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Hardoi News: मेडिकल काॅलेज में शव के लिए नहीं मिलता वाहन, चालक पर होगी कार्रवाई

Wed, 21 Jan 2026 10:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jan 2026 10:39 PM IST
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Medical college does not provide vehicle for dead body, action will be taken against the driver
हरदोई। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की तमाम कोशिशों के बावजूद कर्मचारियों की मनमानी व्यवस्थाओं पर भारी पड़ रही है।
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मंगलवार को एक महिला की मौत के बाद शव लेकर जाने में आनाकानी करने पर शव वाहन चालक के खिलाफ कार्रवाई कर दी गई है। इमरजेंसी प्रभारी ने वाहन चालक पर कार्रवाई करने के लिए सीएमएस और प्राचार्य को पत्र भेज दिया है। प्राचार्य ने भी कार्यदायी संस्था को पत्र भेजकर वाहन चालक को हटाने के निर्देश दिए हैं।
स्थानीय मेडिकल कॉलेज में किसी मरीज की मौत होने के बाद शव को उनके घर तक पहुंचाने के लिए वाहन की उपलब्धता है। इमरजेंसी से लेकर वार्ड में शव वाहन चालकों के नंबर तक लिखवाए गए हैं ताकि मरीजों को सहूलियत मिल सके। इसके बाद भी कर्मचारियों की मनमानी व्यवस्थाओं पर हावी पड़ रही हैं। बता दें कि सोमवार को एक मासूम की मौत होने पर परिजनों को शव वाहन नहीं मिला था। मंगलवार रात को एक बार फिर ऐसा ही हुआ।
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शहर के कन्हईपुरवा निवासी मनोज शुक्ला की मां किरन शुक्ला (58) की तबीयत बिगड़ने पर परिजन रात साढ़े 11 बजे उन्हें इमरजेंसी लेकर गए। इमरजेंसी चिकित्सक डॉ. श्रीकांत उनकी जांच करते लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी। चिकित्सक ने शव वाहन लेकर जाने की सलाह दी लेकिन वाहन चालक जफर ने फोन नहीं उठाया। चिकित्सक ने भी फोन लगाकर बात करने का प्रयास किया लेकिन काफी देर तक बात न होने पर परिजन उन्हें ई-रिक्शे से लेकर आने लगे। हालांकि, बाद में निजी एंबुलेंस से उनके शव को घर भेजा गया। इसी मामले पर बुधवार को इमरजेंसी प्रभारी अमित आनंद ने प्राचार्य और सीएमएस को वाहन चालकों पर कार्रवाई के लिए पत्र भेजा है।
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निजी एंबुलेंस से साठगांठ हो सकती है वजह
हरदोई। मेडिकल कॉलेज से शव वाहन निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है जबकि निजी एंबुलेंस शहर में ही किसी शव को उनके घर तक पहुंचाने के लिए 500 रुपये से कम नहीं लेती हैं। शहर के बाहर जाने पर और अधिक किराया वसूला जाता है। ऐसे में इस बात का अंदेशा है कि इसमें निजी एंबुलेंस चालकों की साठगांठ हो सकती है। कमाई के चक्कर में शवों को सरकारी वाहनों से लेकर नहीं जाया जाता है। वहीं, परिजनों को मजबूरी में निजी एंबुलेंस करनी पड़ती है।



सरकारी शव वाहन से डेड बॉडी लेकर न जाने के मामले में इमरजेंसी प्रभारी और सीएमएस से पत्र मिला है। शव वाहन चालक आउटसोर्स कंपनी से लगे हुए हैं। ऐसे में कार्यदायी संस्था को लिखकर दे दिया गया है कि वह जांच करें और वाहन चालकों को हटाएं। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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