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पंजाब से ट्रेन से लौटे कामगारों का छलका दर्द
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हरदोई। लॉकडाउन ने गैर प्रांतों में फंसे हजारों श्रमिकों को बेरोजगार कर दिया। परदेस में रोजगार छिनते ही सबकुछ बदल गया। जो पूंजी थी, वह खाने पीने में और कमरे का किराया चुकाने में चली गई। बस जैसे दिन गुजर रहे थे, वैसे ही परेशानी बढ़ती जा रही थी। कुछ यही कहना है शुक्रवार को पंजाब से स्पेशल ट्रेन से वापस आए श्रमिकों का।
कामगारों का कहना है कि उम्मीद थी कि कुछ दिन के बाद सब सामान्य हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लॉकडाउन लगातार तीन बार बढ़ा तो बिना रोजगार के पंजाब में रहने को लेकर हिम्मत जवाब देने लगी। काफी प्रयास किया, लेकिन वापसी के लिए कोई साधन नहीं मिल सके।
देर से ही सही, सरकार ने उनकी परेशानी को जाना और समझा। श्रमिकों का कहना है कि ये स्पेशल ट्रेन उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। कम से कम अब वह अपने घर जाकर अपने परिवार के साथ तो रह सकेंगे।
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पंजाब के मोहाली जनपद के मुबारकपुर में रहे बिलग्राम के ग्राम मुर्शदाबाद निवासी 20 वर्षीय अजय कुमार पुत्र हरिनंदन पेेंटर थे। अजय का कहना है कि लॉकडाउन ने अचानक रोजगार छीन लिया। जो पूंजी बची थी उसी से डेढ़ माह से गुजारा कर रहे थे। स्पेशल ट्रेन उनके जैसे सैकड़ों लोगों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।
पंजाब के कोखल प्लांट में स्थित स्क्रू बनाने की फैक्टरी में काम करने वाले बघौली के ग्राम मसीत के मजरा जियनपुरवा निवासी आकाश भी शुक्रवार को स्पेशल ट्रेन से वापस आए। बताया कि लॉकडाउन के चलते फैक्टरी बंद हो गई। मालिक ने दो माह का भुगतान भी नहीं दिया। कमरे का किराया भी निकलना मुश्किल हो चला था। घर वापसी के लिए कोई किराया नहीं लिया गया है।
कोतवाली देहात के ग्राम अटवा असिगांव निवासी नीरज सिंह ने बताया कि वह बंथरपुर जनपद मोहाली में एक सिविल कंस्ट्रक्शन कंपनी में सुपरवाइजर हैं। पत्नी ममता, बेटा सूर्यांश व भाई संदीप भी साथ में रहता था। बताया कि लॉकडाउन के चलते कंपनी का काम पूर्णतया बंद है। कंपनी से अप्रैल का भुगतान भी नहीं मिला। स्पेशल ट्रेन के लिए वह सरकार के आभारी हैं।
पंजाब के जिला महोली के मुबारकपुर में रहकर मेहनत मजदूरी करने वाले संडीला के ग्राम जाजमऊ निवासी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि वह पत्नी और बच्चे के साथ पंजाब में रह रहे थे। लॉकडाउन लगने के बाद काम मिलना और घर से निकलना बंद हो गया। डेढ़ महीना काफी परेशानी में बीता। ट्रेन न चलती तो परेशानियों का बढ़ना तय था। देर से ही सही घर वापसी हो रही है।
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कामगारों का कहना है कि उम्मीद थी कि कुछ दिन के बाद सब सामान्य हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लॉकडाउन लगातार तीन बार बढ़ा तो बिना रोजगार के पंजाब में रहने को लेकर हिम्मत जवाब देने लगी। काफी प्रयास किया, लेकिन वापसी के लिए कोई साधन नहीं मिल सके।
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देर से ही सही, सरकार ने उनकी परेशानी को जाना और समझा। श्रमिकों का कहना है कि ये स्पेशल ट्रेन उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। कम से कम अब वह अपने घर जाकर अपने परिवार के साथ तो रह सकेंगे।
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पंजाब के मोहाली जनपद के मुबारकपुर में रहे बिलग्राम के ग्राम मुर्शदाबाद निवासी 20 वर्षीय अजय कुमार पुत्र हरिनंदन पेेंटर थे। अजय का कहना है कि लॉकडाउन ने अचानक रोजगार छीन लिया। जो पूंजी बची थी उसी से डेढ़ माह से गुजारा कर रहे थे। स्पेशल ट्रेन उनके जैसे सैकड़ों लोगों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।
पंजाब के कोखल प्लांट में स्थित स्क्रू बनाने की फैक्टरी में काम करने वाले बघौली के ग्राम मसीत के मजरा जियनपुरवा निवासी आकाश भी शुक्रवार को स्पेशल ट्रेन से वापस आए। बताया कि लॉकडाउन के चलते फैक्टरी बंद हो गई। मालिक ने दो माह का भुगतान भी नहीं दिया। कमरे का किराया भी निकलना मुश्किल हो चला था। घर वापसी के लिए कोई किराया नहीं लिया गया है।
कोतवाली देहात के ग्राम अटवा असिगांव निवासी नीरज सिंह ने बताया कि वह बंथरपुर जनपद मोहाली में एक सिविल कंस्ट्रक्शन कंपनी में सुपरवाइजर हैं। पत्नी ममता, बेटा सूर्यांश व भाई संदीप भी साथ में रहता था। बताया कि लॉकडाउन के चलते कंपनी का काम पूर्णतया बंद है। कंपनी से अप्रैल का भुगतान भी नहीं मिला। स्पेशल ट्रेन के लिए वह सरकार के आभारी हैं।
पंजाब के जिला महोली के मुबारकपुर में रहकर मेहनत मजदूरी करने वाले संडीला के ग्राम जाजमऊ निवासी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि वह पत्नी और बच्चे के साथ पंजाब में रह रहे थे। लॉकडाउन लगने के बाद काम मिलना और घर से निकलना बंद हो गया। डेढ़ महीना काफी परेशानी में बीता। ट्रेन न चलती तो परेशानियों का बढ़ना तय था। देर से ही सही घर वापसी हो रही है।