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Hardoi News: शिक्षकों की कमी बन रही पढ़ाई में बाधा
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संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को संसाधन पूर्ण कराने के लिए विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे है, मगर विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की समस्या सारे उपाय पर भारी पड़ रही है। शिक्षकों के कमी के कारण विद्यालय में शिक्षण कार्य में बाधा आ रही है।
जिले में 55 राजकीय माध्यमिक विद्यालय संचालित है। विद्यालयों में संसाधनाें को बेहतर करने के लिए विभाग की ओर से विभिन्न कार्य योजनाएं तैयार की जा रही है ताकि विद्यालय के विद्यार्थियों को बेहतर व्यवस्थाएं मिल सके। मगर राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी ओर कोई ध्यान नहीं जा रहा है।
विद्यालय में शिक्षकों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। शहर में संचालित राजकीय इंटर कालेज जो अन्य सभी विद्यालयों के लिए माॅडल है। विद्यालय में वर्तमान में 1983 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, मगर विद्यालय में विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षक ही नहीं है। विद्यालय में 12 प्रवक्ता के पद है, जिसमें मात्र चार तैनात हैं, वहीं एलटी ग्रेड के 26 पद है, जिसमें सापेक्ष मात्र 12 की तैनाती है। इससे विद्यालय में शिक्षण कार्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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इन विषयों के नहीं है प्रवक्ता-
राजकीय इंटर कालेज में वर्तमान में भौतिक विज्ञान, अंग्रेजी, संस्कृत और इतिहास विषय के प्रवक्ता तैनात है। विद्यालय में हिंदी, गणित, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, अर्थ शास्त्र, भूगोल, नागरिक शास्त्र और उर्दू के प्रवक्ता के पद रिक्त चल रहे है। वहीं एल टी ग्रेडक के 14 पद रिक्त है।
अतिथि प्रवक्ता का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में -
जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर राजकीय विद्यालयों में अतिथि प्रवक्ता की तैनाती की कार्य योजना बनाई गई थी, जिसमें शिक्षित युवाओं से निशुल्क शिक्षण कार्य कराने की व्यवस्था थी। शिक्षक स्वेच्छा से अपनी निशुल्क सेवा दे सकते थे।
इंसेट
विद्यालय में शिक्षकों की कमी है। शिक्षकों की कमी को देखते हुए छह शिक्षकों को अभिभावक संघ की ओर से लगाया गया है। शिक्षकों का विवरण समय-समय पर विभाग को उपलब्ध कराया जाता रहताहै।
टीआर वर्मा, प्रधानाचार्य
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हरदोई। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को संसाधन पूर्ण कराने के लिए विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे है, मगर विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की समस्या सारे उपाय पर भारी पड़ रही है। शिक्षकों के कमी के कारण विद्यालय में शिक्षण कार्य में बाधा आ रही है।
जिले में 55 राजकीय माध्यमिक विद्यालय संचालित है। विद्यालयों में संसाधनाें को बेहतर करने के लिए विभाग की ओर से विभिन्न कार्य योजनाएं तैयार की जा रही है ताकि विद्यालय के विद्यार्थियों को बेहतर व्यवस्थाएं मिल सके। मगर राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी ओर कोई ध्यान नहीं जा रहा है।
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विद्यालय में शिक्षकों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। शहर में संचालित राजकीय इंटर कालेज जो अन्य सभी विद्यालयों के लिए माॅडल है। विद्यालय में वर्तमान में 1983 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, मगर विद्यालय में विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षक ही नहीं है। विद्यालय में 12 प्रवक्ता के पद है, जिसमें मात्र चार तैनात हैं, वहीं एलटी ग्रेड के 26 पद है, जिसमें सापेक्ष मात्र 12 की तैनाती है। इससे विद्यालय में शिक्षण कार्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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इन विषयों के नहीं है प्रवक्ता-
राजकीय इंटर कालेज में वर्तमान में भौतिक विज्ञान, अंग्रेजी, संस्कृत और इतिहास विषय के प्रवक्ता तैनात है। विद्यालय में हिंदी, गणित, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, अर्थ शास्त्र, भूगोल, नागरिक शास्त्र और उर्दू के प्रवक्ता के पद रिक्त चल रहे है। वहीं एल टी ग्रेडक के 14 पद रिक्त है।
अतिथि प्रवक्ता का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में -
जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर राजकीय विद्यालयों में अतिथि प्रवक्ता की तैनाती की कार्य योजना बनाई गई थी, जिसमें शिक्षित युवाओं से निशुल्क शिक्षण कार्य कराने की व्यवस्था थी। शिक्षक स्वेच्छा से अपनी निशुल्क सेवा दे सकते थे।
इंसेट
विद्यालय में शिक्षकों की कमी है। शिक्षकों की कमी को देखते हुए छह शिक्षकों को अभिभावक संघ की ओर से लगाया गया है। शिक्षकों का विवरण समय-समय पर विभाग को उपलब्ध कराया जाता रहताहै।
टीआर वर्मा, प्रधानाचार्य