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Hardoi News: लेखपालों ने किया कार्यबहिष्कार, लोगों को दिक्कतें
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फोटो-06- सदर तहसील में प्रदर्शन करते लेखपाल। संवाद
हरदोई। वेतनमान और वाहन भत्ता आदि में बढ़ोतरी सहित अन्य मांगों पर शासन की तरफ से सकारात्मक निर्णय न लिए जाने से आक्रोशित लेखपालों ने शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस सहित कार्य बहिष्कार किया। तहसीलों पर धरना-प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपे।
उप्र लेखपाल संघ के आह्वान पर लेखपाल संघ की जिला इकाई और तहसील शाखा के पदाधिकारी और लेखपालों ने शनिवार को अपनी-अपनी तहसीलों में प्रदर्शन किया। आक्रोशित लेखपालों ने नारेबाजी की। लेखपाल संघ के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष राहुल सिंह और मंत्री संजीव यादव ने शुक्रवार को अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा कि लेखपाल संवर्ग 10 साल से अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं लेकिन परिषद, शासन और सरकार की तरफ से कोई सार्थक निर्णय नहीं लिया जा रहा है। 14 सितंबर को दिए गए ज्ञापन और 22 सितंबर को अतिरिक्त क्षेत्रों के बस्ते जमा किए जाने के बाद भी शासन ने कोई ध्यान नहीं दिया है। बताया कि 10 साल से लेखपालों की प्रारंभिक वेतनमान 2,800 ग्रेडपे की मांग और वेतन विसंगति को दूर नहीं किया गया। आठ साल से लेखपालों का अंतर मंडलीय स्थानांतरण नहीं किया जा रहा है। दो साल से पदोन्नति सूची और 16 साल से भत्ते में बढ़ोतरी न किए जाने से लेखपाल आहत हैं। इस मौके पर बड़ी संख्या में लेखपाल मौजूद रहे।
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खसरा मिले नहीं, आय-जाति और निवास प्रमाण पत्र पर नहीं लगी रिपोर्ट
लेखपालों के कार्य बहिष्कार से शनिवार को किसानों को खसरा की नकल नहीं मिल सकी जबकि खतौनी को किसानों ने ऑनलाइन प्राप्त किया जबकि आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र के लिए किए गए ऑनलाइन आवेदनों पर कार्य बहिष्कार के चलते लेखपालों ने रिपोर्ट नहीं लगाई। इससे जरूरतमंदों के आवेदनों पर रिपोर्ट लगाने में एक दिन की देरी हुई।
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उप्र लेखपाल संघ के आह्वान पर लेखपाल संघ की जिला इकाई और तहसील शाखा के पदाधिकारी और लेखपालों ने शनिवार को अपनी-अपनी तहसीलों में प्रदर्शन किया। आक्रोशित लेखपालों ने नारेबाजी की। लेखपाल संघ के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष राहुल सिंह और मंत्री संजीव यादव ने शुक्रवार को अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।
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ज्ञापन में कहा कि लेखपाल संवर्ग 10 साल से अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं लेकिन परिषद, शासन और सरकार की तरफ से कोई सार्थक निर्णय नहीं लिया जा रहा है। 14 सितंबर को दिए गए ज्ञापन और 22 सितंबर को अतिरिक्त क्षेत्रों के बस्ते जमा किए जाने के बाद भी शासन ने कोई ध्यान नहीं दिया है। बताया कि 10 साल से लेखपालों की प्रारंभिक वेतनमान 2,800 ग्रेडपे की मांग और वेतन विसंगति को दूर नहीं किया गया। आठ साल से लेखपालों का अंतर मंडलीय स्थानांतरण नहीं किया जा रहा है। दो साल से पदोन्नति सूची और 16 साल से भत्ते में बढ़ोतरी न किए जाने से लेखपाल आहत हैं। इस मौके पर बड़ी संख्या में लेखपाल मौजूद रहे।
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खसरा मिले नहीं, आय-जाति और निवास प्रमाण पत्र पर नहीं लगी रिपोर्ट
लेखपालों के कार्य बहिष्कार से शनिवार को किसानों को खसरा की नकल नहीं मिल सकी जबकि खतौनी को किसानों ने ऑनलाइन प्राप्त किया जबकि आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र के लिए किए गए ऑनलाइन आवेदनों पर कार्य बहिष्कार के चलते लेखपालों ने रिपोर्ट नहीं लगाई। इससे जरूरतमंदों के आवेदनों पर रिपोर्ट लगाने में एक दिन की देरी हुई।