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शांति को निकाली कलश यात्रा
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Wed, 22 Apr 2015 12:36 AM IST
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शांति और सृजन के उद्देश्य को लेकर नौ नौ कुंडीय
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गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ विशाल कलश शोभा यात्रा के साथ किया गया। इस
दौरान तेज धूप की तपिश तथा गर्म हवाएं श्रद्धालुओं की आस्था डिगा न सकी। कहा
जाता है कि कलश विश्व ब्रह्मांड व विराट ब्रह्म का प्रतीक है। इसे शांति
और सृजन का संदेश वाहक कहा गया है।
अखिल विश्व शांति कुंज हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित महायज्ञ का शुभारंभ शांति कुंज हरिद्वार से आई टोली द्वारा देव पूजन एवं कलश पूजन के साथ हुआ। कलश पूजन पर आचार्य राम तपस्या ने कहा कि कलश विश्व ब्रह्मांड का, विराट ब्रह्मा का प्रतीक है। संपूर्ण देवता कलश रूपी पिंड या ब्रह्मांड में एक साथ समाएं हुए हैं।
एक ही केंद्र में समस्त देवताओं को देखने को कलश की स्थापना की जाती है। नारी में इस ब्रह्मांड को धारण करने की शक्ति है, इसलिए वह धात्री कहलाती है। कहा कि परमपिता परमात्मा की बनाई हुई इस सृष्टि में नारी में पृथ्वी के समान सारी शक्तियां निहित हैं।
गायत्री मां की महिमा को बताते हुए शांतिकुंज हरिद्वार से आए अनिल ठाकुर ने कहा कि भारतीय संस्कृति का उद्गम, ज्ञान गंगोत्री गायत्री ही है। गायत्री को सद्विचार और यज्ञ को सत्कर्म का प्रतीक मानते हैं। इन दोनों का सम्मिलित स्वरूप सद्भावनाओं एवं सद्रप्रवत्तियों को बढ़ाते हुए विश्व शांति एवं मानव कल्याण का माध्यम बनता है और प्राणिमात्र के कल्याण की दिशा निर्धारित होती है।
कलश के बाबत कहा कि कलश को सभी देव शक्तियों, तीर्थों आदि का संयुक्त प्रतीक मानकर उसे स्थापित पूजित किया जाता है। मनुष्य में घट के समान धारण करने की पात्रता क्षमता है। हर व्यक्ति में धारण करने की क्षमता होती है उसे अपनी पात्रता बढ़ानी चाहिए। इसके बाद कलश यात्रा गायत्री शक्ति पीठ अशराफ टोला से निकाली गई।
शोभायात्रा में महिलाओं ने पीत वस्त्र धारण कर कलश सिर पर धारण कर पंक्तिबद्ध चलकर शामिल हुई और घर-घर अलख जगाएंगे हम, हम बदलेंगे युग बदलेगा आदि नारे भी लगाए। देवपूजन बृजपाल सिंह, कलश पूजन पीसी शुक्ला, संचालन हरिहर वत्स ने किया।
इस मौके पर भगवत शरण अवस्थी, राम बाबू द्विवेदी, रमेश सिंह, लक्ष्मी नारायन पांडे, जय भगवान अग्रवाल, रेखा त्रिपाठी, मीडिया प्रभारी संजय सिंह, सुरेश चंद्र त्रिपाठी, वैरिस्टर सिंह, गुरु प्रसाद, रामचंद्र, मनीष, कुलदीप यादव आदि मौजूद थे।
अखिल विश्व शांति कुंज हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित महायज्ञ का शुभारंभ शांति कुंज हरिद्वार से आई टोली द्वारा देव पूजन एवं कलश पूजन के साथ हुआ। कलश पूजन पर आचार्य राम तपस्या ने कहा कि कलश विश्व ब्रह्मांड का, विराट ब्रह्मा का प्रतीक है। संपूर्ण देवता कलश रूपी पिंड या ब्रह्मांड में एक साथ समाएं हुए हैं।
एक ही केंद्र में समस्त देवताओं को देखने को कलश की स्थापना की जाती है। नारी में इस ब्रह्मांड को धारण करने की शक्ति है, इसलिए वह धात्री कहलाती है। कहा कि परमपिता परमात्मा की बनाई हुई इस सृष्टि में नारी में पृथ्वी के समान सारी शक्तियां निहित हैं।
गायत्री मां की महिमा को बताते हुए शांतिकुंज हरिद्वार से आए अनिल ठाकुर ने कहा कि भारतीय संस्कृति का उद्गम, ज्ञान गंगोत्री गायत्री ही है। गायत्री को सद्विचार और यज्ञ को सत्कर्म का प्रतीक मानते हैं। इन दोनों का सम्मिलित स्वरूप सद्भावनाओं एवं सद्रप्रवत्तियों को बढ़ाते हुए विश्व शांति एवं मानव कल्याण का माध्यम बनता है और प्राणिमात्र के कल्याण की दिशा निर्धारित होती है।
कलश के बाबत कहा कि कलश को सभी देव शक्तियों, तीर्थों आदि का संयुक्त प्रतीक मानकर उसे स्थापित पूजित किया जाता है। मनुष्य में घट के समान धारण करने की पात्रता क्षमता है। हर व्यक्ति में धारण करने की क्षमता होती है उसे अपनी पात्रता बढ़ानी चाहिए। इसके बाद कलश यात्रा गायत्री शक्ति पीठ अशराफ टोला से निकाली गई।
शोभायात्रा में महिलाओं ने पीत वस्त्र धारण कर कलश सिर पर धारण कर पंक्तिबद्ध चलकर शामिल हुई और घर-घर अलख जगाएंगे हम, हम बदलेंगे युग बदलेगा आदि नारे भी लगाए। देवपूजन बृजपाल सिंह, कलश पूजन पीसी शुक्ला, संचालन हरिहर वत्स ने किया।
इस मौके पर भगवत शरण अवस्थी, राम बाबू द्विवेदी, रमेश सिंह, लक्ष्मी नारायन पांडे, जय भगवान अग्रवाल, रेखा त्रिपाठी, मीडिया प्रभारी संजय सिंह, सुरेश चंद्र त्रिपाठी, वैरिस्टर सिंह, गुरु प्रसाद, रामचंद्र, मनीष, कुलदीप यादव आदि मौजूद थे।