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कंस के मरते ही हुई फूलों की वर्षा
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हरपालपुर। क्षेत्र के उमरौली-जैतपुर गांव में नव निर्मित शिव मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को आचार्य शिव सागर ने श्रीकृष्ण का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि खेल-खेल में ही अघासुर,वकासुर,पूतना का वध व कालिया नाग के घमंड को चूर किए जाने की जानकारी मिलने के बाद कंस ने नंद बाबा समेत श्रीकृष्ण को धनुष यज्ञ में बुलावा भेजा।
यद्यपि नंद कंस के अत्याचारों से दुखी और श्रीकृष्ण को मारने का बार बार उपाय करते समझ कंस के पास जाना नहीं चाहते थे, लेकिन राजाज्ञा से मजबूर गोप गणों के साथ वह मथुरा पहुंचे।
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जहां सिंहासनारूढ़ अत्याचारी कंस को देख अपनी माता देवकी को बालों से पकड़ कर रथ से खींचने की बात याद कर श्रीकृष्ण ने कंस के बालों को पकड़ कर सिंहासन से नीचे गिरा लिया।
बलराम ने ग्वाल वालों के साथ मिलकर कंस के सैनिकों को हताहत कर दिया।
इसी दौरान श्रीकृष्ण ने कंस को मल्ल युद्ध मे पछाड़ कर मार डाला। कथा के दौरान महेश चंद्र शुक्ल, अवधेश शुक्ल, संतोष कुमार, सदन, सौरभ, मुन्नालाल, ओम जी, नत्थू मिश्रा, कन्हैया मिश्रा, राजू अग्निहोत्री, रामशरण अग्निहोत्री, साश्वत मिश्रा समेत कई लोग मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि खेल-खेल में ही अघासुर,वकासुर,पूतना का वध व कालिया नाग के घमंड को चूर किए जाने की जानकारी मिलने के बाद कंस ने नंद बाबा समेत श्रीकृष्ण को धनुष यज्ञ में बुलावा भेजा।
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यद्यपि नंद कंस के अत्याचारों से दुखी और श्रीकृष्ण को मारने का बार बार उपाय करते समझ कंस के पास जाना नहीं चाहते थे, लेकिन राजाज्ञा से मजबूर गोप गणों के साथ वह मथुरा पहुंचे।
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जहां सिंहासनारूढ़ अत्याचारी कंस को देख अपनी माता देवकी को बालों से पकड़ कर रथ से खींचने की बात याद कर श्रीकृष्ण ने कंस के बालों को पकड़ कर सिंहासन से नीचे गिरा लिया।
बलराम ने ग्वाल वालों के साथ मिलकर कंस के सैनिकों को हताहत कर दिया।
इसी दौरान श्रीकृष्ण ने कंस को मल्ल युद्ध मे पछाड़ कर मार डाला। कथा के दौरान महेश चंद्र शुक्ल, अवधेश शुक्ल, संतोष कुमार, सदन, सौरभ, मुन्नालाल, ओम जी, नत्थू मिश्रा, कन्हैया मिश्रा, राजू अग्निहोत्री, रामशरण अग्निहोत्री, साश्वत मिश्रा समेत कई लोग मौजूद रहे।