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Hardoi News: पुल न होने पर बीस किमी का चक्कर काटते ग्रामीण
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बेहटागोकुल। शाहाबाद विधान सभा क्षेत्र मेें दर्जनों गांवों के लोगों को गर्रा नदी पर पुल न होने के कारण 25 किमी का चक्कर काटना पड़ रहा है। इसमें सबसे अधिक समस्या मरीज व गर्भवती महिलाओं को होती है।
क्षेत्र के हिरनकूदा, नसेउली डामर, ठेहापुर, लखमापुर, जमौरा, सहजनपुर, सकरौली, असमदपुर, वहड़ियापुर, मड़ैया, बूटामऊ, बिजपुरिया, नौसहरा सहित 25 गांवों के लोग गर्रा नदी के दूसरे छोर पर रहते है। गांव और मुख्य कस्बे की दूरी मात्र आठ किमी है, मगर नदी पर पुल न होने के कारण ग्रामीणों को लंबा चक्कर काटकर कस्बे तक आना पड़ता है। एक-दो नाव चलती हैं, मगर उन पर भी अधिक सवारी नहीं आ सकतीं। 30 हजार लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है लेकिन जिम्मेदार पुल निर्माण पर सिर्फ आश्वासन ही देते हैं।
लोगों ने बताई समस्या
किसान रामकुमार कश्यप ने बताया कि फसलें मंडी ले जानी पड़ती हैं और खाद बीज लाना होता है। नदी पर पुल न होने से अधिक किराया खर्च करना पड़ता है और समय भी अधिक लगता है।
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पूर्व प्रधान नसेउली अशोक सिंह का कहना है वह खुद को मुख्यालय से अलग महसूस करते हैं। इस क्षेत्र के लोग पुल बन जाने पर मात्र आठ किमी की दूरी तय कर पहुंच सकते हैं।
ठेहापुर के रजित मिश्र का कहना है कि वह पाली कस्बे में रोज पढ़ने जाते हैं। लेट होने पर नाव वाला चला जाता है जिससे वह विद्यालय विलंब से पहुंचते हैं। इससे उनकी पढ़ाई में समस्या का आ रही है।
निवासी नसेउली अध्यापक धीरेंद्र सिंह का कहना है कि लोगों को ब्लॉक या जिला मुख्यालय जाने में अधिक समय बर्बाद हो जाता है। यदि पुल बन जाए तो बड़ी राहत मिलेगी।
एसडीएम धीरेंद्र सिंह का कहना है कि नदी पर पुल स्वीकृत हो चुका है। इस साल पुल का निर्माण कार्य शुरू होने की पूरी संभावना है।
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क्षेत्र के हिरनकूदा, नसेउली डामर, ठेहापुर, लखमापुर, जमौरा, सहजनपुर, सकरौली, असमदपुर, वहड़ियापुर, मड़ैया, बूटामऊ, बिजपुरिया, नौसहरा सहित 25 गांवों के लोग गर्रा नदी के दूसरे छोर पर रहते है। गांव और मुख्य कस्बे की दूरी मात्र आठ किमी है, मगर नदी पर पुल न होने के कारण ग्रामीणों को लंबा चक्कर काटकर कस्बे तक आना पड़ता है। एक-दो नाव चलती हैं, मगर उन पर भी अधिक सवारी नहीं आ सकतीं। 30 हजार लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है लेकिन जिम्मेदार पुल निर्माण पर सिर्फ आश्वासन ही देते हैं।
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लोगों ने बताई समस्या
किसान रामकुमार कश्यप ने बताया कि फसलें मंडी ले जानी पड़ती हैं और खाद बीज लाना होता है। नदी पर पुल न होने से अधिक किराया खर्च करना पड़ता है और समय भी अधिक लगता है।
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पूर्व प्रधान नसेउली अशोक सिंह का कहना है वह खुद को मुख्यालय से अलग महसूस करते हैं। इस क्षेत्र के लोग पुल बन जाने पर मात्र आठ किमी की दूरी तय कर पहुंच सकते हैं।
ठेहापुर के रजित मिश्र का कहना है कि वह पाली कस्बे में रोज पढ़ने जाते हैं। लेट होने पर नाव वाला चला जाता है जिससे वह विद्यालय विलंब से पहुंचते हैं। इससे उनकी पढ़ाई में समस्या का आ रही है।
निवासी नसेउली अध्यापक धीरेंद्र सिंह का कहना है कि लोगों को ब्लॉक या जिला मुख्यालय जाने में अधिक समय बर्बाद हो जाता है। यदि पुल बन जाए तो बड़ी राहत मिलेगी।
एसडीएम धीरेंद्र सिंह का कहना है कि नदी पर पुल स्वीकृत हो चुका है। इस साल पुल का निर्माण कार्य शुरू होने की पूरी संभावना है।