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कभी थे सपा के स्टार प्रचारक अब भाजपा के प्रमुख चेहरे

Sat, 19 Feb 2022 10:32 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 19 Feb 2022 10:32 PM IST
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Once the star campaigner of SP is now the main face of BJP
हरदोई। सियासत में कोई किसी का स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। सियासी रंगत में जब से दलबदल के रंग मिलने शुरू हुए, तब से कौन, कब, किससे तंग होकर किसके संग हो जाए, इसका सटीक अंदाजा नहीं लग पाता है।
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जिले की दो प्रमुख राजनीतिक हस्तियां भी दलबदल के रंगों से सराबोर होकर एक साथ एक ही पार्टी के अब प्रमुख चेहरे हैं। इससे पहले भी दोनों दिग्गज एक साथ सपा में रह चुके और सपा के चुनाव स्टार प्रचारकों की सूची में रहे हैं।
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अब दोनों नेता भाजपा में रहकर जिले के लिए पार्टी के प्रमुख चेेहरे हैं। बात कर रहें पूर्व कैबिनेट मंत्री नरेश अग्रवाल और पूर्व मंत्री व सांसद डॉ. अशोक वाजपेयी की।
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1997 में कांग्रेस तोड़कर लोकतांत्रिक कांग्रेस बनाकर देश की सियासत में नाम रातों रात चर्चा में लाने वाले नरेश की भाजपा नेताओं से दोस्ती जगजाहिर रही है।
वो चार वर्षों तक भाजपा सरकार में मंत्री एवं सहयोगी दल लोका के मुखिया के नाते राजग गठबंधन में रहे। निजी स्तर पर खटास के बाद भाजपा सरकार एवं गठबंधन से निकाले जाने के बाद वह सपा-बसपा में सत्ता के साथ रहते वापस सपा में गए।
सपा में प्रोफेसर डॉ. राम गोपाल से दोस्ती जगजाहिर रही। राज्यसभा में कार्यकाल पूरा होने के बाद 2018 में जब सपा ने उनका राज्यसभा का टिकट काटा तो इससे नाराज नरेश ने 20 साल पुरानी भाजपा से सियासी दोस्ती को याद करते हुए भाजपा का दामन थाम लिया।
नरेश का अब भाजपा के स्टार प्रचारकों की सूची में नाम है। जिले में नरेश भाजपा का प्रमुख चेहरा हैं और लोकसभा चुनावों में उन्होंने भाजपा को बड़ी सफलताएं दिलाने में योगदान दिया।
लोकसभा चुनाव की तरह वह विस चुनाव में भाजपा के लिए जुटे हुए हैं। उधर, सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के खास दोस्त रहे पूर्व मंत्री डॉ. अशोक वाजपेयी को वर्ष 2012 में सपा के टिकट पर सवायजपुर सीट से हार की टीस का झटका ऐसा लगा कि वो टूटकर रह गए।
उनके करीबी बताते हैं कि वाजपेयी को चुनाव हराने में तत्कालीन सपा के बागी की अहम भूमिका रही। सपा की सरकार बनी तो वाजपेयी को पहली बार सरकार में मंत्री नहीं बनाया गया।
जिसने सपा से बगावत कर चुनाव लड़ा, उसी को फिर से सपा में शामिल कर लिया गया और जिले की सियासत में कभी टाप पर रहे वाजपेयी हाशिये पर रहे। जैसे ही 2017 में भाजपा सरकार बनी, उन्होंने एमएलसी पद छोड़ दिया था।

भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेजकर उनका कद बढ़ा दिया। जिले में डॉ. वाजपेयी भाजपा के ब्राह्मण चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। विस चुनाव के लिए वह जिले में भाजपा प्रत्याशियों के साथ प्रचार में जुटे हुए हैं।
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