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Hardoi News: दुरुस्त हो गए ऑक्सीजन प्लांट, मरीजों के बेड पर होने लगी आपूर्ति

Tue, 24 Feb 2026 10:34 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 24 Feb 2026 10:34 PM IST
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Oxygen plants have been repaired, and supplies are being made to patients' beds.
फोटो- 19- इमरजेंसी के रेड जोन में पाइप लाइन के प्वाइंट से मरीजों को दी जा रही ऑक्सीजन। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट दुरुस्त कर दिए गए हैं। अब अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड और अन्य वार्डों में भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन के लिए सिलिंडर या कंसंट्रेटर के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। पाइपलाइन के माध्यम से हर बेड तक ऑक्सीजन प्वाइंट तक सीधे प्लांट से ही ऑक्सीजन पहुंचाई जाने लगी है।
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मेडिकल कॉलेज के गेट के पास बने पीकू वार्ड के पास ऑक्सीजन प्लांट लगा है। 500 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन की क्षमता वाले इस संयंत्र से इमरजेंसी के अतिरिक्त आईसीयू वार्ड में भी सप्लाई होनी है। अभी तक यह प्लांट काम नहीं कर रहा था। इससे मरीजों को कंसंट्रेट और सिलिंडर की मदद से ऑक्सीजन दी जा रही थी। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को भी ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाने पर काफी खर्च करना पड़ रहा था।
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बीते तीन माह से ऑक्सीजन प्लांट खराब पड़ा था। प्लांट की मशीनें प्रेशर नहीं बना पा रही थीं इस वजह से उत्पादन ठप हो गया था। मंगलवार को सायरिक्स कंपनी के अभियंताओं ने प्लांट की मरम्मत कर दी। संस्था के अभियंता प्रद्युम्न ने बताया कि प्लांट दुरुस्त कर चालू कर दिया गया है। इसके बाद वार्ड के अंदर बेड तक लगे ऑक्सीजन सप्लाई के प्वाइंट से ऑक्सीजन दी जाने लगी है।
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संयंत्र चलने से बचेगा सिलिंडर भरवाने का खर्च
अभी तक ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन को निजी स्तर पर सिलिंडर रिफिल करवाने पड़ते थे। सूत्रों के मुताबिक, रोजाना औसतन 25 से 30 सिलिंडर की खपत हो रही थी जिस पर हर महीने लाखों खर्च हो रहे थे। प्लांट चालू होने से अब मेडिकल कॉलेज आत्मनिर्भर हो गया है और इस बजट का उपयोग अन्य चिकित्सीय सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकेगा।





संयंत्र से इमरजेंसी तक आने वाले पाइप लाइन को बदलकर बेडों तक प्वाइंट के माध्यम से ऑक्सीजन पहुंचाई जाने लगी है। बेडों तक ऑक्सीजन पहुंचने से मरीजों को राहत मिली है और सिलिंडरों की निर्भरता भी कम हुई। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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