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हरदोई: तिलावतों की गूंज में नूरानी हुआ माहौल, कुरान के जरिए रब को राजी करने में लगे लोग
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हरदोई के पिहानी में रमजान के पहले अशरे में इबादतों की धूम है। लॉकडाउन के बीच रोजेदार घर-घर रोजा, नमाज और तिलावत-ए-कुरान के जरिए अपने रब को राजी करने में लगे हुए हैं। पहले अशरे का आधा हिस्सा बीत जाने के बाद जकात और सदकात की अदायगी का दौर भी जोर शोर से जारी है।
रमजान को दस-दस दिन के तीन अशरों (हिस्सों) में बांटा गया है। प्रत्येक अशरा अपने आप में एक अलग विशेषता लिए हुए है। ईदगाह के इमाम मौलाना उसमान गनी मजहिरी कहते हैं कि रमजान का पहला अशरा रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा व अंतिम अशरा जहन्नुम से आजादी का है। पहला अशरा जारी है, इसमें खुदा की इबादत कर उसकी खास रहमतों के नुजूल की दुआएं मांगी जाएं। अल्लाह फरमाता है कि रोजा मेरे लिए है, और मैं ही इसका बदला दूंगा। अल्लाह ने रोजेदार के लिए दो बड़ी खुशियां अता की हैं। एक तब जब वह इफ्तार करता है और दूसरी तब हासिल होगी जब वह अपने रब से रूबरू होगा।
इस माह-ए-मुबारक का मकसद संपन्न लोगों को गरीबों की भूख का एहसास दिलाना और उनके दिलों में गरीबों से हमदर्दी का जज्बा पैदा करना है इसलिए इबादतों के साथ ही अपने आस-पास के गरीब जरूरतमंदों का ख्याल रखें। वो बेहतर मुसलमान नहीं हो सकता जिसके साहिब-ए-हैसियत होने के बावजूद उसका पड़ोसी भूखा सो जाए। मौलाना ने आह्वान किया कि लॉकडाउन के दौरान जो बेहद जरूरतमंद लोग बस्ती में हों रमजान की इबादतों के साथ उन्हें तलाश कर उनकी मदद करें।
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रमजान को दस-दस दिन के तीन अशरों (हिस्सों) में बांटा गया है। प्रत्येक अशरा अपने आप में एक अलग विशेषता लिए हुए है। ईदगाह के इमाम मौलाना उसमान गनी मजहिरी कहते हैं कि रमजान का पहला अशरा रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा व अंतिम अशरा जहन्नुम से आजादी का है। पहला अशरा जारी है, इसमें खुदा की इबादत कर उसकी खास रहमतों के नुजूल की दुआएं मांगी जाएं। अल्लाह फरमाता है कि रोजा मेरे लिए है, और मैं ही इसका बदला दूंगा। अल्लाह ने रोजेदार के लिए दो बड़ी खुशियां अता की हैं। एक तब जब वह इफ्तार करता है और दूसरी तब हासिल होगी जब वह अपने रब से रूबरू होगा।
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इस माह-ए-मुबारक का मकसद संपन्न लोगों को गरीबों की भूख का एहसास दिलाना और उनके दिलों में गरीबों से हमदर्दी का जज्बा पैदा करना है इसलिए इबादतों के साथ ही अपने आस-पास के गरीब जरूरतमंदों का ख्याल रखें। वो बेहतर मुसलमान नहीं हो सकता जिसके साहिब-ए-हैसियत होने के बावजूद उसका पड़ोसी भूखा सो जाए। मौलाना ने आह्वान किया कि लॉकडाउन के दौरान जो बेहद जरूरतमंद लोग बस्ती में हों रमजान की इबादतों के साथ उन्हें तलाश कर उनकी मदद करें।
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