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मवेशियों मे खुरपका मुंहपका का बढ़ रहा संक्रमण, पशुपालक परेशान
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बिलग्राम। पशुओं में खुरपका व मुंहपका जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। इससे परेशान पशुपालकों ने टीकाकरण कराने की मांग की है। वहीं जिम्मेदार वैक्सीन आने पर टीकाकरण अभियान चलाने की बात कह रहे हैं।
बारिश के बाद मवेशियों में मुंहपका व खुरपका जैसे रोग तेजी से फैलने लगे हैं। कुछ दिन में ऐसे दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने पर यह रोग मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि दो साल से मवेशियों का टीकाकरण नहीं कराया गया है। ग्राम रहुला, गनीपुर व गदुआपुर समेत अन्य गांवों में गाय, बकरी, भैंस, बैलों को यह रोग तेजी से चपेट में ले रहा है। पशु पालकों के मुताबिक बीमार मवेशियों ने दाना पानी लेना बंद कर दिया है। यह रोग उनके लिए जानलेवा हो चला है। पशुपालकों ने सरकार से मवेशियों का टीकाकरण कराने की मांग की है।
इलाज में काफी रुपये खर्च
- रहुला गांव निवासी रहीस अली ने बताया कि उन्होंने बैलों की जोड़ी पाल रखी है। बैलों को खुरपका व मुंहपका रोग हो गया है। निजी चिकित्सकों से मवेशियों का इलाज करा रहे हैं। काफी रुपये खर्च हो रहे हैं।
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- निसार मंसूरी ने बताया कि उनकी भैंस को पहले बुखार आया और बाद में उसने चारा खाना बंद कर दिया। भैंस के मुंह से लार भी टपक रही है। बताया कि निजी चिकित्सक से इलाज करा रहे हैं। काफी रुपये लग चुके हैं, लेकिन अब तक मवेशी ठीक नहीं हुआ है।
- एक पशु पालक ने बताया कि बैलों के खुर पकने के बाद उसमें कीड़े पड़ गए हैं, सरकारी चिकित्सालय में चिकित्सकों के बैठने का कोई समय निर्धारित नहीं है। इसलिए निजी चिकित्सक से मवेशियों का इलाज करा रहे हैं।
कोरोना काल में टूटी टीकाकरण की चेन
पशु चिकित्सा अधिकारी विमल कुमार ने बताया कि कोरोना काल में पशुओं का टीकाकरण नहीं हो पाया। जिसके कारण खुरपका व मुंहपका जैसे रोग मवेशियों को चपेट में ले रहे हैं। पशु पालकों से अपील है कि सावधानी बरतें। यह संक्रामक रोग है, एक मवेशी से दूसरे मवेशी में फैलता है। अगर किसी पशु में इस रोग के लक्षण दिखाई दें तो पशु पालक चिकित्सक से राय लेकर उसका इलाज कराएं। बताया कि अभी तक पशु चिकित्सालय में वैक्सीन उपलब्ध नहीं हुई हैं। वैक्सीन मिलने पर अभियान चलाकर पशुओं का टीकाकरण किया जाएगा।
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बारिश के बाद मवेशियों में मुंहपका व खुरपका जैसे रोग तेजी से फैलने लगे हैं। कुछ दिन में ऐसे दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने पर यह रोग मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि दो साल से मवेशियों का टीकाकरण नहीं कराया गया है। ग्राम रहुला, गनीपुर व गदुआपुर समेत अन्य गांवों में गाय, बकरी, भैंस, बैलों को यह रोग तेजी से चपेट में ले रहा है। पशु पालकों के मुताबिक बीमार मवेशियों ने दाना पानी लेना बंद कर दिया है। यह रोग उनके लिए जानलेवा हो चला है। पशुपालकों ने सरकार से मवेशियों का टीकाकरण कराने की मांग की है।
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इलाज में काफी रुपये खर्च
- रहुला गांव निवासी रहीस अली ने बताया कि उन्होंने बैलों की जोड़ी पाल रखी है। बैलों को खुरपका व मुंहपका रोग हो गया है। निजी चिकित्सकों से मवेशियों का इलाज करा रहे हैं। काफी रुपये खर्च हो रहे हैं।
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- निसार मंसूरी ने बताया कि उनकी भैंस को पहले बुखार आया और बाद में उसने चारा खाना बंद कर दिया। भैंस के मुंह से लार भी टपक रही है। बताया कि निजी चिकित्सक से इलाज करा रहे हैं। काफी रुपये लग चुके हैं, लेकिन अब तक मवेशी ठीक नहीं हुआ है।
- एक पशु पालक ने बताया कि बैलों के खुर पकने के बाद उसमें कीड़े पड़ गए हैं, सरकारी चिकित्सालय में चिकित्सकों के बैठने का कोई समय निर्धारित नहीं है। इसलिए निजी चिकित्सक से मवेशियों का इलाज करा रहे हैं।
कोरोना काल में टूटी टीकाकरण की चेन
पशु चिकित्सा अधिकारी विमल कुमार ने बताया कि कोरोना काल में पशुओं का टीकाकरण नहीं हो पाया। जिसके कारण खुरपका व मुंहपका जैसे रोग मवेशियों को चपेट में ले रहे हैं। पशु पालकों से अपील है कि सावधानी बरतें। यह संक्रामक रोग है, एक मवेशी से दूसरे मवेशी में फैलता है। अगर किसी पशु में इस रोग के लक्षण दिखाई दें तो पशु पालक चिकित्सक से राय लेकर उसका इलाज कराएं। बताया कि अभी तक पशु चिकित्सालय में वैक्सीन उपलब्ध नहीं हुई हैं। वैक्सीन मिलने पर अभियान चलाकर पशुओं का टीकाकरण किया जाएगा।