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नवरात्र कल से, कलश स्थापना के लिए सुबह 8:05 से 12:24 बजे तक मुहूर्त
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हरदोई। शारदीय नवरात्र की शुरुआत रविवार से होगी। पहले दिन श्रद्धालु विधि-विधान से मां दुर्गा की आराधना कर कलश स्थापना करेंगे। कलश स्थापना के लिए सुबह 8:05 से दोपहर 12:24 बजे तक का शुभ मुहूर्त है। इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर और विदाई चरणायुध (मुर्गे) पर की मान्यता है। नवरात्र को लेकर मंदिरों और घरों में तैयारियां तेज हो गई हैं।
नवरात्र के पहले दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना के साथ नौ दिनों की पूजा शुरू होगी। श्रद्धालु मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। देवी के वाहन को लेकर श्रद्धालुओं में भी उत्सुकता है। आचार्य सनत्कुमार मिश्रा और शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि 11 अक्तूबर को शारदीय नवरात्र का आरंभ हो रहा है। मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होने से फल उत्तम रहेगा और वर्षा-जल की वृद्धि माना जाता है। बताया कि घटस्थापना मुहूर्त चंचल बेला में सुबह 8:05 से 9:31 बजे तक और इसके बाद अमृत बेला में 9:31 से 12:24 बजे और अभिजीत मुहूर्त बेला में 11:36 बजे से 12:24 बजे तक है।
बताया कि देवी पुराण में वाहन निर्धारण का प्रसिद्ध श्लोक भी है। हाथी पर देवी के आगमन के संबंध में परंपरागत फल-विचार में अच्छी वर्षा, धन-धान्य की वृद्धि और समृद्धि का संकेत माना गया है। मंगलवार को विदाई होने से वाहन घोड़ा या चरणायुध (मुर्गा) के मत मिलते हैं। 18 अक्तूबर को महाष्टमी व्रत होगा। 20 अक्तूबर मंगलवार को सुबह 9:35 बजे के बाद व्रत परायण करना उत्तम रहेगा।
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नवरात्र के पहले दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना के साथ नौ दिनों की पूजा शुरू होगी। श्रद्धालु मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। देवी के वाहन को लेकर श्रद्धालुओं में भी उत्सुकता है। आचार्य सनत्कुमार मिश्रा और शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि 11 अक्तूबर को शारदीय नवरात्र का आरंभ हो रहा है। मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होने से फल उत्तम रहेगा और वर्षा-जल की वृद्धि माना जाता है। बताया कि घटस्थापना मुहूर्त चंचल बेला में सुबह 8:05 से 9:31 बजे तक और इसके बाद अमृत बेला में 9:31 से 12:24 बजे और अभिजीत मुहूर्त बेला में 11:36 बजे से 12:24 बजे तक है।
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बताया कि देवी पुराण में वाहन निर्धारण का प्रसिद्ध श्लोक भी है। हाथी पर देवी के आगमन के संबंध में परंपरागत फल-विचार में अच्छी वर्षा, धन-धान्य की वृद्धि और समृद्धि का संकेत माना गया है। मंगलवार को विदाई होने से वाहन घोड़ा या चरणायुध (मुर्गा) के मत मिलते हैं। 18 अक्तूबर को महाष्टमी व्रत होगा। 20 अक्तूबर मंगलवार को सुबह 9:35 बजे के बाद व्रत परायण करना उत्तम रहेगा।
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