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सरसों का रकबा बढ़ा, लेकिन उत्पादन घटा
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हरपालपुर। आवारा मवेशियों से गेहूं की फसल बर्बाद होने से सबक लेते हुए पांच नदियों से घिरे कटियारी क्षेत्र के किसानों ने इस बार पिछले वर्ष की तुलना में सरसों की फसल का रकबा बढ़ाकर दूना कर दिया, लेकिन मौसम की बेरुखी से उत्पादन दर आधी रहने से किसान निराश हैं।
हालांकि, उन्हें सरसों का रेट अच्छा मिलने की उम्मीद है। हरपालपुर इलाके में 17,603 हेक्टेयर सिंचित 15,767 हेक्टेयर असिंचित भूमि पर खेती की जाती है, जिसमें रबी का क्षेत्रफल 31,964 व खरीफ की फसलों का क्षेत्रफल 10,955 हेक्टेयर है।
पिछले कई वर्षों से अन्ना मवेशियों द्वारा गेहूं की फसल उजाड़ने से परेशान किसानों का गेहूं की फसल के उत्पादन से मोह भंग हुआ है। किसानों ने इस वर्ष सरसों की फसल का रकबा बढ़ाकर 12,050 हेक्टेयर कर दिया।
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किसानों का कहना है कि आवारा मवेशी सरसों की फसल नहीं खाते हैं। यही वजह है कि किसानों का रुझान सरसों की फसल की ओर ज्यादा रहा। नतीजतन पूरे इलाके में शुरुआत में सरसों की फसल खूब लहलहाई।
वहीं, जनवरी में कई बार हुई बेमौसम बरसात के चलते सरसों का दाना कमजोर हो गया। इससे तैयार सरसों की फसल में उत्पादन दर आधी रह गई है। हालांकि, किसानों को सरसों की मूल्य दर अच्छी मिलने की उम्मीद है।
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हालांकि, उन्हें सरसों का रेट अच्छा मिलने की उम्मीद है। हरपालपुर इलाके में 17,603 हेक्टेयर सिंचित 15,767 हेक्टेयर असिंचित भूमि पर खेती की जाती है, जिसमें रबी का क्षेत्रफल 31,964 व खरीफ की फसलों का क्षेत्रफल 10,955 हेक्टेयर है।
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पिछले कई वर्षों से अन्ना मवेशियों द्वारा गेहूं की फसल उजाड़ने से परेशान किसानों का गेहूं की फसल के उत्पादन से मोह भंग हुआ है। किसानों ने इस वर्ष सरसों की फसल का रकबा बढ़ाकर 12,050 हेक्टेयर कर दिया।
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किसानों का कहना है कि आवारा मवेशी सरसों की फसल नहीं खाते हैं। यही वजह है कि किसानों का रुझान सरसों की फसल की ओर ज्यादा रहा। नतीजतन पूरे इलाके में शुरुआत में सरसों की फसल खूब लहलहाई।
वहीं, जनवरी में कई बार हुई बेमौसम बरसात के चलते सरसों का दाना कमजोर हो गया। इससे तैयार सरसों की फसल में उत्पादन दर आधी रह गई है। हालांकि, किसानों को सरसों की मूल्य दर अच्छी मिलने की उम्मीद है।