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अफसर दौड़े पर मवेशियों की मौत
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हरदोई। अन्ना मवेशियों के लिए बनवाई गई गोशालाओं में मवेशियों की मौत पर मुख्यमंत्री के सख्त रुख अपनाने के बाद भी हालात में कोई परिवर्तन नहीं आया है। रविवार रात हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अमर उजाला में प्रकाशित खबर के हवाले से मंसूरनगर गोशाला में मवेशियों की मौत का जिक्र आने और सीएम के नाराज होने पर रात में ही जिला विकास अधिकारी को मंसूरनगर रवाना किया गया। इस सबके बीच गोशालाओं की स्थिति सुधारने के दावों की पोल सोमवार को फिर खुलती नजर आई। मल्लावां विकास खंड की ग्राम पंचायत शाहपुरगंगा स्थित गोशाला में तीन मवेशी मृत मिले। सवायजपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम मिरगावां में बनी गोशाला में भी एक मवेशी बीमार मिला तो एक की गर्दन से खून रिसता नजर आया।
मल्लावां विकास खंड की ग्राम पंचायत शाहपुरगंगा में गोशाला है। इसमें 224 मवेशी बंद हैं। सोमवार सुबह शाहपुरगंगा गोशाला में तीन मवेशी मृत पड़े मिले। दो मवेशी मरणासन्न मिले। मवेशियों की देखरेख के लिए यहां शिवराम, देवीशंकर, मोतीलाल, रामनरायण, सद्दीक और जयसिंह की तैनाती है, लेकिन सोमवार को मौके पर कोई मौजूद नहीं मिला। मरणासन्न मवेशियों के मुंह बोरे से बंधे थे। गोशाला में भूसा और चारा नहीं था। गोशाला के निकट मिले गांव निवासी सत्यकुमार ने बताया कि मवेशियों की कोई देखरेख नहीं होती। अमर सिंह ने बताया कि गोशाला में चहारदीवारी नहीं है और भूखे मवेशी खेतों की फसल चट कर देते हैं। ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि शिवकुमार कनौजिया ने बताया कि एक फरवरी को गोशाला का शुभारंभ हुआ था। तबसे मवेशियों के भूसे के लिए एक लाख रुपये मिले हैं, लेकिन तीन लाख रुपये की उधारी से मवेशियों के चारे का इंतजाम किया गया है। मृत मवेशियों के सवाल पर वह चुप्पी साध गए। पशु चिकित्सा अधिकारी हरिकांत वर्मा ने बताया कि एक मवेशी का पोस्टमार्टम कराया गया है। मृत मवेशियों को दफन करा दिया गया है।
सवायजपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम मिरगावां में बनी गोशाला में 114 मवेशी बंद होने का दावा प्रधानपति जंगेलाल ने किया, लेकिन मौके पर 90 मवेशी ही मिले। गोशाला में कई दिन से भूसे का इंतजाम नहीं है। यहां एक मवेशी गंभीर रूप से बीमार मिला तो भूख से पूरे परिसर में उछल रहे एक मवेशी की गर्दन से लगातार खून रिसता नजर आया। बीमार मवेशी के बारे में पता चला कि गैंगरीन के चलते उसका एक पैर काटा गया, लेकिन दोबारा कोई सुधि लेने तक नहीं आया। एक अन्य मवेशी भी यहां बीमार मिला, जिसके शरीर का पिछला हिस्सा बुरी तरह जख्मी था। पशु चिकित्सक डॉ. बच्चा सिंह ने बताया कि घायल मवेशी का इलाज किया जा रहा है। अन्य मवेशियों की हालत पर्याप्त चारा न मिलने के कारण खराब है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार रात गोशालाओं में मवेशियों की मौत पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान हरदोई का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री का लहजा देख अफसर भी सकते में आ गए। डीएम पुलकित खरे ने सभी खंड विकास अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई और गोशालाओं के प्रति संवेदनशील रहने को