{"_id":"6a90772fbe0b70827c0d78c0","slug":"last-years-record-broken-with-4638-mm-of-rainfall-in-august-hardoi-news-c-12-1-knp1086-1632142-2026-08-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: अगस्त में 463.8 मिमी बारिश के साथ टूटा पिछले साल का रिकॉर्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: अगस्त में 463.8 मिमी बारिश के साथ टूटा पिछले साल का रिकॉर्ड
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरदोई। जिले में मानसून की बारिश ने इस बार जमकर भिगोया है। पूरे अगस्त में इस बार जबरदस्त बारिश हुई। इससे बीते साल अगस्त का रिकॉर्ड टूट चुका है जबकि माह समाप्त होने में अभी भी तीन दिन बाकी हैं। बृहस्पतिवार को भी शाम पांच बजे तक बीते 24 घंटे में 79.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके साथ ही इस साल अगस्त में अब तक कुल बारिश का आंकड़ा 463.8 मिलीमीटर तक पहुंच गया है।
बुधवार रात से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला बृहस्पतिवार शाम तक थम-थमकर जारी रहा। एक तरफ इस मूसलाधार बारिश ने लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दिलाई। वहीं दूसरी ओर शहर की व्यवस्थाओं की पोल भी खोल कर रख दी। लगातार बारिश से शहरभर में जलभराव हो गया। सड़कों पर पानी भरने के कारण वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में मशक्कत करनी पड़ी। कई स्थानों पर नालियों का पानी सड़कों पर बहता दिखाई दिया जिससे स्थानीय लोग घंटों घरों में कैद रहे। साथ ही व्यापारियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। रक्षाबंधन को लेकर सजाई गई अस्थायी दुकानें भारी बारिश में अस्त-व्यस्त हो गईं।
मौसम वेधशाला प्रेक्षक आरसी वर्मा ने बताया कि शहर में बीते 24 घंटे में तो 79.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। साथ ही इस झमाझम बारिश से पूरे महीने का कुल आंकड़ा 463.8 मिमी पहुंच गया है। पिछले साल के आंकड़ों की बात करें तो पूरे अगस्त में 369.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी। इस बार बारिश ने पिछले साल का रिकॉर्ड काफी अंतर से पीछे छोड़ दिया है।
विज्ञापन
बारिश से पारे में आई कमी
लगातार हो रही बारिश के चलते तापमान में भी कमी दर्ज की गई। वेधशाला प्रेक्षक ने बताया बृहस्पतिवार को दिनभर बादल छाए रहे। अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री और न्यूनतम 21.5 डिग्री दर्ज किया गया। सुबह के समय आर्द्रता 100 और शाम को 95 प्रतिशत रही।
इमरजेंसी के बाहर जलभराव, मरीज परेशान
बारिश की रफ्तार ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन की भी जल निकासी के दावों की भी पोल खोल दी। अस्पताल परिसर और इमरजेंसी वार्ड के मुख्य द्वार पर भारी जलभराव हो गया है। पानी भरा होने की वजह से मरीजों को इमरजेंसी और अन्य विभागों तक लाने ले जाने में तीमारदारों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। लोगों को भरे पानी से होकर निकलना पड़ा। सबसे ज्यादा समस्या स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर आने वाले गंभीर मरीजों और उनके तीमारदारों को उठानी पड़ रही है।
विज्ञापन
बुधवार रात से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला बृहस्पतिवार शाम तक थम-थमकर जारी रहा। एक तरफ इस मूसलाधार बारिश ने लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दिलाई। वहीं दूसरी ओर शहर की व्यवस्थाओं की पोल भी खोल कर रख दी। लगातार बारिश से शहरभर में जलभराव हो गया। सड़कों पर पानी भरने के कारण वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में मशक्कत करनी पड़ी। कई स्थानों पर नालियों का पानी सड़कों पर बहता दिखाई दिया जिससे स्थानीय लोग घंटों घरों में कैद रहे। साथ ही व्यापारियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। रक्षाबंधन को लेकर सजाई गई अस्थायी दुकानें भारी बारिश में अस्त-व्यस्त हो गईं।
विज्ञापन
मौसम वेधशाला प्रेक्षक आरसी वर्मा ने बताया कि शहर में बीते 24 घंटे में तो 79.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। साथ ही इस झमाझम बारिश से पूरे महीने का कुल आंकड़ा 463.8 मिमी पहुंच गया है। पिछले साल के आंकड़ों की बात करें तो पूरे अगस्त में 369.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी। इस बार बारिश ने पिछले साल का रिकॉर्ड काफी अंतर से पीछे छोड़ दिया है।
विज्ञापन
बारिश से पारे में आई कमी
लगातार हो रही बारिश के चलते तापमान में भी कमी दर्ज की गई। वेधशाला प्रेक्षक ने बताया बृहस्पतिवार को दिनभर बादल छाए रहे। अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री और न्यूनतम 21.5 डिग्री दर्ज किया गया। सुबह के समय आर्द्रता 100 और शाम को 95 प्रतिशत रही।
इमरजेंसी के बाहर जलभराव, मरीज परेशान
बारिश की रफ्तार ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन की भी जल निकासी के दावों की भी पोल खोल दी। अस्पताल परिसर और इमरजेंसी वार्ड के मुख्य द्वार पर भारी जलभराव हो गया है। पानी भरा होने की वजह से मरीजों को इमरजेंसी और अन्य विभागों तक लाने ले जाने में तीमारदारों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। लोगों को भरे पानी से होकर निकलना पड़ा। सबसे ज्यादा समस्या स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर आने वाले गंभीर मरीजों और उनके तीमारदारों को उठानी पड़ रही है।