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Hardoi News: मटेरियल इंप्रूवमेंट से विशेष कानून का दुरुपयोग उचित नहीं, परिवाद खारिज
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हरदोई। एक ही घटना में दो अलग-अलग परिवाद दाखिल कर घटना को बदलने वाले परिवाद पत्र को विशेष न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने खारिज कर दिया। साथ ही शिकायतकर्ता पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। एक माह में जमा न किए जाने पर वसूली के भी आदेश दिए। अदालत ने स्पष्ट कहा कि विशेष कानूनों का दुरुपयोग न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ वास्तविक पीड़ित के हितों को भी प्रभावित करता है।
पचदेवरा थाना क्षेत्र के पिपरिया निवासी बलराम ने अदालत में दाखिल परिवाद में आरोप लगाया था कि छह अक्तूबर 2023 को बच्चों के विवाद के बाद रंजिश हो गई थी। आरोप था कि नौ अक्तूबर की शाम गांव के गोला पांडेय, विपिन और छोटू ने जातिसूचक गालियां दीं। विरोध करने पर मारपीट कर घर के अंदर ले जाकर हाथ-पैर बांधकर उसके ऊपर पेशाब कर वीडियो बनाया था। बचाने आई पत्नी के साथ अश्लील हरकतें की थीं। शोर सुनकर कई लोग मौके पर आ गए थे। लोगों को आता देख आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए थे।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता इसी घटना को लेकर पहले भी परिवाद दाखिल कर चुका था जिसे 22 दिसंबर 2023 को अदालत खारिज कर चुकी थी। इसके बावजूद उसी घटना के आधार पर 31 जनवरी 2024 को नया परिवाद दाखिल किया गया। दोनों परिवाद के परीक्षण में अदालत को कई विरोधाभास मिले। पहले परिवाद में केवल मारपीट, नकदी और घरेलू सामान छीनने का आरोप था जबकि दूसरे परिवाद में हाथ-पैर बांधने, पेशाब करने, वीडियो बनाने और पत्नी से अश्लील हरकत जैसे गंभीर आरोप जोड़ दिए गए।
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पहले परिवाद में शिकायतकर्ता के भाई विजय कुमार को पक्षकार नहीं बनाया गया था लेकिन बाद में उसे भी आरोपी बना दिया गया। अदालत ने इसे तथ्यों में मटेरियल इंप्रूवमेंट मानते हुए टिप्पणी की कि शिकायतकर्ता ने पहले से अधिक गंभीर आरोप जोड़कर एससी/एसटी एक्ट जैसे विशेष कानून का लाभ लेने का प्रयास किया। इसी आधार पर अपर जिला जज ने परिवाद खारिज कर दिया।
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पचदेवरा थाना क्षेत्र के पिपरिया निवासी बलराम ने अदालत में दाखिल परिवाद में आरोप लगाया था कि छह अक्तूबर 2023 को बच्चों के विवाद के बाद रंजिश हो गई थी। आरोप था कि नौ अक्तूबर की शाम गांव के गोला पांडेय, विपिन और छोटू ने जातिसूचक गालियां दीं। विरोध करने पर मारपीट कर घर के अंदर ले जाकर हाथ-पैर बांधकर उसके ऊपर पेशाब कर वीडियो बनाया था। बचाने आई पत्नी के साथ अश्लील हरकतें की थीं। शोर सुनकर कई लोग मौके पर आ गए थे। लोगों को आता देख आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए थे।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता इसी घटना को लेकर पहले भी परिवाद दाखिल कर चुका था जिसे 22 दिसंबर 2023 को अदालत खारिज कर चुकी थी। इसके बावजूद उसी घटना के आधार पर 31 जनवरी 2024 को नया परिवाद दाखिल किया गया। दोनों परिवाद के परीक्षण में अदालत को कई विरोधाभास मिले। पहले परिवाद में केवल मारपीट, नकदी और घरेलू सामान छीनने का आरोप था जबकि दूसरे परिवाद में हाथ-पैर बांधने, पेशाब करने, वीडियो बनाने और पत्नी से अश्लील हरकत जैसे गंभीर आरोप जोड़ दिए गए।
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पहले परिवाद में शिकायतकर्ता के भाई विजय कुमार को पक्षकार नहीं बनाया गया था लेकिन बाद में उसे भी आरोपी बना दिया गया। अदालत ने इसे तथ्यों में मटेरियल इंप्रूवमेंट मानते हुए टिप्पणी की कि शिकायतकर्ता ने पहले से अधिक गंभीर आरोप जोड़कर एससी/एसटी एक्ट जैसे विशेष कानून का लाभ लेने का प्रयास किया। इसी आधार पर अपर जिला जज ने परिवाद खारिज कर दिया।