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हरदोई : बारिश न होने से खरीफ की फसल प्रभावित

Fri, 15 Jul 2022 11:42 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 15 Jul 2022 11:42 PM IST
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kharif crop effected due to no rain
हरदोई। इस बार किसानों को मानसून ने निराश किया है। बारिश न होने से खरीफ फसलों की बुआई व रोपाई पिछड़ गई है। सिंचाई के लिए किसानों को अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करनी पड़ रही है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि पानी की कमी से फसलों की गुणवत्ता के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।
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30 जून को 138 मिमी बारिश हुई थी।
इससे किसानों को अच्छी बारिश की उम्मीद थी लेकिन इसके बाद अब तक सिर्फ 13 मिमी पानी बरसा है। इससे जिले में खरीफ फसलों के लिए निर्धारित लक्ष्य 2,61,567 हेक्टेयर के सापेक्ष जून में करीब 12 प्रतिशत क्षेत्रफल में ही बोआई और रोपाई हो पाई थी। पांच जुलाई तक लक्ष्य के सापेक्ष करीब 40 फीसदी बुआई व रोपाई हुई। जबकि खरीफ फसलों के आदर्श समय के अनुसार 15 जून से 5 जुलाई के बीच 60 फीसदी बुआई व रोपाई हो जानी चाहिए। मानसून की सुस्ती से 20 फीसदी लक्ष्य पीछे हो गया।
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किसानों ने कहा, पंपिंग सेट से पानी की व्यवस्था नाकाफी
बेहंदर, सांडी, हरपालपुर, बिलग्राम क्षेत्र के किसान रामदास, सर्वेश, सुरेश यादव, रामचंदर, कल्लू ने बताया कि इस बार पानी की समस्या के कारण बुआई पर असर पड़ा है। क्षेत्र में अभी 50 प्रतिशत किसान धान की रोपाई नहीं कर पाए हैं। अन्य फसलों के लिए भी पानी की कमी खल रही है। निजी नलकूपों और पंपिंग सेट से पानी की व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है, क्योंकि अधिकांश क्षेत्रों में खेतों में तरी करने में काफी दिक्कतें आ रही हैं।
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खरीफ के लिए औसत वर्षा मानक
माह औसत बारिश बारिश हुई
जून 74 मिमी 155.4 मिमी
जुलाई 271 मिमी 13 मिमी (14 जुलाई तक)
अगस्त 249 मिमी
सितंबर 127 मिमी
लक्ष्य हेक्टेयर
धान : 1,54,351
मक्का : 38,254
ज्वार : 5710
बाजरा : 3619
उर्द : 22,184
मूंग : 289
अरहर : 1852
मूंगफली : 12,890
तिल : 23,415
सोयाबीन : दो
20 फीसदी पिछड़ी बुआई
शत प्रतिशत लक्ष्य का समय, 31 जुलाई
हो चुकी बुआई व रोपाई, 40 फीसदी
अब तक हो जानी चाहिए थी 60 फीसदी
- पिछड़ी बुआई व रोपाई, 20 फीसदी
- शेष 60 फीसदी
- बारिश न होने से बुआई पिछड़ी है। किसानों को दिक्कत हो रही है। 31 जुलाई तक बुआई-रोपाई का लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद है। -उमेश साहू, जिला कृषि अधिकारी
- बारिश न होने का सबसे ज्यादा असर धान की रोपाई पर पड़ा है। 20 फीसदी से अधिक बुआई-रोपाई पिछड़ चुकी है। ऐसे में किसानों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। जहां नहरें एवं राजकीय नलकूप नहीं हैं, वहां सिंचाई के लिए ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है। - डॉ. सीपीएन गौतम, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र

- खरीफ की फसलों के लिए औसत बारिश न होने पर निजी संसाधनों से पानी की व्यवस्था करने के बाद भी प्राकृतिक रूप से पोषण एवं वातावरण नहीं मिल पाता है। बारिश न होने से वातावरण में उमस बढ़ी है। इसका असर खेती पर भी पड़ रहा है।- रमेश चंद्र, पर्यवेक्षक, मौसम वेधशाला
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