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Hardoi News: मुफ्त इलाज की टूट रही आस, एक रुपये के पर्चे पर 1,189 रुपये की लिखी गईं दवाएं
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फोटो- 26- सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय की इमारत। संवाद
हरदोई। सरकारी अस्पतालों में एक रुपये का पर्चा बनवाकर मुफ्त इलाज की आस लेकर आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की जेब पर जमकर कैंची चल रही है। शुक्रवार को मेडिसिन विभाग में उपचार कराने पहुंची एक महिला मरीज का बाहर के मेडिकल स्टोर से करीब 1,189 रुपये की दवाओं का बिल बना दिया। इस देखकर उनके होश उड़ गए। इसके अतिरिक्त तमाम अन्य मरीजों को भी 200 से 500 रुपये की बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ीं।
शहर के सौ शैया संयुक्त चिकित्सालय के मेडिसिन विभाग में मरीजों को जमकर बाहर के मेडिकल स्टोर की दवाएं लिखी गईं। ऐसे में जब मरीज मेडिकल स्टोर पर दवाएं लेने पहुंचे तो वो परेशान हो गए। तमाम मरीज अस्पताल की व्यवस्थाओं को कोसते नजर आए।
एक तरफ मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिले के सरकारी अस्पताल में ही सभी व्यवस्थाएं और दवाओं के होने का दावा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उनके कार्यालय के साथ संचालित हो रहे सौ शैया संयुक्त चिकित्सालय में ही डॉक्टर मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर की दवाएं लिख रहे हैं। बता दें कि सौ शैया में रोजाना 500 से 600 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित मरीज परामर्श लेने पहुंचते हैं। चिकित्सालय से मरीजों को निशुल्क दवाएं दी जाती हैं लेकिन वहां भी दवाओं की कमी बनी हुई है। ऐसे में मरीजों को डॉक्टर बाहर की दवाएं लिखकर दे रहे हैं।
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केस-1
अहिरोरी ब्लॉक के भटपुरवा निवासी रामकली हाथ में कालापन आने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थीं। एक रुपये का पर्चा बनवाने के बाद उन्हें बाहर से दवाएं लेने को कहा गया। मेडिकल स्टोर पर 1,189 रुपये कीमत बताई गई तो वह परेशान हो गईं। उनका कहना था कि सरकारी अस्पताल में इस उम्मीद से आए थे कि कम खर्च में इलाज हो जाएगा।
केस-2
मेहुना महेशपुर निवासी अनिकेत गुप्ता को भी मेडिसिन विभाग के चिकित्सक ने करीब 500 रुपये की दवाएं बाहर से लिखीं। उन्हें मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ीं। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में एक रुपये का पर्चा तो बन जाता है लेकिन बाहर की महंगी दवाएं खरीदने से इलाज का खर्च बढ़ जाता है।
मरीज को बाहर की दवाएं नहीं लिखी गई हैं। कोई मरीज अगर ये कह रहा है तो इसमें कुछ कर नहीं सकते। मरीजों को अंदर की ही दवाएं लिखी गई हैं। -डॉ. प्रतीक नलवा
सभी चिकित्सकों को बाहर की दवाएं लिखने के लिए साफ मना किया गया है और इसके लिए पत्र भी दिया गया है। मामला अभी संज्ञान में नहीं था, जांच कर कार्रवाई करेंगे। -डॉ. अनिल कुमार शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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शहर के सौ शैया संयुक्त चिकित्सालय के मेडिसिन विभाग में मरीजों को जमकर बाहर के मेडिकल स्टोर की दवाएं लिखी गईं। ऐसे में जब मरीज मेडिकल स्टोर पर दवाएं लेने पहुंचे तो वो परेशान हो गए। तमाम मरीज अस्पताल की व्यवस्थाओं को कोसते नजर आए।
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एक तरफ मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिले के सरकारी अस्पताल में ही सभी व्यवस्थाएं और दवाओं के होने का दावा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उनके कार्यालय के साथ संचालित हो रहे सौ शैया संयुक्त चिकित्सालय में ही डॉक्टर मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर की दवाएं लिख रहे हैं। बता दें कि सौ शैया में रोजाना 500 से 600 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित मरीज परामर्श लेने पहुंचते हैं। चिकित्सालय से मरीजों को निशुल्क दवाएं दी जाती हैं लेकिन वहां भी दवाओं की कमी बनी हुई है। ऐसे में मरीजों को डॉक्टर बाहर की दवाएं लिखकर दे रहे हैं।
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केस-1
अहिरोरी ब्लॉक के भटपुरवा निवासी रामकली हाथ में कालापन आने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थीं। एक रुपये का पर्चा बनवाने के बाद उन्हें बाहर से दवाएं लेने को कहा गया। मेडिकल स्टोर पर 1,189 रुपये कीमत बताई गई तो वह परेशान हो गईं। उनका कहना था कि सरकारी अस्पताल में इस उम्मीद से आए थे कि कम खर्च में इलाज हो जाएगा।
केस-2
मेहुना महेशपुर निवासी अनिकेत गुप्ता को भी मेडिसिन विभाग के चिकित्सक ने करीब 500 रुपये की दवाएं बाहर से लिखीं। उन्हें मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ीं। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में एक रुपये का पर्चा तो बन जाता है लेकिन बाहर की महंगी दवाएं खरीदने से इलाज का खर्च बढ़ जाता है।
मरीज को बाहर की दवाएं नहीं लिखी गई हैं। कोई मरीज अगर ये कह रहा है तो इसमें कुछ कर नहीं सकते। मरीजों को अंदर की ही दवाएं लिखी गई हैं। -डॉ. प्रतीक नलवा
सभी चिकित्सकों को बाहर की दवाएं लिखने के लिए साफ मना किया गया है और इसके लिए पत्र भी दिया गया है। मामला अभी संज्ञान में नहीं था, जांच कर कार्रवाई करेंगे। -डॉ. अनिल कुमार शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक

फोटो- 26- सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय की इमारत। संवाद

फोटो- 26- सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय की इमारत। संवाद