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Hardoi News: 2,788 बच्चों पर कुपोषण की काया, एनआरसी पर भी सन्नाटा छाया
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फोटो-03- पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चों के साथ मौजूद महिलाएं। संवाद
हरदोई। अतिकुपोषित बच्चों को सुपोषित करने के लिए जिले में सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते जिले में करीब 2,800 अतिकुपोषित बच्चों को उपचार नहीं मिल रहा है। अतिकुपोषितों को पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती कराने में हीलाहवाली के चलते तमाम बेड खाली पड़े रहते हैं।
कुपोषण से जंग में भले ही पोषण पुनर्वास केंद्र कारगर साबित हो रहे हैं लेकिन जिम्मेदारों की मनमानी के चलते जनपद के सभी अतिकुपोषितों को लाभ नहीं मिल रहा है। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला महिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र चल रहा है जहां 14 दिनों तक अतिकुपोषितों को भर्ती कर सुपोषित किया जाता है। अतिकुपोषितों को भर्ती करने की जिम्मेदारी बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की है लेकिन न विभाग गंभीर और न ही जिम्मेदार। ऐसे में इन दिनों सिर्फ छह बच्चे ही महिला अस्पताल स्थित एनआरसी पर भर्ती हैं जबकि दूसरा पोषण पुनर्वास केंद्र संडीला में संचालित है। इस पर सिर्फ पांच बच्चे ही भर्ती हैं। बच्चों को सुपोषित करने में विभागीय जिम्मेदारों की तरफ से सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।
केंद्र पर लगातार घट रही बच्चों की संख्या
हरदोई। जिम्मेदारों की हीलाहवाली और कुछ मौसम के असर से पोषण पुनर्वास केंद्र पर अतिकुपोषित बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। जिला महिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र पर अक्तूबर माह में 15, नवंबर में 11 और दिसंबर में सिर्फ छह बच्चे ही भर्ती हुए। जनवरी में भी अभी सिर्फ छह बच्चे हरपालपुर, बिलग्राम, अहिरोरी, शाहाबाद, मल्लावां और पिहानी से एक-एक बच्चा भर्ती है। वहीं, संडीला स्थित एनआरसी पर अक्तूबर और नवंबर माह में एक भी बच्चा भर्ती नहीं कराया गया। अधिकारियों के निर्देश पर अब कोथावां, बेहंदर और भरावन से एक-एक और कछौना से दो बच्चे भर्ती किए गए हैं।
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सभी ब्लॉक से दो-दो बच्चे भर्ती कराने के निर्देश
हरदोई। अतिकुपोषितों को भर्ती कराने के लिए सभी ब्लॉकों से दो-दो बच्चों को भर्ती कराने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें सबसे अधिक जोर संडीला, भरावन, बेहंदर, कछौना और कोथावां ब्लॉक की सीडीपीओ को निर्देशित किया गया है कि संडीला एनआरसी पर सभी 10 बेडों को शत प्रतिशत भरा रखा जाए। अतिकुपोषित बच्चों को लाकर पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती कराया जाए।
अतिकुपोषित बच्चों को एनआरसी पर भर्ती कराने के लिए रोस्टर दिया जा चुका है लेकिन फिर भी लापरवाही बरती जा रही है। कभी सर्दी का हवाला तो कभी अभिभावकों के तैयार न होने की बात कह दी जाती है। इसके बाद भी पोषण पुनर्वास केंद्र का स्टाफ लगातार सीडीपीओ व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से संपर्क कर बच्चों को बुलाते रहते हैं। -डॉ. सुबोध कुमार, सीएमएस, महिला अस्पताल
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कुपोषण से जंग में भले ही पोषण पुनर्वास केंद्र कारगर साबित हो रहे हैं लेकिन जिम्मेदारों की मनमानी के चलते जनपद के सभी अतिकुपोषितों को लाभ नहीं मिल रहा है। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला महिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र चल रहा है जहां 14 दिनों तक अतिकुपोषितों को भर्ती कर सुपोषित किया जाता है। अतिकुपोषितों को भर्ती करने की जिम्मेदारी बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की है लेकिन न विभाग गंभीर और न ही जिम्मेदार। ऐसे में इन दिनों सिर्फ छह बच्चे ही महिला अस्पताल स्थित एनआरसी पर भर्ती हैं जबकि दूसरा पोषण पुनर्वास केंद्र संडीला में संचालित है। इस पर सिर्फ पांच बच्चे ही भर्ती हैं। बच्चों को सुपोषित करने में विभागीय जिम्मेदारों की तरफ से सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।
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केंद्र पर लगातार घट रही बच्चों की संख्या
हरदोई। जिम्मेदारों की हीलाहवाली और कुछ मौसम के असर से पोषण पुनर्वास केंद्र पर अतिकुपोषित बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। जिला महिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र पर अक्तूबर माह में 15, नवंबर में 11 और दिसंबर में सिर्फ छह बच्चे ही भर्ती हुए। जनवरी में भी अभी सिर्फ छह बच्चे हरपालपुर, बिलग्राम, अहिरोरी, शाहाबाद, मल्लावां और पिहानी से एक-एक बच्चा भर्ती है। वहीं, संडीला स्थित एनआरसी पर अक्तूबर और नवंबर माह में एक भी बच्चा भर्ती नहीं कराया गया। अधिकारियों के निर्देश पर अब कोथावां, बेहंदर और भरावन से एक-एक और कछौना से दो बच्चे भर्ती किए गए हैं।
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सभी ब्लॉक से दो-दो बच्चे भर्ती कराने के निर्देश
हरदोई। अतिकुपोषितों को भर्ती कराने के लिए सभी ब्लॉकों से दो-दो बच्चों को भर्ती कराने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें सबसे अधिक जोर संडीला, भरावन, बेहंदर, कछौना और कोथावां ब्लॉक की सीडीपीओ को निर्देशित किया गया है कि संडीला एनआरसी पर सभी 10 बेडों को शत प्रतिशत भरा रखा जाए। अतिकुपोषित बच्चों को लाकर पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती कराया जाए।
अतिकुपोषित बच्चों को एनआरसी पर भर्ती कराने के लिए रोस्टर दिया जा चुका है लेकिन फिर भी लापरवाही बरती जा रही है। कभी सर्दी का हवाला तो कभी अभिभावकों के तैयार न होने की बात कह दी जाती है। इसके बाद भी पोषण पुनर्वास केंद्र का स्टाफ लगातार सीडीपीओ व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से संपर्क कर बच्चों को बुलाते रहते हैं। -डॉ. सुबोध कुमार, सीएमएस, महिला अस्पताल