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Hardoi News: आटा चक्की और घानी का कारखाना लगाकर निशा ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी
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फोटो 32: आटा चक्की कारखाना के साथ निशा। संवाद
आटा चक्की और घानी का कारखाना लगाकर निशा ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी
- मोहम्मदपुर गांव में स्वयं सहायता समूह बनाकर अन्य महिलाओं को भी दिया रोजगार
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मोहम्मदपुर गांव की निशा ने आटा चक्की और घानी कारखाना लगाकर आत्मनिर्भरता की कहानी लिखी है। चार साल पहले आटा की चक्की लगाकर काम शुरू किया। उसी के बाद घानी का भी कारखाना लगा लिया। आटा पिसाई और तेल निकालने व खल बनाने के काम से होने वाली आमदनी से परिवार के आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई।
संडीला की ग्राम पंचायत मोहम्मदपुर की निशा ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर महिला शक्ति स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह में गांव की ही 12 महिलाओं को जोड़ा। महिलाओं की तरफ से की गई बचत और ग्रामीण आजीविका मिशन से मिले रुपये से ऋण लेकर काम शुरू किया। निशा ने बताया कि चार साल पहले कारखाना लगाया। जिसमें आटा पीसने के साथ तेल निकालने व खल बनाने का काम शुरू किया। समय के साथ काम बढ़ा तो, आमदनी भी बढ़ी। वहीं समूह की सभी 12 महिलाओं को भी रोजगार दिया जा रहा है। बताया कि घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। आर्थिक स्थित सुद्ढ़ बनाने के लिए कुछ करने की ठानी। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आर्थिक संकट से निपटने के स्वरोजगार में आटा चक्की कारखाना स्थापित किया। जिस पर करीब 10,00,000 रुपये का खर्च आया। प्रतिदिन का खर्चा निकालकर 800-1,000 रुपये की बचत हो जाती है। समूह की अन्य महिलाएं ऑर्गेनिक खेती, भैंस पालन आदि का काम कर रही हैं। बताया कि पति मनोज कुमार अब उनके काम में हाथ बंटाते हैं। उनकी दो पुत्रियां और एक पुत्र है। जो पढ़ाई कर रहे हैं।
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आटा चक्की और घानी का कारखाना लगाकर निशा ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी
- मोहम्मदपुर गांव में स्वयं सहायता समूह बनाकर अन्य महिलाओं को भी दिया रोजगार
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मोहम्मदपुर गांव की निशा ने आटा चक्की और घानी कारखाना लगाकर आत्मनिर्भरता की कहानी लिखी है। चार साल पहले आटा की चक्की लगाकर काम शुरू किया। उसी के बाद घानी का भी कारखाना लगा लिया। आटा पिसाई और तेल निकालने व खल बनाने के काम से होने वाली आमदनी से परिवार के आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई।
संडीला की ग्राम पंचायत मोहम्मदपुर की निशा ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर महिला शक्ति स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह में गांव की ही 12 महिलाओं को जोड़ा। महिलाओं की तरफ से की गई बचत और ग्रामीण आजीविका मिशन से मिले रुपये से ऋण लेकर काम शुरू किया। निशा ने बताया कि चार साल पहले कारखाना लगाया। जिसमें आटा पीसने के साथ तेल निकालने व खल बनाने का काम शुरू किया। समय के साथ काम बढ़ा तो, आमदनी भी बढ़ी। वहीं समूह की सभी 12 महिलाओं को भी रोजगार दिया जा रहा है। बताया कि घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। आर्थिक स्थित सुद्ढ़ बनाने के लिए कुछ करने की ठानी। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आर्थिक संकट से निपटने के स्वरोजगार में आटा चक्की कारखाना स्थापित किया। जिस पर करीब 10,00,000 रुपये का खर्च आया। प्रतिदिन का खर्चा निकालकर 800-1,000 रुपये की बचत हो जाती है। समूह की अन्य महिलाएं ऑर्गेनिक खेती, भैंस पालन आदि का काम कर रही हैं। बताया कि पति मनोज कुमार अब उनके काम में हाथ बंटाते हैं। उनकी दो पुत्रियां और एक पुत्र है। जो पढ़ाई कर रहे हैं।
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