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Hardoi News: बेहतर रणनीति से नरेश ने बचाई खुद की साख, पार्टी की प्रतिष्ठा
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हरदोई। लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित हो चुके हैं और सरकार गठन की तैयारी दिल्ली में चल रही है।
हरदोई और मिश्रिख लोकसभा सीट भाजपा एक बार फिर जीतने में कामयाब रही, लेकिन पार्टी को मिले वोटों से लेकर जीत तक का अंतर घट गया। ऐसे में अब एक बार फिर जनचर्चा है कि नरेश अग्रवाल ने बेहतर रणनीति के सहारे अपनी साख बचाने में कामयाबी हासिल कर ली और पार्टी की प्रतिष्ठा भी बचाने में कामयाब रहे।
हरदोई और मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र के लिए नामांकन की प्रक्रिया तो 18 अप्रैल को शुरू हुई थी, लेकिन दिग्गज नेता नरेश अग्रवाल ने दोनों सीटों पर जीत हासिल करने की रणनीति मनपसंद प्रत्याशियों को टिकट मिलने के साथ ही बनाना शुरू कर दी थी। हरदोई से जय प्रकाश और मिश्रिख से अशोक रावत को ही टिकट दिए जाने की पैरवी नरेश अग्रवाल अपने संबंधों संपर्काें के जरिए कर रहे थे। प्रत्याशी घोषित होने के बाद 25 से 30 मार्च के बीच ही उन्होंने सदर विधानसभा क्षेत्र के अलग अलग वर्गाें के लोगों से बैठक कर रणनीति बना ली थी। इसी रणनीति के तहत सदर विधानसभा क्षेत्र में काम हुआ और उसका नतीजा चार जून को सामने भी आया। हरदोई लोकसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी बढ़त भाजपा के जय प्रकाश को सदर विधानसभा क्षेत्र में ही मिली। यहां भाजपा प्रत्याशी को 24 हजार वोटों से ज्यादा की बढ़त मिली।
सात बार विधायक और दो बार राज्य सभा के सदस्य रहे नरेश अग्रवाल प्रदेश सरकार में ऊर्जा, पर्यटन और परिवहन विभाग के मंत्री भी रह चुके हैं। उम्र के सातवें दशक में भी नरेश अग्रवाल मेहनत करने में कसर नहीं छोड़ते। आचार संहिता लागू हो जाने के बाद नरेश अग्रवाल ने हरदोई जनपद में 20 छोटी बड़ी जनसभाएं की थीं। इन चुनावों में वह खुद को ही प्रत्याशी मानने की बात समर्थकों से कहते थे। नरेश अग्रवाल के बेटे आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने भी 26 जनसभाएं जिले भर में की थीं। नरेश अग्रवाल के छोटे भाई जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने भी तकरीबन 25 छोटी बड़ी जनसभाएं नरेश अग्रवाल के निर्देश पर अलग अलग इलाकों में की थीं।
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हरदोई और मिश्रिख लोकसभा सीट भाजपा एक बार फिर जीतने में कामयाब रही, लेकिन पार्टी को मिले वोटों से लेकर जीत तक का अंतर घट गया। ऐसे में अब एक बार फिर जनचर्चा है कि नरेश अग्रवाल ने बेहतर रणनीति के सहारे अपनी साख बचाने में कामयाबी हासिल कर ली और पार्टी की प्रतिष्ठा भी बचाने में कामयाब रहे।
हरदोई और मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र के लिए नामांकन की प्रक्रिया तो 18 अप्रैल को शुरू हुई थी, लेकिन दिग्गज नेता नरेश अग्रवाल ने दोनों सीटों पर जीत हासिल करने की रणनीति मनपसंद प्रत्याशियों को टिकट मिलने के साथ ही बनाना शुरू कर दी थी। हरदोई से जय प्रकाश और मिश्रिख से अशोक रावत को ही टिकट दिए जाने की पैरवी नरेश अग्रवाल अपने संबंधों संपर्काें के जरिए कर रहे थे। प्रत्याशी घोषित होने के बाद 25 से 30 मार्च के बीच ही उन्होंने सदर विधानसभा क्षेत्र के अलग अलग वर्गाें के लोगों से बैठक कर रणनीति बना ली थी। इसी रणनीति के तहत सदर विधानसभा क्षेत्र में काम हुआ और उसका नतीजा चार जून को सामने भी आया। हरदोई लोकसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी बढ़त भाजपा के जय प्रकाश को सदर विधानसभा क्षेत्र में ही मिली। यहां भाजपा प्रत्याशी को 24 हजार वोटों से ज्यादा की बढ़त मिली।
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सात बार विधायक और दो बार राज्य सभा के सदस्य रहे नरेश अग्रवाल प्रदेश सरकार में ऊर्जा, पर्यटन और परिवहन विभाग के मंत्री भी रह चुके हैं। उम्र के सातवें दशक में भी नरेश अग्रवाल मेहनत करने में कसर नहीं छोड़ते। आचार संहिता लागू हो जाने के बाद नरेश अग्रवाल ने हरदोई जनपद में 20 छोटी बड़ी जनसभाएं की थीं। इन चुनावों में वह खुद को ही प्रत्याशी मानने की बात समर्थकों से कहते थे। नरेश अग्रवाल के बेटे आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने भी 26 जनसभाएं जिले भर में की थीं। नरेश अग्रवाल के छोटे भाई जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने भी तकरीबन 25 छोटी बड़ी जनसभाएं नरेश अग्रवाल के निर्देश पर अलग अलग इलाकों में की थीं।
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