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पत्थर उछलने से काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस के कई यात्री घायल
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
Updated Sat, 13 Feb 2016 01:08 AM IST
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रेलवे का सफर लापरवाह अधिकारियों की वजह से सुरक्षित नहीं रह गया है। संडीला रेलवे स्टेशन के जिम्मेदार अधिकारी ने पटरियों के किनारे पत्थर तो डलवा दिए लेकिन उन्हें बराबर नहीं कराया। गुरुवार को दिल्ली जा रही काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस के गुजरने के दौरान वह ढेर से टकराती रही, जिससे कुछ पत्थर उछलकर यात्रियों को लगते रहे। तमाम यात्री चुटहिल हो गए। शोर शराबे के बाद ड्राइवर को ट्रेन भी रोकनी पड़ी। इसके बाद जांच कर 20 मिनट बाद ट्रेन को रवाना किया गया।
लखनऊ से चलकर दिल्ली जा रही अप रूट की 14257 काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस गुरुवार की रात करीब 9:40 बजे संडीला के दिलावरनगर रेलवे स्टेशन के समीप पहुंची थी कि तभी पटरियों के किनारे पड़े पत्थर उछलने लगे। ट्रेन की रफ्तार अधिक थी ऐसे में पत्थर उछलकर जनरल कोच में बैठे यात्रियों को लगने लगे। कई यात्री चुटहिल हो गए। पत्थरों की बौछार को देखकर यात्रियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया, जिसको सुनकर ड्राइवर ने ट्रेन रोक दी।
यात्रियों का शोर सुनकर ट्रेन में तैनात जीआरपी और आरपीएफ सिपाही व गार्ड जनरल कोच के पास पहुंचे। जहां कुछ यात्रियों को लहुलुहान देखा तो उनको मौके पर ही फर्स्ट-एड दिया गया। इसके बाद पूरी ट्रेन का निरीक्षण किया गया। ट्रेन में तो कोई खराबी नहीं पायी गई लेकिन जब लाइन किनारे लगे पत्थरों के ढेर को देखा गया तो वह लोग सारा माजरा समझ गए। गार्ड ने वायरलेस से संडीला स्टेशन के अधिकारियों को जानकारी दी। जिससे वहां से रेल पंथ इंजीनियर मौके पर पहुंचे और जांच की। जांच पूरी होने के 20 मिनट बाद ट्रेन को रवाना किया गया।
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गलती से ऊंचाई में पड़ गए पत्थर
रेल पथ इंजीनियर पीके द्विवेदी ने कहा कि डीएमटी ट्रेन से लाइन किनारे गिट्टियां डाली जाती हैं जिनको बाद में बराबर कर दिया जाता है। डीएमटी ट्रेन से कहीं कम तो कहीं अधिक ऊंचाई तक पत्थर डाल दिए गए लेकिन उन्हें अंधेरा हो जाने की वजह से बराबर नहीं किया जा सका। जिसकी वजह से वह ट्रेन से टकराते रहे और यात्रियों को लग गए।
पत्थर गिराने में हुई लापरवाही
आरपीएफ के प्रभारी सरबजीत यादव ने बताया कि डीएमटी गिराने मे लापरवाही बरती गई है। जिसकी वजह से पत्थर ऊंचे होने के कारण उछल गए और हड़कंप मच गया। चूंकि पत्थर डालने का काम रेलवे के वरिष्ठ खंड अभियंता रेलपथ के अधीनस्थ कराया गया है। जबकि रेलवे ट्रैक में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं पाई गई।
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लखनऊ से चलकर दिल्ली जा रही अप रूट की 14257 काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस गुरुवार की रात करीब 9:40 बजे संडीला के दिलावरनगर रेलवे स्टेशन के समीप पहुंची थी कि तभी पटरियों के किनारे पड़े पत्थर उछलने लगे। ट्रेन की रफ्तार अधिक थी ऐसे में पत्थर उछलकर जनरल कोच में बैठे यात्रियों को लगने लगे। कई यात्री चुटहिल हो गए। पत्थरों की बौछार को देखकर यात्रियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया, जिसको सुनकर ड्राइवर ने ट्रेन रोक दी।
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यात्रियों का शोर सुनकर ट्रेन में तैनात जीआरपी और आरपीएफ सिपाही व गार्ड जनरल कोच के पास पहुंचे। जहां कुछ यात्रियों को लहुलुहान देखा तो उनको मौके पर ही फर्स्ट-एड दिया गया। इसके बाद पूरी ट्रेन का निरीक्षण किया गया। ट्रेन में तो कोई खराबी नहीं पायी गई लेकिन जब लाइन किनारे लगे पत्थरों के ढेर को देखा गया तो वह लोग सारा माजरा समझ गए। गार्ड ने वायरलेस से संडीला स्टेशन के अधिकारियों को जानकारी दी। जिससे वहां से रेल पंथ इंजीनियर मौके पर पहुंचे और जांच की। जांच पूरी होने के 20 मिनट बाद ट्रेन को रवाना किया गया।
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गलती से ऊंचाई में पड़ गए पत्थर
रेल पथ इंजीनियर पीके द्विवेदी ने कहा कि डीएमटी ट्रेन से लाइन किनारे गिट्टियां डाली जाती हैं जिनको बाद में बराबर कर दिया जाता है। डीएमटी ट्रेन से कहीं कम तो कहीं अधिक ऊंचाई तक पत्थर डाल दिए गए लेकिन उन्हें अंधेरा हो जाने की वजह से बराबर नहीं किया जा सका। जिसकी वजह से वह ट्रेन से टकराते रहे और यात्रियों को लग गए।
पत्थर गिराने में हुई लापरवाही
आरपीएफ के प्रभारी सरबजीत यादव ने बताया कि डीएमटी गिराने मे लापरवाही बरती गई है। जिसकी वजह से पत्थर ऊंचे होने के कारण उछल गए और हड़कंप मच गया। चूंकि पत्थर डालने का काम रेलवे के वरिष्ठ खंड अभियंता रेलपथ के अधीनस्थ कराया गया है। जबकि रेलवे ट्रैक में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं पाई गई।