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Hardoi News: 30 रुपये का लालच देकर मासूम से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद

Fri, 21 Aug 2026 11:25 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 21 Aug 2026 11:25 PM IST
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Man sentenced to life imprisonment for raping
फोटो 25: अ​भियुक्त वीरेश। संवाद
हरदोई। पचदेवरा थाना क्षेत्र में करीब साढ़े चार साल पहले लकड़ी बीनने गई 11 साल की मासूम को 30 रुपये का लालच देकर दुष्कर्म करने वाले दोषी को अब उम्र भर जेल में रहना होगा। विशेष न्यायाधीश पॉस्को मनमोहन सिंह ने मामले की सुनवाई में युवक को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की पूरी रकम पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दिया।
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क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 10 फरवरी 2022 को दोपहर करीब चार बजे उसकी पुत्री (11) गांव में लकड़ी बीनने गई थी। गांव का वीरेश पुत्री को 30 रुपये दिखाकर अश्लील हरकतें करने लगा। मना करने पर वीरेश ने पुत्री को पकड़ लिया। मुंह दबाकर झाड़ी में दुष्कर्म किया। शोर करने पर उसकी पिटाई भी की थी। पीड़िता ने घर आकर पूरी घटना बताई। पुलिस ने पॉस्को और दुष्कर्म की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी।
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अदालत में पीड़िता ने बताया कि घटना के समय वह छोटे भाई के साथ लकड़ियां बीनने गई थी। भाई मंदिर के पास बच्चों के साथ खेलने लगा। इस बीच वीरेश आ गया और रुपये का लालच देकर दुष्कर्म किया। डॉ. सूफिया तालिब ने अदालत में बताया कि पीड़िता के गुप्तांग में चोट के निशान थे। खून भी निकल रहा था। वह मौके पर बेहोश हो गई थी। पुलिस ने 12 फरवरी को आरोपी वीरेश को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस ने डीएनए नमूने लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भोपाल के केंद्रीय फॉरेंसिक प्रयोगशाला भेजे थे। 39 दिनों में विवेचना पूरी कर 21 मार्च 2022 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। बचाव पक्ष ने गांव की पार्टी बंदी और पुरानी रंजिश के चलते आरोपी को झूठा फंसाने का तर्क दिया।
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अपर जिला जज ने कहा कि महज गांव की रंजिश के कारण कोई माता-पिता अपनी 10-11 साल की अबोध बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराकर उसकी अस्मत और प्रतिष्ठा को दांव पर नहीं लगाएगा। अबोध बालिका को बरगलाकर दुष्कर्म किया जिससे उसके अंगों में गंभीर चोटें आईं और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। यह अभियुक्त की विकृत मानसिकता को दर्शाता है। ऐसे व्यक्ति समाज में अबोध बच्चों की स्वतंत्रता, सुरक्षा और मासूमियत के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसी घटनाओं से समाज में भय, असुरक्षा और आक्रोश पैदा होता है।
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