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Hardoi News: ईरान में अपनों से नहीं हो पा रहा संपर्क मगर हिम्मत और हौसला बरकरार
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फोटो-27-अपनीं की खैरियत जानने के लिए काल करने की कोशिश करते जव्वाद हुसैन। संवाद
पिहानी। ईरान में रह रहे अपनों से संपर्क न हो पाने पर पिहानी के महमूदपुर, सरैयां और माफी के लोगों में हिम्मत और हौसला बरकरार है। जंग के हालात में रह रहे सगे संबंधियों को लेकर उनमें जरा भी दहशत नहीं है।
पश्चिम एशिया में जंगी हालात के बीच पिहानी नगर व क्षेत्र के कई परिवारों का हौसला मिसाल पेश कर रहा है।ईरान के खुम्स, तेहरान व मशहद आदि शहरों में मौजूद लोगों का संपर्क घर-परिवार से कटा हुआ है। वहां इंटरनेट बंद है। ऐसे में एक दूसरे की खैरियत लोग मालूम नहीं कर पा रहे। रविवार को संवाद न्यूज एजेंसी ने इन गांव के लोगों के बीच जाकर स्थिति जानी। ईरान में अपनों को लेकर उनमें कोई दहशत नहीं है। परिजनों का कहना है कि उन्हें अपनों की सलामती की चिंता से कहीं ज्यादा लीडर अयातुल्ला खामनेई की शहादत का गम और जालिम ताकतों के खिलाफ गुस्सा है।
सरैया सादात के मोहम्मद हसन पुत्र साजिद अली तेहरान में अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ रहकर आलिमत की पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं सगीरुल हसन पुत्र पेशवा हुसैन पिछले 10 वर्षों से सपरिवार वहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनके अलावा शाकिर अली, राहिल, सलमान और इबादर जैसे कई युवा इल्म की खातिर ईरान में हैं। इनके परिजनों ने कहा कि हम अहले कर्बला के मानने वाले हैं। जुल्म के आगे नहीं झुकेंगे। जंग में ईरानी सरकार और अपने रहनुमा के साथ हैं।
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खामेनेई की शहादत पर निकाला जुलूस, गम और गुस्से का इजहार
पिहानी। ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की शहादत को लेकर सरैयां आदत में जुलूस निकाल कर अमेरिका और इसराईल के खिलाफ नारेबाजी की गई। शामिल लोगों ने सुप्रीम लीडर खामनेई की तस्वीरों के साथ मजलूमों के समर्थन और जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद की। अवाम ने मातम करते हुए खामेनेई की शहादत को सलाम पेश किया और उनके फोटो लहराकर अमेरिका व इज़राइल मुर्दाबाद के नारे लगाए।
जुलूस का नेतृत्व करते हुए मौलाना सलमान ने खामेनेई की शहादत पर कहा कि मुजाहिद कभी पीठ नहीं दिखाते। खामेनेई साहब ने कभी अमेरिकी दादागीरी के आगे घुटने नहीं टेके। अमेरिकी धमकियों से डरे नहीं। करबला की तारीख गवाह है कि सत्तर साला बुजुर्ग क्या हमारे छ: माह के बच्चे के अंदर भी न केवल जज़्बा ए शहादत मौजूद होता है बल्कि शहीद होकर अमली नमूना भी पेश करना जानते हैं। जुलूस गांव की मुख्य सड़क से हैदरी हॉल में पहुंच कर संपन्न हो गया।
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पश्चिम एशिया में जंगी हालात के बीच पिहानी नगर व क्षेत्र के कई परिवारों का हौसला मिसाल पेश कर रहा है।ईरान के खुम्स, तेहरान व मशहद आदि शहरों में मौजूद लोगों का संपर्क घर-परिवार से कटा हुआ है। वहां इंटरनेट बंद है। ऐसे में एक दूसरे की खैरियत लोग मालूम नहीं कर पा रहे। रविवार को संवाद न्यूज एजेंसी ने इन गांव के लोगों के बीच जाकर स्थिति जानी। ईरान में अपनों को लेकर उनमें कोई दहशत नहीं है। परिजनों का कहना है कि उन्हें अपनों की सलामती की चिंता से कहीं ज्यादा लीडर अयातुल्ला खामनेई की शहादत का गम और जालिम ताकतों के खिलाफ गुस्सा है।
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सरैया सादात के मोहम्मद हसन पुत्र साजिद अली तेहरान में अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ रहकर आलिमत की पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं सगीरुल हसन पुत्र पेशवा हुसैन पिछले 10 वर्षों से सपरिवार वहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनके अलावा शाकिर अली, राहिल, सलमान और इबादर जैसे कई युवा इल्म की खातिर ईरान में हैं। इनके परिजनों ने कहा कि हम अहले कर्बला के मानने वाले हैं। जुल्म के आगे नहीं झुकेंगे। जंग में ईरानी सरकार और अपने रहनुमा के साथ हैं।
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खामेनेई की शहादत पर निकाला जुलूस, गम और गुस्से का इजहार
पिहानी। ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की शहादत को लेकर सरैयां आदत में जुलूस निकाल कर अमेरिका और इसराईल के खिलाफ नारेबाजी की गई। शामिल लोगों ने सुप्रीम लीडर खामनेई की तस्वीरों के साथ मजलूमों के समर्थन और जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद की। अवाम ने मातम करते हुए खामेनेई की शहादत को सलाम पेश किया और उनके फोटो लहराकर अमेरिका व इज़राइल मुर्दाबाद के नारे लगाए।
जुलूस का नेतृत्व करते हुए मौलाना सलमान ने खामेनेई की शहादत पर कहा कि मुजाहिद कभी पीठ नहीं दिखाते। खामेनेई साहब ने कभी अमेरिकी दादागीरी के आगे घुटने नहीं टेके। अमेरिकी धमकियों से डरे नहीं। करबला की तारीख गवाह है कि सत्तर साला बुजुर्ग क्या हमारे छ: माह के बच्चे के अंदर भी न केवल जज़्बा ए शहादत मौजूद होता है बल्कि शहीद होकर अमली नमूना भी पेश करना जानते हैं। जुलूस गांव की मुख्य सड़क से हैदरी हॉल में पहुंच कर संपन्न हो गया।

फोटो-27-अपनीं की खैरियत जानने के लिए काल करने की कोशिश करते जव्वाद हुसैन। संवाद