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Hardoi News: आग से झुलसे मरीजों को सामान्य रोगियों संग हो रहा इलाज
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संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई । मेडिकल काॅलेज के अधीन जिला अस्पताल में पिछले तीन वर्षों से आग से झुलसे मरीजों के लिए कोई वार्ड रिजर्व नहीं किया गया है। उनका इलाज सामान्य मरीजों के साथ ही किया जा रहा है। ऐसे में उन्हें इंफेक्शन का खतरा बना रहता है।
आग से झुलसे मरीजों को हर तरह के इंफेक्शन से बचाने की जरूरत होती है। इनके इलाज के लिए एक सेपरेट वार्ड की जरूरत होती है जिसमें बहुत ज्यादा साफ-सफाई का ध्यान रखना पड़ता है। साथ ही वार्ड में एसी भी जरूरी होता है। इसके विपरित मेडिकल कॉलेज में बर्न के मरीजों का इलाज सामान्य मरीजों के साथ किया जा रहा है।
मेडिकल काॅलेज में पिछले तीन वर्षो के बाद भी आग से झुलसे मरीजों के लिए कोई वार्ड भी रिजर्व नहीं किया गया है। इससे इन मरीजों को इंफेक्शन फैलने का भी डर रहता है।
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करीब तीन वर्ष पहले रिजर्व बना था बर्न वार्ड
जिला अस्पताल के परिसर में ब्लड बैंक के निकट एक बर्न वार्ड बना हुआ था। जहां पर 10 बेड की व्यवस्था थी। यहां पर दो एसी लगी हुई थीं। जिससे मरीजों का इलाज किया जा रहा था। कर्मचारी भी इसके लिए रिजर्व थे।
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अगस्त से अब तक 16 भर्ती हुए मरीज
मेडिकल काॅलेज में अगस्त के महीने में करीब 10 आग से झुलसे मरीज आए थे। वही सितंबर में अब तक आधा दर्जन मरीज आ चुके हैं। इस तरह से 16 मरीज आए चुके हैं।
वर्जन
बर्न वार्ड अभी रिजर्व नही है। आईपीडी का भवन करीब दो महीने बाद हैंडओवर होने का अनुमान है। उसके बाद बर्न वार्ड भी रिजर्व कर दिया जाएगा।
डॉ.जेके वर्मा, सीएमएस
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हरदोई । मेडिकल काॅलेज के अधीन जिला अस्पताल में पिछले तीन वर्षों से आग से झुलसे मरीजों के लिए कोई वार्ड रिजर्व नहीं किया गया है। उनका इलाज सामान्य मरीजों के साथ ही किया जा रहा है। ऐसे में उन्हें इंफेक्शन का खतरा बना रहता है।
आग से झुलसे मरीजों को हर तरह के इंफेक्शन से बचाने की जरूरत होती है। इनके इलाज के लिए एक सेपरेट वार्ड की जरूरत होती है जिसमें बहुत ज्यादा साफ-सफाई का ध्यान रखना पड़ता है। साथ ही वार्ड में एसी भी जरूरी होता है। इसके विपरित मेडिकल कॉलेज में बर्न के मरीजों का इलाज सामान्य मरीजों के साथ किया जा रहा है।
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मेडिकल काॅलेज में पिछले तीन वर्षो के बाद भी आग से झुलसे मरीजों के लिए कोई वार्ड भी रिजर्व नहीं किया गया है। इससे इन मरीजों को इंफेक्शन फैलने का भी डर रहता है।
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करीब तीन वर्ष पहले रिजर्व बना था बर्न वार्ड
जिला अस्पताल के परिसर में ब्लड बैंक के निकट एक बर्न वार्ड बना हुआ था। जहां पर 10 बेड की व्यवस्था थी। यहां पर दो एसी लगी हुई थीं। जिससे मरीजों का इलाज किया जा रहा था। कर्मचारी भी इसके लिए रिजर्व थे।
अगस्त से अब तक 16 भर्ती हुए मरीज
मेडिकल काॅलेज में अगस्त के महीने में करीब 10 आग से झुलसे मरीज आए थे। वही सितंबर में अब तक आधा दर्जन मरीज आ चुके हैं। इस तरह से 16 मरीज आए चुके हैं।
वर्जन
बर्न वार्ड अभी रिजर्व नही है। आईपीडी का भवन करीब दो महीने बाद हैंडओवर होने का अनुमान है। उसके बाद बर्न वार्ड भी रिजर्व कर दिया जाएगा।
डॉ.जेके वर्मा, सीएमएस