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पाबंदी का नहीं असर, पॉलीथिन का उपयोग बेधड़क
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
Updated Fri, 22 Jan 2016 12:17 AM IST
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प्रदेश में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लग चुका है। शहर में प्रतिबंध के पहले दिन ही दुकानदार रोज की तरह पॉलीथिन के बैग, पन्नी, पारदर्शी यूज एंड थ्रो झोलों का प्रयोग करते दिखे। जब इस संबंध में कुछ लोगों और दुकानदारों से बात की गई तो बोले पॉलीथिन रोजमर्रा की चीजों के तौर पर जरूरी है। उधर, प्रशासन का कहना है कि इस ओर जागरूकता लाने के साथ ही शासन के निर्देशानुसार कार्रवाई का डंडा चलाया जाएगा। फिलहाल प्रशासन को शासनादेश आने का इंतजार है। पेश है एक रिपोर्ट:-
22 दिसंबर को जारी हुई थी अधिसूचना
पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रदेश में 22 दिसंबर को अधिसूचना जारी करते हुए इसे लागू करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था। समय सीमा पूरी होने के बाद गत दिन शासनादेश जारी होने के बाद 21 जनवरी से प्रतिबंध लागू हो गया है। प्रशासन का कहना है कि शासनादेश की प्रति एक दो दिन में आ जाएगी जिसके बाद वर्गीकृत पॉलीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध के अनुसार कार्रवाई शुरू होगी।
करोड़ों का है पॉलीथिन का कारोबार
सिर्फ हरदोई की ही बात करें तो यहां पॉलीथिन का करोड़ों का कारोबार है। जिले में हर रोज करीब 100 से 200 क्विंटल कचरा सिर्फ पॉलीथिन का होता है। यह वो पॉलीथिन है जो कि रोज प्रयोग में आने के बाद कूड़ादान और कूड़ों के ढेर में समाती है। वहीं, सभी तरह की पॉलीथिन व उसके तरह तरह के बैग व प्लास्टिक के पाउच और यूज एंड थ्रो कप ग्लास, दोना, पत्तल आदि की बात करें तो सालाना इसका कचरा लाखों क्विंटल का है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिर्फ हरदोई में ही इसका करोड़ों का कारोबार है।
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चाट का ठेला हो या चाय की दुकान, हर जगह पॉलीथिन में ही सामान
पॉलीथिन का प्रयोग इस कदर बढ़ चुका है कि कमोवेश रोजमर्रा के काम आने वाली चीजों के लिए कहीं भी आप जाए। हर जगह आपकोे पॉलीथिन में सामान मिलता है। दरअसल छोटी से छोटी चीज भी कागज के लिफाफे में होने के बाद भी लोग उसे पॉलीथिन में लेकर ही निकलते है। यही कारण है कि चाहे मेडिकल स्टोर हो या फिर सब्जी की दुकान, चाट का ठेला हो या चाय की दुकान हर जगह बस पॉलीथिन में सामान देने का ढर्रा चल रहा है।
पॉलीथिन के ढेर पर आबादी
शहर से लेकर जिले के विभिन्न हिस्सों में जिले की आबादी पॉलीथिन के कूड़े के ढेर के बीच नजर आती है। जहां चाहा पॉलीथिन लिया जहां चाहा फेंक दिया। नाली, नाले में पॉलीथिन जाने से चोक होते हैं तो कूढ़े के ढेर प्रदूषण बढ़ाते है। अब प्रतिबंध लागू है लिहाजा कार्रवाई होगी ।
शासनादेश के अनुसार होगी कार्रवाई
अपर जिलाधिकारी लक्ष्मीशंकर सिंह का कहना है कि पॉलीथिन संबंधी शासनादेश की प्रति मिलते ही आदेश का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। इसको लेकर लोगों को जागरूक करने के साथ चर्चा भी की जाएगी ताकि पॉलीथिन का प्रयोग बंद हो। निगरानी कमेटी आदि का गठन होगा।
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22 दिसंबर को जारी हुई थी अधिसूचना
पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रदेश में 22 दिसंबर को अधिसूचना जारी करते हुए इसे लागू करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था। समय सीमा पूरी होने के बाद गत दिन शासनादेश जारी होने के बाद 21 जनवरी से प्रतिबंध लागू हो गया है। प्रशासन का कहना है कि शासनादेश की प्रति एक दो दिन में आ जाएगी जिसके बाद वर्गीकृत पॉलीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध के अनुसार कार्रवाई शुरू होगी।
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करोड़ों का है पॉलीथिन का कारोबार
सिर्फ हरदोई की ही बात करें तो यहां पॉलीथिन का करोड़ों का कारोबार है। जिले में हर रोज करीब 100 से 200 क्विंटल कचरा सिर्फ पॉलीथिन का होता है। यह वो पॉलीथिन है जो कि रोज प्रयोग में आने के बाद कूड़ादान और कूड़ों के ढेर में समाती है। वहीं, सभी तरह की पॉलीथिन व उसके तरह तरह के बैग व प्लास्टिक के पाउच और यूज एंड थ्रो कप ग्लास, दोना, पत्तल आदि की बात करें तो सालाना इसका कचरा लाखों क्विंटल का है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिर्फ हरदोई में ही इसका करोड़ों का कारोबार है।
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चाट का ठेला हो या चाय की दुकान, हर जगह पॉलीथिन में ही सामान
पॉलीथिन का प्रयोग इस कदर बढ़ चुका है कि कमोवेश रोजमर्रा के काम आने वाली चीजों के लिए कहीं भी आप जाए। हर जगह आपकोे पॉलीथिन में सामान मिलता है। दरअसल छोटी से छोटी चीज भी कागज के लिफाफे में होने के बाद भी लोग उसे पॉलीथिन में लेकर ही निकलते है। यही कारण है कि चाहे मेडिकल स्टोर हो या फिर सब्जी की दुकान, चाट का ठेला हो या चाय की दुकान हर जगह बस पॉलीथिन में सामान देने का ढर्रा चल रहा है।
पॉलीथिन के ढेर पर आबादी
शहर से लेकर जिले के विभिन्न हिस्सों में जिले की आबादी पॉलीथिन के कूड़े के ढेर के बीच नजर आती है। जहां चाहा पॉलीथिन लिया जहां चाहा फेंक दिया। नाली, नाले में पॉलीथिन जाने से चोक होते हैं तो कूढ़े के ढेर प्रदूषण बढ़ाते है। अब प्रतिबंध लागू है लिहाजा कार्रवाई होगी ।
शासनादेश के अनुसार होगी कार्रवाई
अपर जिलाधिकारी लक्ष्मीशंकर सिंह का कहना है कि पॉलीथिन संबंधी शासनादेश की प्रति मिलते ही आदेश का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। इसको लेकर लोगों को जागरूक करने के साथ चर्चा भी की जाएगी ताकि पॉलीथिन का प्रयोग बंद हो। निगरानी कमेटी आदि का गठन होगा।