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मेरी बस इक झलक देखी है...
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sun, 22 Nov 2015 11:57 PM IST
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हरदोई। रफी अहमद इंटर कालेज के वार्षिकोत्सव पर आयोजित कवि सम्मेलन में रात भर काव्य रस धारा की बारिश हुई। श्रोता जहां हास्य व्यंग से लोटपोट हुुए वही वीर रस के कवि के आने पर जोश से भर गए तो श्रृंगार के छंद सुन मंत्र मुग्ध हो गए। वार्षिकोत्सव के समापन पर प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।
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विद्यालय प्रांगण में शनिवार की रात को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन का शुभारंभ प्रमुख सचिव भुवनेश कुमार, डीआईओएस योगेंद्र कुमार, उप जिलाधिकारी अशोक शुक्ला और डीएससीएल के एमसी जोशी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
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कवि सम्मेलन की शुरुआत साईदा कुरैशी ने मां शारदे दुर्गे भवानी जगत तारणी सरस्वती वंदना से किया। इसके बाद छतरपुर के अभिराम पाठक ने वीर रस की कविता सुनी मांग करो न साजन समझौता हो जाएगा सुना कर तालियां बटोरी, श्रृंगार रस के कवि पंकज प्रसून ने वो एक नन्ही जान जो सच से भी अनाजन से पहले गई श्मशान सुना भ्रूण हत्या पर कविता सुनाई।
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ग्वालियर के हास्य व्यंग कवि साजन ग्वालियरी ने कई व्यंग रचना सुना लोगों को खूब गुदगुदाया। मुंबई के कवि केके वर्मा ने तन्हा दिल घबराता है गीत सुनाया। आगरा के रामेंद्र मोहन ने कहा कि पेड़ से टूटा पत्ता और स्कूल से भागा हुआ बच्चा पतन के रास्ते पर जाता है।
कवि वेदव्रत बाजेपयी ने चीनी के गोरे गालों पर कुछ कड़े तमाचे जड़ देना, अवध पुरी में श्रीराम का मंदिर भव्य बना देना। गाजियाबाद की कवयित्री तरूणा मिश्र ने मेरी बस इक झलक देखी है, अभी अंदाज बाकी है, गीत सुनाया।। संचालक शशिकांत यादव ने गौ माता की हत्या रुकवाना तुम, पूरे पांच साल सरकार चलवाना तुम, सुनाई।
कवयित्री साईदा कुरैशी ने यह खून हिंद का है बहाया न कीजिए गीत प्रस्तुत किया। राजस्थान के गिरीश विद्रोही ने चांदनी बन तुम झिलमिला दीजिए पर खूब तालियां बटोरी। जयपुर के वरुण चतुर्वेदी ने मूर्ति लगाने से नहीं बनती है पहचान पर वाह वाही लूटी।