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लताजी से प्रेरित हो शुरू किया था संगीत विद्यालय
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हरदोई। देश की धरोहर भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर के निधन की खबर के बाद हरदोई भी शोक में डूबा है। यहां कला प्रेमियों में उनके संस्मरण याद किए जा रहे हैं।
कई संगीत प्रेमी ऐसे भी हैं जो उनसे मिले तो कभी नहीं, लेकिन पूरी जिंदगी उनसे ही प्रेरित होते रहे। इन्हीं में एक नाम है मनोज अग्रवाल का। मनोज बचपन से ही लता दीदी की आवाज के कायल रहे।
उनको सुनकर बड़े हुए और अपने जीवन को उनके नाम समर्पित कर दिया। 25 वर्ष पहले उन्होंने लताजी से प्रेरित होकर अपना एक संगीत विद्यालय शुरू किया। वह खुद भी नए गायकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।
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स्वरों की मल्लिका लता दीदी के जाने की तकलीफ यहां कला प्रेमियों के लिए बर्दाश्त करना सहज नहीं हो रहा। जिले की तमाम संगीत क्षेत्र की हस्तियों ने उनके जाने को संगीत की दुनिया में अपूर्णीय क्षति बताया है।
दूरदर्शन कलाकार वेद ऋचा श्रीवास्तव ने उनके निधन को एक युग का अंत माना है। उन्होंने एक शोकसभा कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
शोकसभा में सर्वोत्तम श्रीवास्तव, रामआसरे, शैलेंद्र सिंह, प्रफुल्ल मिश्रा, मोहम्मद शाह, सर्वेश कुमार, रामबहोरन, रतनेश यादव ने दो मिनट का मौन रखकर शोक जताया।
सभी गायकों की तरह मेरे लिए भी उनका संगीत बेहद प्रिय रहा है। मेरा पूरा जीवन उनसे प्रेरित है। जब भी समय मिलता है, उनके द्वारा गाए हुए गीतों को सुनता और गुनगुनाता हूं।
- मनोज अग्रवाल, संगीत शिक्षक
सुर साम्राज्ञी लता जी का निधन ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई असंभव है। उनका जाना हर किसी का व्यक्तिगत नुकसान है। निजी तौर पर वह मेरी सबसे पसंदीदा गायिका थीं।
- सुनील त्रिवेदी, सिंगर व एंकर
मुझ जैसे अनगिनत लोगों को उनके गीतों ने प्रभावित किया है। हमारे अंतर्मन पर अमिट छाप छोड़ी। उनके अंदर की भारतीयता उनके संगीत में झलकती थी। उनके जैसा व्यक्तित्व का अवतरण सदियों में होता है।
- सुमित श्रीवास्तव भानु, गायक
लताजी की आवाज अमर रहेगी, हमारे त्योहारों, संस्कारों, शुभ कार्यों, सीमाओं, वंदना, आराधना में, भावों की अभिव्यक्ति में... हर जगह, सर्वत्र। उनके स्वर से यह देश सदा गुंजायमान रहेगा।
-वंदना गुप्ता, लोक गायिका
संगीत जगत को नि:शब्द करके चली गईं लता जी। उनके गीत किसी भी गायिका के जीवन की प्रेरणा हैं। उनका जाना जैसी संगीत की दुनिया से सरगम का खो जाना है।
- स्मृति मिश्रा, गायिका
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कई संगीत प्रेमी ऐसे भी हैं जो उनसे मिले तो कभी नहीं, लेकिन पूरी जिंदगी उनसे ही प्रेरित होते रहे। इन्हीं में एक नाम है मनोज अग्रवाल का। मनोज बचपन से ही लता दीदी की आवाज के कायल रहे।
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उनको सुनकर बड़े हुए और अपने जीवन को उनके नाम समर्पित कर दिया। 25 वर्ष पहले उन्होंने लताजी से प्रेरित होकर अपना एक संगीत विद्यालय शुरू किया। वह खुद भी नए गायकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।
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स्वरों की मल्लिका लता दीदी के जाने की तकलीफ यहां कला प्रेमियों के लिए बर्दाश्त करना सहज नहीं हो रहा। जिले की तमाम संगीत क्षेत्र की हस्तियों ने उनके जाने को संगीत की दुनिया में अपूर्णीय क्षति बताया है।
दूरदर्शन कलाकार वेद ऋचा श्रीवास्तव ने उनके निधन को एक युग का अंत माना है। उन्होंने एक शोकसभा कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
शोकसभा में सर्वोत्तम श्रीवास्तव, रामआसरे, शैलेंद्र सिंह, प्रफुल्ल मिश्रा, मोहम्मद शाह, सर्वेश कुमार, रामबहोरन, रतनेश यादव ने दो मिनट का मौन रखकर शोक जताया।
सभी गायकों की तरह मेरे लिए भी उनका संगीत बेहद प्रिय रहा है। मेरा पूरा जीवन उनसे प्रेरित है। जब भी समय मिलता है, उनके द्वारा गाए हुए गीतों को सुनता और गुनगुनाता हूं।
- मनोज अग्रवाल, संगीत शिक्षक
सुर साम्राज्ञी लता जी का निधन ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई असंभव है। उनका जाना हर किसी का व्यक्तिगत नुकसान है। निजी तौर पर वह मेरी सबसे पसंदीदा गायिका थीं।
- सुनील त्रिवेदी, सिंगर व एंकर
मुझ जैसे अनगिनत लोगों को उनके गीतों ने प्रभावित किया है। हमारे अंतर्मन पर अमिट छाप छोड़ी। उनके अंदर की भारतीयता उनके संगीत में झलकती थी। उनके जैसा व्यक्तित्व का अवतरण सदियों में होता है।
- सुमित श्रीवास्तव भानु, गायक
लताजी की आवाज अमर रहेगी, हमारे त्योहारों, संस्कारों, शुभ कार्यों, सीमाओं, वंदना, आराधना में, भावों की अभिव्यक्ति में... हर जगह, सर्वत्र। उनके स्वर से यह देश सदा गुंजायमान रहेगा।
-वंदना गुप्ता, लोक गायिका
संगीत जगत को नि:शब्द करके चली गईं लता जी। उनके गीत किसी भी गायिका के जीवन की प्रेरणा हैं। उनका जाना जैसी संगीत की दुनिया से सरगम का खो जाना है।
- स्मृति मिश्रा, गायिका