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बीआरजीएफ के बजट का हिसाब देने में कतरा रहे जिम्मेदार
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हरदोई। पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) के तहत विकास कार्यों के लिए दिए गए बजट का हिसाब देने में 11 विकास खंड और पांच निकायों के जिम्मेदार पीछे हट रहे हैं। संबंधित कार्यदायी संस्थाओं ने कई बार उपभोग प्रमाण पत्र मांगे जाने के बाद भी नहीं दिया। 85 करोड़ रुपये के सापेक्ष दो करोड़ के उपभोग प्रमाण पत्र नहीं मिले हैं।
पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के तहत विकास कार्य कराने के लिए विकास खंडों और नगर निकायों को बजट आवंटित किया गया था। इसके लिए जिला स्तर पर जिला पंचायत को नोडल विभाग बनाकर अपर मुख्य अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया था। 2008-09 में यह योजना शुरू हुई थी। जनपद में 37 कार्यदायी संस्थाओं को 639 निर्माण कार्यों के लिए लगभग 85 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की गई थी।
हरियावां, हरपालपुर, बेंहदर, पिहानी, भरावन, कोथावां, माधौगंज, शाहाबाद, भरखनी, सांडी और टड़ियावां ब्लॉक ने अभी शत-प्रतिशत बजट का उपभोग प्रमाण पत्र नहीं उपलब्ध कराया है। इसी तरह शाहाबाद, पिहानी और सांडी नगर पालिका व बेनीगंज और कुरसठ नगर पंचायत ने भी अवशेष धनराशि और उपभोग प्रमाण पत्र नहीं दिया है।
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जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी स्वाती जैन की तरफ से भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया कि बीआरजीएफ के तहत अवमुक्त की गई धनराशि से कराए गए निर्माण कार्यों पर बचत, बचत पर अर्जित ब्याज की धनराशि और उपभोग प्रमाण पत्र पत्र मांगा गया था। प्रमाण पत्र नहीं दिया गया है। न ही बचत/ब्याज की धनराशि विभाग को वापस की गई है।
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पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के तहत विकास कार्य कराने के लिए विकास खंडों और नगर निकायों को बजट आवंटित किया गया था। इसके लिए जिला स्तर पर जिला पंचायत को नोडल विभाग बनाकर अपर मुख्य अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया था। 2008-09 में यह योजना शुरू हुई थी। जनपद में 37 कार्यदायी संस्थाओं को 639 निर्माण कार्यों के लिए लगभग 85 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की गई थी।
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हरियावां, हरपालपुर, बेंहदर, पिहानी, भरावन, कोथावां, माधौगंज, शाहाबाद, भरखनी, सांडी और टड़ियावां ब्लॉक ने अभी शत-प्रतिशत बजट का उपभोग प्रमाण पत्र नहीं उपलब्ध कराया है। इसी तरह शाहाबाद, पिहानी और सांडी नगर पालिका व बेनीगंज और कुरसठ नगर पंचायत ने भी अवशेष धनराशि और उपभोग प्रमाण पत्र नहीं दिया है।
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जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी स्वाती जैन की तरफ से भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया कि बीआरजीएफ के तहत अवमुक्त की गई धनराशि से कराए गए निर्माण कार्यों पर बचत, बचत पर अर्जित ब्याज की धनराशि और उपभोग प्रमाण पत्र पत्र मांगा गया था। प्रमाण पत्र नहीं दिया गया है। न ही बचत/ब्याज की धनराशि विभाग को वापस की गई है।