापेक्ष केवल एक लिपिक ही है। आठ सुपरवाइजर्स के मानकों के सापेक्ष केवल तीन सुपरवाइजर्स से कार्य चलाया जा रहा है। चपरासी का पद भी लंबे समय से रिक्त है। भवन की समस्या से कार्यालय अलग और गोदाम अलग स्थान पर किराए पर ले रखा गया है।
वितरण के समय कार्यालय से गोदाम तक काफी भागदौड़ करनी होती है। उधर, कई केंद्रों पर की हालत भी बदहाल है। गुरुवार को क्षेत्र के कई गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल पता करने पर सामने आया कि सभी केंद्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की तैनाती नहीं है। इसलिए एक कार्यकत्री के पास कई-कई केंद्रों की भी जिम्मेदारी है।
इस अतिरिक्त जिम्मेदारी के साथ ही कार्यकत्रियों को राशन कार्ड फार्म भरवाने, बीएलओ, टीकाकरण और पल्स पोलिया अभियान से जुड़ी अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ भी उठाना पड़ रहा है। देहलिया रामपुर में तीन केंद्र संचालित हैं। देहलिया मध्य और पश्चिम के केंद्र प्राथमिक विद्यालय और देहलिया पूर्वी का केंद्र राजेश के आवास पर संचालित है।
गुरुवार दोपहर 12 बजे किसी भी केंद्र पर कार्यकत्री मौजूद नहीं थी। इस बारे में पता चला कि स्वास्थ्य उपकेंद्र पर जारी टीकाकरण अभियान में ड्यूटी करने गईं हैं। ग्रामीणों से पोषाहार के बारे में पूछा गया तो पता चला कि प्रति माह वितरण निश्चित समय पर नहीं हो पाता है।
हन्न पसिगवां गांव में केंद्र संचालित है, पर यहां भी पोषाहार नियमित नहीं मिल पाने की शिकायतें रखीं गईं। इसी तरह से चठिया, कनगुइया और बरखेरिया में भी आंगनबाड़ी केंद्र कई-कई दिन नहीं खुलने की शिकायतें की गई हैं। उधर, इस बाबत जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रकाश चौरसिया ने बताया कि भवन बदलने को अफसरों को पत्र भेजा गया है, अनुमति मिलते ही बदल दिया जाएगा।
बाल विकास परियोजना कार्यालय पर स्टाफ और भवन की समस्या के बीच योजना का संचालन हो रहा है। इस माह आए भूकंप के झटकों के बाद से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां केंद्र के अंदर बैठक कर कार्य करने से कतरा रही हैं। गुरुवार को भी कार्यकत्रियां बाहर बैठ कर कार्य करते नजर्र आइं।
उधर, सीडीपीओ मंजू वर्मा ने बताया कि स्टाफ की कमी से दिक्कतें आती हैं। उनके पास दो लिपिकों के सापेक्ष केवल एक लिपिक ही है। आठ सुपरवाइजर्स के मानकों के सापेक्ष केवल तीन सुपरवाइजर्स से कार्य चलाया जा रहा है। चपरासी का पद भी लंबे समय से रिक्त है। भवन की समस्या से कार्यालय अलग और गोदाम अलग स्थान पर किराए पर ले रखा गया है।
वितरण के समय कार्यालय से गोदाम तक काफी भागदौड़ करनी होती है। उधर, कई केंद्रों पर की हालत भी बदहाल है। गुरुवार को क्षेत्र के कई गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल पता करने पर सामने आया कि सभी केंद्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की तैनाती नहीं है। इसलिए एक कार्यकत्री के पास कई-कई केंद्रों की भी जिम्मेदारी है।
इस अतिरिक्त जिम्मेदारी के साथ ही कार्यकत्रियों को राशन कार्ड फार्म भरवाने, बीएलओ, टीकाकरण और पल्स पोलिया अभियान से जुड़ी अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ भी उठाना पड़ रहा है। देहलिया रामपुर में तीन केंद्र संचालित हैं। देहलिया मध्य और पश्चिम के केंद्र प्राथमिक विद्यालय और देहलिया पूर्वी का केंद्र राजेश के आवास पर संचालित है।
गुरुवार दोपहर 12 बजे किसी भी केंद्र पर कार्यकत्री मौजूद नहीं थी। इस बारे में पता चला कि स्वास्थ्य उपकेंद्र पर जारी टीकाकरण अभियान में ड्यूटी करने गईं हैं। ग्रामीणों से पोषाहार के बारे में पूछा गया तो पता चला कि प्रति माह वितरण निश्चित समय पर नहीं हो पाता है।
हन्न पसिगवां गांव में केंद्र संचालित है, पर यहां भी पोषाहार नियमित नहीं मिल पाने की शिकायतें रखीं गईं। इसी तरह से चठिया, कनगुइया और बरखेरिया में भी आंगनबाड़ी केंद्र कई-कई दिन नहीं खुलने की शिकायतें की गई हैं। उधर, इस बाबत जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रकाश चौरसिया ने बताया कि भवन बदलने को अफसरों को पत्र भेजा गया है, अनुमति मिलते ही बदल दिया जाएगा।