कहा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने पिहानी विकास खंड की मंसूरनगर गोशाला का भी हवाला दिया। ऐसे में रात में ही जिला विकास अधिकारी राजितराम मिश्रा, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेएन पांडेय आदि मंसूरनगर पहुंचे। डीडीओ ने यहां बंद मवेशियों का टीकाकरण कराने के निर्देश दिए। इसके बाद पशु चिकित्सक डॉ. प्रकाशवीर, डॉ. श्याम त्रिपाठी, डॉ. डीके गुप्ता आदि ने टीकाकरण शुरू किया। कुछ घायल मवेशियों पर दवाइयों का स्प्रे भी किया गया। डीडीओ ने यहां की व्यवस्था में और सुधार लाने के निर्देश दिए हैं।
गोशालाओं में बंद मवेशियों की मौत का कारण जानने की कोशिश मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेएन पांडेय से की गई। पशु चिकित्सा विभाग की हकीकत से दूर उन्होंने ग्रामीणों पर ही मवेशियों की मौत का ठीकरा फोड़ दिया। सीवीओ ने कहा कि जबसे गोशालाओं में मवेशियों के भूसे की व्यवस्था हो गई है, तबसे ग्रामीण अपने मवेशी गोशाला में छोड़ आते हैं। इन्हीं मवेशियों की मौत हो जाती है। डॉ. जेएन पांडेय ने यह तक स्वीकार नहीं किया कि बीमारी के कारण भी मौत हो रही हैं।
डीएम पुलकित खरे ने बताया कि रोजाना बड़ी संख्या में पशु पालक मवेशियों को छोड़ देते हैं। इसके कारण गोशालाओं में मवेशियों की संख्या बढ़ जाती है और इनके भरण पोषण में समस्या आती है। डीएम ने निर्देश दिए हैं कि ऐसे पशुपालकों को चिह्नित कर संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराई जाए।
डीएम पुलकित खरे ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि एक कंट्रोल रूम मवेशियों की समस्याओं के संबंध में बनाया गया है। घायल और बीमार मवेशी, गोशाला के संचालन और मवेशियों के भरण पोषण में गड़बड़ी को लेकर 05852-232527 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यह नंबर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय का है। इसके अलावा उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रकाशवीर के नंबर 8887830154 और पशु चिकित्सा विभाग के अन्वेषक डॉ. विजय सिंह के नंबर 9452250357 पर भी जानकारी दी जा सकती है।
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मल्लावां विकास खंड की ग्राम पंचायत शाहपुरगंगा में गोशाला है। इसमें 224 मवेशी बंद हैं। सोमवार सुबह शाहपुरगंगा गोशाला में तीन मवेशी मृत पड़े मिले। दो मवेशी मरणासन्न मिले। मवेशियों की देखरेख के लिए यहां शिवराम, देवीशंकर, मोतीलाल, रामनरायण, सद्दीक और जयसिंह की तैनाती है, लेकिन सोमवार को मौके पर कोई मौजूद नहीं मिला। मरणासन्न मवेशियों के मुंह बोरे से बंधे थे। गोशाला में भूसा और चारा नहीं था। गोशाला के निकट मिले गांव निवासी सत्यकुमार ने बताया कि मवेशियों की कोई देखरेख नहीं होती। अमर सिंह ने बताया कि गोशाला में चहारदीवारी नहीं है और भूखे मवेशी खेतों की फसल चट कर देते हैं। ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि शिवकुमार कनौजिया ने बताया कि एक फरवरी को गोशाला का शुभारंभ हुआ था। तबसे मवेशियों के भूसे के लिए एक लाख रुपये मिले हैं, लेकिन तीन लाख रुपये की उधारी से मवेशियों के चारे का इंतजाम किया गया है। मृत मवेशियों के सवाल पर वह चुप्पी साध गए। पशु चिकित्सा अधिकारी हरिकांत वर्मा ने बताया कि एक मवेशी का पोस्टमार्टम कराया गया है। मृत मवेशियों को दफन करा दिया गया है।
