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नवरात्र : पौराणिक दुर्गा माता मंदिर पर नवरात्र में होते हैं विशेष आयोजन
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फोटो-10- रमेश दीक्षित। संवाद
संडीला। नगर का पौराणिक और प्राचीन दुर्गा माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। नवरात्र पर मंदिर में विशेष पूजन-अर्चन होता है। माता दुर्गा श्रद्धालुओं की सभी मनोकानाएं पूरी करती हैं।
दुर्गा माता मंदिर ब्रिटिश हुकूमत के समय बनवाया गया था। बताया गया कि साल 1854 में तत्कालीन राजा दुर्गा प्रसाद ने इस मंदिर को बनवाया और दुर्गा मां की स्थापना कराई थी। इससे नगरवासियों के पूजन और आराधना के लिए आध्यात्मिक स्थल उपलब्ध हुआ। मंदिर राजा दुर्गा प्रसाद की ही भूमि पर बना है। इसमें यज्ञशाला, भगवान बृहस्पति, भगवान भोलेनाथ परिवार, बजरंगबली, गायत्री माता, संतोषी माता और ब्रह्मदेव बाबा के मंदिर भी हैं। मंदिर की देखरेख का कार्य पीढ़ियों से एक ही परिवार के लोग करते आ रहे हैं। वर्तमान में रमेश चंद्र दीक्षित उर्फ पप्पू अपने परिवार की छठी पीढ़ी से हैं।
मंदिर के सेवक और पुजारी के रूप में सेवा करने वाले रमेश दीक्षित ने बताया कि उनके पूर्वज बाबा भगवानदास दीक्षित के समय से ही यह परंपरा चली आ रही है। नवरात्र पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, हवन और भंडारे का आयोजन होता है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इसी मंदिर से प्रभात फेरी की शुरुआत होती है इसमें नगर के अलावा आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से माता दुर्गा की आराधना से श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है।
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दुर्गा माता मंदिर ब्रिटिश हुकूमत के समय बनवाया गया था। बताया गया कि साल 1854 में तत्कालीन राजा दुर्गा प्रसाद ने इस मंदिर को बनवाया और दुर्गा मां की स्थापना कराई थी। इससे नगरवासियों के पूजन और आराधना के लिए आध्यात्मिक स्थल उपलब्ध हुआ। मंदिर राजा दुर्गा प्रसाद की ही भूमि पर बना है। इसमें यज्ञशाला, भगवान बृहस्पति, भगवान भोलेनाथ परिवार, बजरंगबली, गायत्री माता, संतोषी माता और ब्रह्मदेव बाबा के मंदिर भी हैं। मंदिर की देखरेख का कार्य पीढ़ियों से एक ही परिवार के लोग करते आ रहे हैं। वर्तमान में रमेश चंद्र दीक्षित उर्फ पप्पू अपने परिवार की छठी पीढ़ी से हैं।
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मंदिर के सेवक और पुजारी के रूप में सेवा करने वाले रमेश दीक्षित ने बताया कि उनके पूर्वज बाबा भगवानदास दीक्षित के समय से ही यह परंपरा चली आ रही है। नवरात्र पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, हवन और भंडारे का आयोजन होता है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इसी मंदिर से प्रभात फेरी की शुरुआत होती है इसमें नगर के अलावा आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से माता दुर्गा की आराधना से श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है।

फोटो-10- रमेश दीक्षित। संवाद
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