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जीव को भक्ति बनाती विनम्र
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बेहटागोकुल। मानपुर कस्बे में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य संतोष भाई ने श्रद्धालुओं को बताया कि भक्ति जीव को विनम्र बनाती है। जीव के अंदर के ताप को समाप्त करती है। कहा कि जिस जीव पर ईश्वर की कृपा हो जाती, उस पर सब कृपा करने लग जाते हैं।
कहा कि भगवान जब स्वयं भक्त के हो जाते हैं, तो संसार भक्त के नाम को मंत्र के रूप में जपने लगता हैं। भगवान की कृपा से पूर्ण भक्त संसार में जीव के कल्याण और ईश्वर-नाम के संकीर्तन के प्रवाह को और तीव्र करने के लिए आते हैं।
भक्त कभी भी राग, द्वेष और वैमनस्य नहीं करते हैं। वामन अवतार की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि राजा बलि से वामन ने तीन पग पृथ्वी मांग कर उसके अभिमान को भी नाप लिया।
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भगवान श्रीराम के अवतार का वर्णन करते हुए बताया कि राम शब्द जो रा में जब बोलते हैं, मुंह खुलते ही पाप बाहर निकलता है। म में ओंठ बंद होते हैं। पाप दोबारा अंदर नहीं जाते।
रामायण और भागवत हमारे जीवन मृत्यु को सुधारती है। भगवान के जन्म के बहुत से कारण हैं। भगवान का अवतार आतुरता से होता है। मनु महाराज ने तपस्या करके भगवान से उनका स्वरूप मांग लिया।
भगवान श्रीराम स्वयं ही दशरथ एवं कौशल्या के घर में प्रगट हो गए। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, यशोदा के लाला भयो जय हो गोपाल की इस कीर्तन पर सभी भक्त जमकर नाचे।
श्रीकृष्ण की सुंदर झांकी बनाई गई। मखाना टॉफी फूल गुब्बारे लुटाए गए। इस मौके पर कमलेश सिंह, संतोष सिंह, पंडित देव शर्मा, अमर सिंह, गोपी कृष्ण गुप्ता, गुड्डू सिंह, विजय बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।
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कहा कि भगवान जब स्वयं भक्त के हो जाते हैं, तो संसार भक्त के नाम को मंत्र के रूप में जपने लगता हैं। भगवान की कृपा से पूर्ण भक्त संसार में जीव के कल्याण और ईश्वर-नाम के संकीर्तन के प्रवाह को और तीव्र करने के लिए आते हैं।
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भक्त कभी भी राग, द्वेष और वैमनस्य नहीं करते हैं। वामन अवतार की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि राजा बलि से वामन ने तीन पग पृथ्वी मांग कर उसके अभिमान को भी नाप लिया।
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भगवान श्रीराम के अवतार का वर्णन करते हुए बताया कि राम शब्द जो रा में जब बोलते हैं, मुंह खुलते ही पाप बाहर निकलता है। म में ओंठ बंद होते हैं। पाप दोबारा अंदर नहीं जाते।
रामायण और भागवत हमारे जीवन मृत्यु को सुधारती है। भगवान के जन्म के बहुत से कारण हैं। भगवान का अवतार आतुरता से होता है। मनु महाराज ने तपस्या करके भगवान से उनका स्वरूप मांग लिया।
भगवान श्रीराम स्वयं ही दशरथ एवं कौशल्या के घर में प्रगट हो गए। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, यशोदा के लाला भयो जय हो गोपाल की इस कीर्तन पर सभी भक्त जमकर नाचे।
श्रीकृष्ण की सुंदर झांकी बनाई गई। मखाना टॉफी फूल गुब्बारे लुटाए गए। इस मौके पर कमलेश सिंह, संतोष सिंह, पंडित देव शर्मा, अमर सिंह, गोपी कृष्ण गुप्ता, गुड्डू सिंह, विजय बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।