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ओ मेरे भोले भंडारी, तेरी महिमा न्यारी

Mon, 24 Aug 2015 11:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई Updated Mon, 24 Aug 2015 11:56 PM IST
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O my naive Bhandari , your glory Unfathomable

सावन मास में चौथे और अंतिम सोमवार को भक्तों द्वारा

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मंदिरों में भगवान शिव का पूजन अर्चन जारी रहा। सुबह से ही जिले के सभी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का जमावड़ा रहा। देर शाम तक जिले भर के शिवालयों में बम बम भोले के ही जयघोष सुनाई दिए।

इसके अलावा घरों में भी रुद्राभिषेक करने का क्रम जारी रहा। शहर के बाबा विश्वनाथ मंदिर, तुरंतनाथ मंदिर, सिद्धेेश्वर नाथ मंदिर, बाबा नील कंठेश्वर महादेव, मौनी बाबा मंदिर, शिव भोले मंदिर, सहाका मंदिर, सुनासीर नाथ मंदिर, मंशानाथ मंदिर में भक्तों द्वारा दिनभर पूजन का आयोजन होता रहा।

शिवालयों में शिवलिंग का जल व दूध से अभिषेक करने को लोगों की भीड़ नजर आई। भीड़ के चलते गंध, अक्षत व फूल शिवलिंग पर कम और आस पास के लोगों पर ज्यादा चढ़े। बहरहाल चौथे दिन भगवान भोले के भक्तों की भक्ति पिछले सोमवार की अपेक्षा काफी अधिक दिखी।

मान्यताओं के अनुसार, कई भक्तों ने भगवान शिव को सफेद मिठाई का भोग लगाकर आरती कर शनि दशा से मुक्ति पाने के लिए आराधना भी की। शास्त्री उमाकांत का कहना है कि सावन अपने आप में ही इतना पावन है कि हर हाथ खुद भगवान शिव की आराधना करने को उठते हैं, तो हर जुबान पर बम भोले के स्वर आते हैं।

इसी तरह भगवान शिव भी इस माह आशीर्वाद देने को अपने हाथों को खुला ही रखते हैं, इसलिए भगवान शिव की कृपा पाने को इससे अच्छा मौका श्रद्धालुओं के पास कोई नहीं था। कहना गलत न होगा कि इस सावन भी लोगों ने भगवान शिव के प्रति इसी आस्था का परिचय दिया है। भगवान भोले ने भी जिलेवासियों को निराश नहीं किया।

बारिश न होने का दंश इसी सावन माह में ही समाप्त हुआ है। बारिश के बाद किसानों व आम लोगों के चेहरे खिलते नजर आए हैं। उधर, सुबह ही नुमाइश चौराहे स्थित शिव भोले मंदिर स्थित शिव का शिवलिंग श्रद्धालुओं के पूजन के बाद बेलपत्रों में ऐसी छिपे कि बाद में आने वाले श्रद्धालुओं को शिवलिंग के दर्शन तक नहीं हो पाए।

शिवलिंग बेलपत्र से पूरी तरह से ढक गई। पुरोहितों द्वारा बताया गया कि बेलपत्र कई-कई बार हटाए गए, पर श्रद्धालुओं के तांता लगा रहने से उनके ढकने का क्रम जारी रहा। बहरहाल यहां भी देर रात तक भक्तों द्वारा भगवान शिव का जयघोष सुनाई देता रहा।

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