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Hardoi News: पुस्तक 'अनचाहे अंतराल' का ऑनलाइन विमोचन
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पिहानी। फिक्शन उपन्यास की पुस्तक ''अनचाहे अंतराल'' अमेजन पर रिलीज हो गई है।
दीपावली की पूर्व संध्या पर पुस्तक का ऑनलाइन विमोचन राष्ट्रपति के हाथों कांस्य पदक प्राप्त लेखक के पिता सर्वजीत सिंह के जरिए किया गया। इसके लेखक डॉ. कौशलेंद्र विक्रम सिंह पिहानी के राजकीय महाविद्यालय में समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष हैं।
मूलतः बहराइच जनपद के विकासखंड हुजूरपुर के ग्राम शाहपुर के रहने लेखक डॉ. सिंह ने बताया कि उनके पिता ही उनके आदर्श हैं, वह उन्हीं की तरह समाज सेवा को अपना परम कर्तव्य मानते हैं।
वह किताबों और शिक्षा के द्वारा समाज में बदलाव लाना चाहते हैं। अनचाहे अंतराल को रेडग्रेब प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। अनचाहे अंतराल उपन्यास लिव–इन रिलेशन में रहकर यूपीएससी की तैयारी करने वाले एक जोड़े की प्रेम कथा है, जिसे बेहद दिलचस्प ढंग से बयान किया गया है।
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दया नारायण अग्निहोत्री और कात्यायनी मुखर्जी उपन्यास के केंद्रीय पात्र हैं। उनके संघर्षों को उपन्यासकार ने शब्द दिए हैं। यह उपन्यास सरकारी नौकरी के लिए जद्दोजहद करते युवाओं के संघर्ष की महागाथा है। उपन्यास में भावना बनाम बुद्धि और प्राप्त बनाम अप्राप्त के बीच द्वंद्व दिखाया गया है।
आधुनिक जीवन में बढ़ रहे भौतिकतावाद और दिखावे के कारण लोग किस तरह अपनी मूल भावनाओं से कटते जा रहे हैं, यह दर्शाने का प्रयास किया गया है। उपन्यास में स्त्री-पुरुष के बीच दरकते रिश्ते, टूटते परिवार आदि की समस्या को भी बखूबी उठाया गया है। उपन्यास का उद्देश्य यह दिखाना है कि हर व्यक्ति आधा-अधूरा है। पूर्णतः की तलाश व्यर्थ है। बहुत अधिक अच्छे की चाह में कई बार वे चीजें भी हाथ से फिसल जाती हैं, जो हमारे पास होती हैं।
भौतिकतावाद की अंध दौड़ में व्यक्ति एक समय अकेला हो जाता है, तब उसे अपने रिश्तों की याद आती है। तब तक चीजें काफी बिगड़ जाती हैं। उपन्यास लेखन में रोचकता प्रारंभ से अंत तक बनाई रखी गई है ताकि युवा पाठक उपन्यास का आनंद ले सकें।
उपन्यास की साहित्यकता बनाए रखते हुए, इसे सहज और सरल हिन्दी में लिखा गया है ताकि उन युवाओं को भी हिन्दी की पुस्तकों से जोड़ा जा सके जो आजकल सोशल मीडिया की रील्स की दुनिया में व्यस्त हैं। यह पुस्तक युवाओं के लिए प्रेरक प्रसंग तथा स्वस्थ मनोरंजन का साधन भी है।
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दीपावली की पूर्व संध्या पर पुस्तक का ऑनलाइन विमोचन राष्ट्रपति के हाथों कांस्य पदक प्राप्त लेखक के पिता सर्वजीत सिंह के जरिए किया गया। इसके लेखक डॉ. कौशलेंद्र विक्रम सिंह पिहानी के राजकीय महाविद्यालय में समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष हैं।
मूलतः बहराइच जनपद के विकासखंड हुजूरपुर के ग्राम शाहपुर के रहने लेखक डॉ. सिंह ने बताया कि उनके पिता ही उनके आदर्श हैं, वह उन्हीं की तरह समाज सेवा को अपना परम कर्तव्य मानते हैं।
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वह किताबों और शिक्षा के द्वारा समाज में बदलाव लाना चाहते हैं। अनचाहे अंतराल को रेडग्रेब प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। अनचाहे अंतराल उपन्यास लिव–इन रिलेशन में रहकर यूपीएससी की तैयारी करने वाले एक जोड़े की प्रेम कथा है, जिसे बेहद दिलचस्प ढंग से बयान किया गया है।
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दया नारायण अग्निहोत्री और कात्यायनी मुखर्जी उपन्यास के केंद्रीय पात्र हैं। उनके संघर्षों को उपन्यासकार ने शब्द दिए हैं। यह उपन्यास सरकारी नौकरी के लिए जद्दोजहद करते युवाओं के संघर्ष की महागाथा है। उपन्यास में भावना बनाम बुद्धि और प्राप्त बनाम अप्राप्त के बीच द्वंद्व दिखाया गया है।
आधुनिक जीवन में बढ़ रहे भौतिकतावाद और दिखावे के कारण लोग किस तरह अपनी मूल भावनाओं से कटते जा रहे हैं, यह दर्शाने का प्रयास किया गया है। उपन्यास में स्त्री-पुरुष के बीच दरकते रिश्ते, टूटते परिवार आदि की समस्या को भी बखूबी उठाया गया है। उपन्यास का उद्देश्य यह दिखाना है कि हर व्यक्ति आधा-अधूरा है। पूर्णतः की तलाश व्यर्थ है। बहुत अधिक अच्छे की चाह में कई बार वे चीजें भी हाथ से फिसल जाती हैं, जो हमारे पास होती हैं।
भौतिकतावाद की अंध दौड़ में व्यक्ति एक समय अकेला हो जाता है, तब उसे अपने रिश्तों की याद आती है। तब तक चीजें काफी बिगड़ जाती हैं। उपन्यास लेखन में रोचकता प्रारंभ से अंत तक बनाई रखी गई है ताकि युवा पाठक उपन्यास का आनंद ले सकें।
उपन्यास की साहित्यकता बनाए रखते हुए, इसे सहज और सरल हिन्दी में लिखा गया है ताकि उन युवाओं को भी हिन्दी की पुस्तकों से जोड़ा जा सके जो आजकल सोशल मीडिया की रील्स की दुनिया में व्यस्त हैं। यह पुस्तक युवाओं के लिए प्रेरक प्रसंग तथा स्वस्थ मनोरंजन का साधन भी है।