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तालाब खोदने के नाम पर केवल कटवा रहे घास
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
Updated Wed, 15 Jun 2016 12:26 AM IST
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तालाब
- फोटो : अमर उजाला
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हरदोई। सूखे की मार के चलते पानी के लिए चारों तरफ हाहाकार मचा है। तालाब खुदवाने के नाम पर अधिकारी औपचारिकता पूरी करते हैं। केवल घास कटवाकर और कुछ मिट्टी हटाकर काम पूरा दखा दिया जाता है। अगर तालाबों का पांच से सात मीटर खोदा जाए तो वर्षा जल संरक्षण के साथ भूगर्भजल रिचार्ज भी होगा। इससे जलस्तर में भी बढ़ोत्तरी होगी। जिलाधिकारी खुद तालाब गहरे खोदवाने के पक्षधर हैं लेकिन मातहत काम को आंकड़ों में उलझाए हैं।
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वर्षा जल के संरक्षण और भूगर्भ जल रिचार्ज करने के उद्देश्य से जिले की 1308 ग्राम पंचायतों में मनरेगा से तालाब खुदवाने के आदेश दिए गए हैं। कुछ ही दिनों में करीब 872 तालाब खोद भी डाले गए। जो तालाब खोदे गए हैं, उनमें से 95 फीसदी में तीन से चार फीट ही मिट्टी निकाली गई है। निकाली गई मिट्टी से तालाब के किनारों को ऊंचा कर दिया गया। आंकड़ेबाजी के चक्कर में अफसर न ही जलसंरक्षण लायक तालाब खुदवा पाए और न ही मजदूरों को काम ही दे पाए।
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हालत ये हैं कि मजदूरों को काम देने मेें जिला प्रदेश में 55वें स्थान पर पहुंच गया। तालाबों की गहराई कम होने से जल संरक्षण और भूगर्भ जल रिचार्ज का उद्देश्य भी नहीं पूरा हो पाएगा। तकनीकी जानकारों के अनुसार जलसंरक्षण और भूगर्भजल रिचार्ज के लिए तालाब पांच से सात मीटर गहरे होने चाहिए। बड़े तालाबों को एक तरफ उथला और दूसरी तरफ गहरा खोदा जाए तो तालाब खुदवाने का उद्देश्य सफल हो सकता है। ऐतिहासिक और पुराने किसी भी तालाब की गहराई छह से सात मीटर से कम नहीं मिलेगी।
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तकनीकी सहायक करते हैं खेल
जिले में जितने तालाब खोदे गए हैं उनमें से ज्यादातर का इस्टीमेट डेढ़ से ढाई लाख के करीब है। ज्यादातर तकनीकी सहायक मौके पर नहीं जाते। कमीशनबाजी के चक्कर में ब्लॉक मुख्यालय में बैठकर ही इस्टीमेट बना देते हैं। गांव में प्रधान और सचिव तालाब की घास कटवाने के साथ कुछ मिट्टी खुदवाकर मात्र 10 से 15 दिनों में तालाब की खुदाई का काम पूरा दिखा देते हैं। अगर तालाबों का इस्टीमेट चार लाख का बने तो मजदूरों को भरपूर काम भी मिल जाएगा और तालाब भी गहरे खोदे जा सकते हैं।
डीएम ने खुद पकड़ी थी खामी
पंद्रह दिन पहले डीएम विवेक वार्ष्णेय ने तालाबों का निरीक्षण किया था। डीएम पहले खरइया गांव पहुंचे। यहां मजदूर केवल तालाब की घास काटकर मिट्टी की ऊपर की परत हटा रहे थे। इस पर डीएम ने तकनीकी सहायक को फटकार भी लगाई थी। दूसरे गांव बरौली गांव में खोदे जा रहे तालाबों में भी ऐसे ही काम हो रहा था। डीएम ने दोनों तालाबों को गहरा खोदने के निर्देश भी दिए थे।
मजदूरों को कम मिला काम
मनेरगा से जॉबकार्ड धारकों को काम दिए जाने में भी गिरावट दर्ज हुई है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया जाता है लेकिन कम इस्टीमेट के काम करवाकर औपचारिकता पूरी की जाती है ऐसे में लक्ष्य के मुताबिक लोगों को काम नहीं मिल पाता है। वित्तीय वर्ष 16-17 के दौरान 4200974 हाथों को काम दिया जाना है लेकिन मई पूरा होने तक 437732 मानव दिवस सृजित कर जॉबकार्ड धारकों को काम दिया गया है।
वर्जन
तालाबों का गहरा खुदवाया जाएगा, जिससे जल संरक्षण हो सके। तालाबों की क्रास चेकिंग कराई जाएगी अगर कहीं गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई होगी। अगर कम इस्टीमेट के कारण कोई तालाब गहरा नहीं हो सका है तो नियमानुसार उसका इस्टीमेट बढ़वाकर गहरा कराया जाएगा। - विवेक वार्ष्णेय, डीएम हरदोई
तालाबों की कम खुदाई कराने की जांच कराई जाएगी और जहां तालाब अधिक गहरे नहीं खुदे हैं वहां खुदाई अधिक गहरी कराई जाएगी।- उपायुक्त मनरेगा राजनाथ प्रसाद भगत