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अधेड़ ने ट्रेन के पहिये के नीचे सिर रख दी जान
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sun, 03 May 2015 12:03 AM IST
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पेट की बीमारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहे अधेड़ ने
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शनिवार को पैसेंजर ट्रेन के पहिये के नीचे सिर रख दिया। ट्रेन के आगे
बढ़ते ही उसका सिर धड़ से अलग हो गया। जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचे
परिजनों की चीख पुकार मच गई। जीआरपी ने शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम को
भिजवाया।
थाना क्षेत्र के गोखले नगर निवासी रामसेवक उर्फ पुजारी (56) सब्जी बेंचकर अपने परिवार को भरण पोषण करते थे। बताया जाता है कि वह कुछ समय से पेट की बीमारी व आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। उसने बीमारी का इलाज भी कराया, पर फायदा नहीं हुआ।
दो दिन पहले वह हरदोई में रह रही अपनी विवाहिता बेटी के यहां चले गए थे, जहां से कल घर लौटे थे। घर आने के बाद वह परेशान थे। शनिवार को वह स्टेशन पहुंचे और बालामऊ से कानपुर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन का इंतजार करने लगे। ट्रेन के आने के बाद वह प्लेटफार्म की दूसरी ओर चला गए और बोगी के नीचे पटरी पर सिर रखकर लेट गए।
जैसे ही ट्रेन चली, उनका सिर धड़ से अलग हो गया। जानकारी होते ही रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची। जांच के बाद घटना की सूचना परिजनोें को दी। मौके पर पहुंचा उनका बेटा मंगला और पत्नी शव देखते ही बिलख पड़ी। बेटे ने बताया कि पिता के पेट में दर्द रहता था और पैसे के अभाव में उपचार भी ठीक से नहीं करा पा रहे थे, जिससे परेशान रहते थे। इससे पहले भी उन्होंने एक बार जान देने की कोशिश की, पर बचा लिए गए थे।
थाना क्षेत्र के गोखले नगर निवासी रामसेवक उर्फ पुजारी (56) सब्जी बेंचकर अपने परिवार को भरण पोषण करते थे। बताया जाता है कि वह कुछ समय से पेट की बीमारी व आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। उसने बीमारी का इलाज भी कराया, पर फायदा नहीं हुआ।
दो दिन पहले वह हरदोई में रह रही अपनी विवाहिता बेटी के यहां चले गए थे, जहां से कल घर लौटे थे। घर आने के बाद वह परेशान थे। शनिवार को वह स्टेशन पहुंचे और बालामऊ से कानपुर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन का इंतजार करने लगे। ट्रेन के आने के बाद वह प्लेटफार्म की दूसरी ओर चला गए और बोगी के नीचे पटरी पर सिर रखकर लेट गए।
जैसे ही ट्रेन चली, उनका सिर धड़ से अलग हो गया। जानकारी होते ही रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची। जांच के बाद घटना की सूचना परिजनोें को दी। मौके पर पहुंचा उनका बेटा मंगला और पत्नी शव देखते ही बिलख पड़ी। बेटे ने बताया कि पिता के पेट में दर्द रहता था और पैसे के अभाव में उपचार भी ठीक से नहीं करा पा रहे थे, जिससे परेशान रहते थे। इससे पहले भी उन्होंने एक बार जान देने की कोशिश की, पर बचा लिए गए थे।