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इंदौर-नासिक का प्याज निकाल रहा आंसू, दर्द दे रहा खास
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हरदोई। प्याज के बढ़े दाम के कारण दाल की प्याली का तड़का गायब हो गया है। तमिलनाडु और कर्नाटक से प्याज की आवक बंद होने के कारण जिले में इंदौर और नासिक से प्याज आ रहा है लेकिन ये लोगों के आंसू निकाल रहा है। मंगलवार को फुटकर में 60 रुपये प्रति किलो तक प्याज बेचा गया।
जिले में प्याज की बड़ी मंडियां हरदोई, बिलग्राम, मल्लावां व माधौगंज में हैं। यहां के थोक व्यापारी तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र से प्याज मंगवाते हैं। इसके अलावा इंदौर, नासिक से भी प्याज लाया जाता है। तमिलनाडु ,महाराष्ट्र में प्याज की अच्छी उपज होती है, इसलिए वहां का प्याज नंबर एक दर्जे का होता है। व्यापारी इसमें मुनाफा भी कमा लेते हैं लेकिन इस बार साउथ में आई बाढ़ ने स्थितियां बदल दीं। वहां प्याज 90 से 100 रुपये प्रति किलो आ गया वहीं आवक बंद होने से जिले में इंदौर, नासिक से प्याज की मांग बढ़ गई। इसके कारण थोक बाजार में 50 और फुटकर में प्याज 60 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
प्रति दिन जिले में होती 20 से 25 टन खपत
थोक व्यापारियों का कहना है कि जिले में प्रतिदिन करीब 20 से 25 टन प्याज की खपत हो जाती है। दो दिन से इंदौर व नासिक से आने वाले प्याज के दाम कुछ नरम पड़े हैं। उम्मीद है कि एक सप्ताह में रेट नीचे आ जाएंगे।
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कन्नौज से भी आ रहा प्याज
प्याज की डिमांड बढ़ने से कुछ व्यापारी कन्नौज व आसपास के जिलों में जहां प्याज उपलब्ध हो रहा है, वहां से ला रहे हैं।
थोक व्यापारियों ने बताई समस्या
थोक व्यापारी चांद मियां का कहना है कि अपने जिले में वह बंगलूरू से भी प्याज मंगाते रहे हैं। कई बार उन्होंने 40 के रेट में वहां से खरीद की। आने में दो से तीन दिन लगते हैं। इतने में बाजार का रेट 35 ही रह गया। यही नहीं कई बार आधे से अधिक प्याज सड़ गए। जिससे सीधे तीन से चार लाख का नुकसान उन्हें उठाना पड़ा है।
व्यापारी बिलाल का कहना है रेट उछलने के बाद व्यापारियों को भी समस्याओं से जूझना पड़ता है। स्टोर करने से प्याज सड़ता है और नुकसान होता है। इसलिए स्टोर करने से कोई फायदा नहीं। बल्कि प्याज महंगा खरीदने के बाद जब बाजार तक आने में रेट लुढ़क जाते हैं तो व्यापारियों को मुंह की खानी पड़ती है।
नाक में दम कर दिया इस प्याज ने
आवास विकास कालोनी निवासी आराधना मिश्रा ने कहा कि प्याज ने नाक में दम कर दिया है। एक किलो प्याज ले लो और एक किलो आलू। बस हो गए आपके सौ रुपये और लोग कहते हैं कि महंगाई नहीं। लगता है थाली से सब्जियां व दाल से तड़का कम करना पड़ेगा।
गृहिणी शांति सिंह का कहना है कि पूरे नवरात्र महंगाई ने सताया। जिन दिनों जिस चीज की ज्यादा खपत होती उसी के रेट आसमान में पहुंच जाते हैं। ये महंगाई आम लोगों को ही झेलनी पड़ती है। जिम्मेदारों को इस ओर कदम उठाने चाहिए।
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जिले में प्याज की बड़ी मंडियां हरदोई, बिलग्राम, मल्लावां व माधौगंज में हैं। यहां के थोक व्यापारी तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र से प्याज मंगवाते हैं। इसके अलावा इंदौर, नासिक से भी प्याज लाया जाता है। तमिलनाडु ,महाराष्ट्र में प्याज की अच्छी उपज होती है, इसलिए वहां का प्याज नंबर एक दर्जे का होता है। व्यापारी इसमें मुनाफा भी कमा लेते हैं लेकिन इस बार साउथ में आई बाढ़ ने स्थितियां बदल दीं। वहां प्याज 90 से 100 रुपये प्रति किलो आ गया वहीं आवक बंद होने से जिले में इंदौर, नासिक से प्याज की मांग बढ़ गई। इसके कारण थोक बाजार में 50 और फुटकर में प्याज 60 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
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प्रति दिन जिले में होती 20 से 25 टन खपत
थोक व्यापारियों का कहना है कि जिले में प्रतिदिन करीब 20 से 25 टन प्याज की खपत हो जाती है। दो दिन से इंदौर व नासिक से आने वाले प्याज के दाम कुछ नरम पड़े हैं। उम्मीद है कि एक सप्ताह में रेट नीचे आ जाएंगे।
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कन्नौज से भी आ रहा प्याज
प्याज की डिमांड बढ़ने से कुछ व्यापारी कन्नौज व आसपास के जिलों में जहां प्याज उपलब्ध हो रहा है, वहां से ला रहे हैं।
थोक व्यापारियों ने बताई समस्या
थोक व्यापारी चांद मियां का कहना है कि अपने जिले में वह बंगलूरू से भी प्याज मंगाते रहे हैं। कई बार उन्होंने 40 के रेट में वहां से खरीद की। आने में दो से तीन दिन लगते हैं। इतने में बाजार का रेट 35 ही रह गया। यही नहीं कई बार आधे से अधिक प्याज सड़ गए। जिससे सीधे तीन से चार लाख का नुकसान उन्हें उठाना पड़ा है।
व्यापारी बिलाल का कहना है रेट उछलने के बाद व्यापारियों को भी समस्याओं से जूझना पड़ता है। स्टोर करने से प्याज सड़ता है और नुकसान होता है। इसलिए स्टोर करने से कोई फायदा नहीं। बल्कि प्याज महंगा खरीदने के बाद जब बाजार तक आने में रेट लुढ़क जाते हैं तो व्यापारियों को मुंह की खानी पड़ती है।
नाक में दम कर दिया इस प्याज ने
आवास विकास कालोनी निवासी आराधना मिश्रा ने कहा कि प्याज ने नाक में दम कर दिया है। एक किलो प्याज ले लो और एक किलो आलू। बस हो गए आपके सौ रुपये और लोग कहते हैं कि महंगाई नहीं। लगता है थाली से सब्जियां व दाल से तड़का कम करना पड़ेगा।
गृहिणी शांति सिंह का कहना है कि पूरे नवरात्र महंगाई ने सताया। जिन दिनों जिस चीज की ज्यादा खपत होती उसी के रेट आसमान में पहुंच जाते हैं। ये महंगाई आम लोगों को ही झेलनी पड़ती है। जिम्मेदारों को इस ओर कदम उठाने चाहिए।