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Hardoi News: किसानों को लगा 15 करोड़ का झटका, शहद के नहीं मिल रहे खरीदार

Mon, 23 Jan 2023 11:14 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 23 Jan 2023 11:14 PM IST
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NA
किसानों को 15 करोड़ का झटका, शहद के नहीं मिल रहे खरीदार
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- जिले के 700 किसान मधुमक्खी पालन से कर चुके तौबा
- बिचौलिओं के हाथों औने पौने दामों पर बेच रहे शहद
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। बाजार में शहद के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर किसानों से शहद खरीदने के लिए कोई व्यवस्था नहीं हैं। इसके चलते मधुमक्खी पालक किसान औने पौने दामों में अपना शहद बेचने को विवश हैं। जिले में करीब 25 करोड़ का मधुमक्खी पालन व्यवसाय होता है। मधुमक्खी पालन घाटे का सौदा होने के चलते बीते दो सालों में लगभग 700 किसानों इस व्यवसाय से तौबा कर ली है। इस सीजन में 500 से अधिक किसानों को 15 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। ऐसी स्थिति में किसान अब इस व्यवसाय को छोड़ने का मन बना रहे हैं। जिले में दो साल पहले करीब 1200 किसान मधुमक्खी पालन व्यवसाय से जुड़े थे, मगर अब 500 ही बचे हैं। इस कारोबार से पैसा कमाने वाले ज्यादातर किसान अब मधुमक्खी पालन व्यवसाय छोड़ने का मन बना रहे हैं। वजह ये है कि अब उनकी लागत भी नहीं निकल रही है।
मधुमक्खी पालकों के अनुसार मधुमक्खी पालने वाला एक डिब्बा तीन हजार रुपये में मिलता है। एक डिब्बे से सीजन में 45 से 50 किलो तक शहद निकलता है, लेकिन सरकारी स्तर पर खरीदारी की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके चलते किसान थक हार कर अपना शहद बिचौलियों के हाथों औने पौने दामों में बेच देते हैं। ये बिचौलिए बाहर आठ से 10 गुना अधिक दामों में शहद को बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
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एजेंट से मिलकर चल रहा गोरखधंधा
ब्रांडेड कंपनी का बाजार में शहद 400 से 450 रुपये किलो तक शहद बिक रहा है। खुला शहद दुकानों पर 250 से लेकर 300 रुपये किलो तक बिक रहा है। पहले लोग सीधे मधुमक्खी पालकों से शहद खरीद लेते थे। अब बिचौलिए सीधे ब्रांडेड कंपनी के एजेंट से सांठगांठ करके कम दामों पर किसानों का शहद खरीदकर ले जाते हैं।

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कारोबार बंद होने की स्थिति में पहुंचा
भरावन क्षेत्र के राज्यपाल द्वारा सम्मानित किसान ओमप्रकाश मौर्य का कहना है कि जिले से एक सीजन में मधुमक्खी पालन का 25 करोड़ से अधिक का व्यवसाय होता है। इस व्यवसाय में बीते दो सीजन से नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान बिचौलिओं के हाथ सस्ते दामों पर शहद बेचने को विवश हैं। वहीं रसूलपुर के फरहान, पहाड़पुर के रामसनेही, सत्यप्रकाश, राजेश मौर्य, रंजीत आदि का कहना है कि पैदावार के मुताबिक उचित मूल्य नहीं मिलने से किसानों को करीब 15 करोड़ का घाटा उठाना पड़ रहा है। प्रगतिशील किसान गया प्रसाद मौर्य का कहना है कि बड़ी कंपनियों ने देशी शहद के लिए भ्रामक प्रचार करवाया कि जमने वाला शहद ठीक नहीं होता है। जिसके चलते बिक्री में भारी गिरावट आई है। वहीं कंपनियों को देशी शहद के टक्कर का शुगर सीरप मिल गया है, जो कम दाम में शहद का स्वाद दे रहा है। ऐसे में बड़ी-बड़ी कंपनियां मुनाफे के लिए बाजार में शहद के नाम पर शुगर सीरप बेच रहीं हैं। इन वजहों से मधुमक्खी पालक किसान बर्बाद हो रहा है।

वर्जन
किसानों के शहद को खरीदने के लिए सरकार की कोई योजना नहीं है। यदि शहद खरीदने संबंधी कोई नियम आता हैं तो उसे लागू कराया जाएगा। - सुरेश कुमार, जिला उद्यान अधिकारी
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