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सवायजपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम मिरगावां में बनी गोशाला में 114 मवेशी बंद होने का दावा प्रधानपति जंगेलाल ने किया, लेकिन मौके पर 90 मवेशी ही मिले। गोशाला में कई दिन से भूसे का इंतजाम नहीं है। यहां एक मवेशी गंभीर रूप से बीमार मिला तो भूख से पूरे परिसर में उछल रहे एक मवेशी की गर्दन से लगातार खून रिसता नजर आया। बीमार मवेशी के बारे में पता चला कि गैंगरीन के चलते उसका एक पैर काटा गया, लेकिन दोबारा कोई सुधि लेने तक नहीं आया। एक अन्य मवेशी भी यहां बीमार मिला, जिसके शरीर का पिछला हिस्सा बुरी तरह जख्मी था। पशु चिकित्सक डॉ. बच्चा सिंह ने बताया कि घायल मवेशी का इलाज किया जा रहा है। अन्य मवेशियों की हालत पर्याप्त चारा न मिलने के कारण खराब है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार रात गोशालाओं में मवेशियों की मौत पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान हरदोई का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री का लहजा देख अफसर भी सकते में आ गए। डीएम पुलकित खरे ने सभी खंड विकास अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई और गोशालाओं के प्रति संवेदनशील रहने को कहा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने पिहानी विकास खंड की मंसूरनगर गोशाला का भी हवाला दिया। ऐसे में रात में ही जिला विकास अधिकारी राजितराम मिश्रा, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेएन पांडेय आदि मंसूरनगर पहुंचे। डीडीओ ने यहां बंद मवेशियों का टीकाकरण कराने के निर्देश दिए। इसके बाद पशु चिकित्सक डॉ. प्रकाशवीर, डॉ. श्याम त्रिपाठी, डॉ. डीके गुप्ता आदि ने टीकाकरण शुरू किया। कुछ घायल मवेशियों पर दवाइयों का स्प्रे भी किया गया। डीडीओ ने यहां की व्यवस्था में और सुधार लाने के निर्देश दिए हैं।
गोशालाओं में बंद मवेशियों की मौत का कारण जानने की कोशिश मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेएन पांडेय से की गई। पशु चिकित्सा विभाग की हकीकत से दूर उन्होंने ग्रामीणों पर ही मवेशियों की मौत का ठीकरा फोड़ दिया। सीवीओ ने कहा कि जबसे गोशालाओं में मवेशियों के भूसे की व्यवस्था हो गई है, तबसे ग्रामीण अपने मवेशी गोशाला में छोड़ आते हैं। इन्हीं मवेशियों की मौत हो जाती है। डॉ. जेएन पांडेय ने यह तक स्वीकार नहीं किया कि बीमारी के कारण भी मौत हो रही हैं।
डीएम पुलकित खरे ने बताया कि रोजाना बड़ी संख्या में पशु पालक मवेशियों को छोड़ देते हैं। इसके कारण गोशालाओं में मवेशियों की संख्या बढ़ जाती है और इनके भरण पोषण में समस्या आती है। डीएम ने निर्देश दिए हैं कि ऐसे पशुपालकों को चिह्नित कर संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराई जाए।
डीएम पुलकित खरे ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि एक कंट्रोल रूम मवेशियों की समस्याओं के संबंध में बनाया गया है। घायल और बीमार मवेशी, गोशाला के संचालन और मवेशियों के भरण पोषण में गड़बड़ी को लेकर 05852-232527 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यह नंबर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय का है। इसके अलावा उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रकाशवीर के नंबर 8887830154 और पशु चिकित्सा विभाग के अन्वेषक डॉ. विजय सिंह के नंबर 9452250357 पर भी जानकारी दी जा सकती है।