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Hardoi News: मेडिकल कॉलेज में बजट के अभाव में थमीं जांचें, दवाओं की किल्लत
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज में बजट का अभाव अब मरीजों की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ रहा है। बजट की कमी की वजह से अस्पताल की सेंट्रल लैब में रिजेंट न होने से जांचें रुकी हुई हैं। वहीं दवाओं की कमी पूरी नहीं हो रही है। लोगों काे बाहर और निजी लैबाें में जेब ढीली करनी पड़ रही है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज ने बजट की किल्लत दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अनटाइड फंड से दो करोड़ की डिमांड की है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
मेडिकल कॉलेज की सेंट्रल लैब में पिछले कई दिनों से थायराइड जांचें नहीं हो पा रही हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों को डॉक्टर परामर्श तो दे रहे हैं लेकिन लैब से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। तमाम मरीजों के रक्त नमूने लिए जा रहे हैं लेकिन जांचें नहीं मिल पा रही हैं। इससे मजबूरी में मरीजों को निजी पैथोलॉजी सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है वहां उन्हें अधिक कीमतों पर जांच करानी पड़ रही है।
सेंट्रल लैब में 300 रुपये में जांच होती है जबकि निजी लैब में 500 रुपये तक देने होते हैं। यही हाल दवाओं का भी है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को आधी-अधूरी दवाएं मिल रही हैं। मरीजों को विटामिन, एंटीबायोटिक और यहां तक कि दर्द निवारक दवाएं भी बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं।
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केस -1 सांडी के जलपीपुर निवासी विनोद ने बुखार की वजह से डॉक्टर को दिखाया था। पर्चे पर चार दवाएं लिखी थीं लेकिन काउंटर पर सिर्फ दो ही मिलीं। बाकी दवाएं बाहर से लेने को कहा गया। सरकारी अस्पताल में भी दवा खरीदनी पड़े तो फायदा क्या है।
केस-2- शहर निवासी ममता देवी ने बताया कि वह थायराइड जांच कराने आई हैं। जांच के लिए सरकारी रसीद तो कटवा ली लेकिन अब बताया जा रहा है कि जांच नहीं हो रही है। बाहर पैथोलॉजी से जांच कराने पर अधिक पैसा देना होगा। वहीं, जांच न होने तक उपचार भी रुका हुआ है।
2.11 करोड़ के बजट पर टिकी निगाहें
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस संकट से उबरने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अनटाइड फंड से 2,11,84,717 रुपये की मांग की है। इस संबंध में एक प्रस्ताव बनाकर सीएमओ कार्यालय भेजा जा चुका है। सीएमओ की तरफ से प्रस्ताव की स्वीकृति के लिए जिलाधिकारी को अनुमोदन किया जा चुका है। अधिकारियों को उम्मीद है कि बजट स्वीकृत हो जाएगा और दवाओं की आपूर्ति बहाल हो जाएगी और लैब के लिए रीजेंट खरीद लिया जाएगा।
अनटाइड फंड से हो सकेंगे भुगतान
स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए अनटाइड फंड के स्वीकृत होने के बाद मेडिकल कॉलेज दवाओं पर 32 लाख रुपये, रिजेंट पर 82 लाख रुपये, मरीजों के भोजन पर 50 लाख रुपये समेत अन्य मदाें में कुल 2,11,84,717 रुपये खर्च किए जाएंगे। बजट का सदुपयोग होने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए अनटाइड फंड से बजट की डिमांड भेजी गई है। बजट स्वीकृत होते ही रिजेंट और दवाओं की कमी को दूर किया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज की सेंट्रल लैब में पिछले कई दिनों से थायराइड जांचें नहीं हो पा रही हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों को डॉक्टर परामर्श तो दे रहे हैं लेकिन लैब से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। तमाम मरीजों के रक्त नमूने लिए जा रहे हैं लेकिन जांचें नहीं मिल पा रही हैं। इससे मजबूरी में मरीजों को निजी पैथोलॉजी सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है वहां उन्हें अधिक कीमतों पर जांच करानी पड़ रही है।
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सेंट्रल लैब में 300 रुपये में जांच होती है जबकि निजी लैब में 500 रुपये तक देने होते हैं। यही हाल दवाओं का भी है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को आधी-अधूरी दवाएं मिल रही हैं। मरीजों को विटामिन, एंटीबायोटिक और यहां तक कि दर्द निवारक दवाएं भी बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं।
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केस -1 सांडी के जलपीपुर निवासी विनोद ने बुखार की वजह से डॉक्टर को दिखाया था। पर्चे पर चार दवाएं लिखी थीं लेकिन काउंटर पर सिर्फ दो ही मिलीं। बाकी दवाएं बाहर से लेने को कहा गया। सरकारी अस्पताल में भी दवा खरीदनी पड़े तो फायदा क्या है।
केस-2- शहर निवासी ममता देवी ने बताया कि वह थायराइड जांच कराने आई हैं। जांच के लिए सरकारी रसीद तो कटवा ली लेकिन अब बताया जा रहा है कि जांच नहीं हो रही है। बाहर पैथोलॉजी से जांच कराने पर अधिक पैसा देना होगा। वहीं, जांच न होने तक उपचार भी रुका हुआ है।
2.11 करोड़ के बजट पर टिकी निगाहें
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस संकट से उबरने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अनटाइड फंड से 2,11,84,717 रुपये की मांग की है। इस संबंध में एक प्रस्ताव बनाकर सीएमओ कार्यालय भेजा जा चुका है। सीएमओ की तरफ से प्रस्ताव की स्वीकृति के लिए जिलाधिकारी को अनुमोदन किया जा चुका है। अधिकारियों को उम्मीद है कि बजट स्वीकृत हो जाएगा और दवाओं की आपूर्ति बहाल हो जाएगी और लैब के लिए रीजेंट खरीद लिया जाएगा।
अनटाइड फंड से हो सकेंगे भुगतान
स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए अनटाइड फंड के स्वीकृत होने के बाद मेडिकल कॉलेज दवाओं पर 32 लाख रुपये, रिजेंट पर 82 लाख रुपये, मरीजों के भोजन पर 50 लाख रुपये समेत अन्य मदाें में कुल 2,11,84,717 रुपये खर्च किए जाएंगे। बजट का सदुपयोग होने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए अनटाइड फंड से बजट की डिमांड भेजी गई है। बजट स्वीकृत होते ही रिजेंट और दवाओं की कमी को दूर किया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज