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Hardoi News: चेस्ट रोग के विभागाध्यक्ष गए पढ़ाने, जूनियर ताला डालकर टहल रहे

Thu, 12 Jun 2025 10:38 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 12 Jun 2025 10:38 PM IST
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Head of the department of Chest Diseases went to teach, Juniors were walking around after locking the door
हरदोई। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की ओपीडी में आए कई मरीजों काे बृहस्पतिवार को निराशा हाथ लगी। यह मरीज चेस्ट रोग विभाग में परामर्श और दवा लेने के लिए आए थे। यहां ताला पड़ा होने के कारण मरीजों और तीमारदारों को वापस जाना पड़ा। दरअसल, चेस्ट रोग के विभागाध्यक्ष बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज में क्लास लेने गए थे। ऐसे में उनके जूनियरों ने भी ओपीडी नहीं की।
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स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। शहर में मेडिकल कॉलेज खुले लंबा समय हो गया है, लेकिन मरीजों की दुश्वारियां कम नहीं हो रहीं। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला चिकित्सालय में क्षय रोग और चेस्ट रोग का उपचार करने के लिए व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो पा रही है। टीबी और चेस्ट विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शिवम गुप्ता हैं। वह सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को ही ओपीडी करते हैं। अन्य दिनों में ओपीडी जूनियर चिकित्सकों के हवाले रहती है। बृहस्पतिवार को डॉ. शिवम गुप्ता मेडिकल कॉलेज में पढ़ाने गए थे। उनकी गैर मौजूदगी में जूनियर चिकित्सक भी ओपीडी करने नहीं पहुंचे।
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केस-1- पचकोहरा निवासी वंदना चेस्ट फिजीशियन विभाग में उपचार कराने के लिए अपने पति के साथ पहुंचीं। उन्होंने बताया कि बुधवार को आए थे तो चिकित्सकों ने आज रिपोर्ट लाकर दिखाने को कहा। यहां आकर देखा तो ताला पड़ा हुआ है। कोई बताने वाला भी नहीं है। इतनी गर्मी में बार-बार दूर से आने में परेशानी होती है।
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केस-2- सुरसा निवासी रोली ने बताया कि वह भी टीबी की दवा लेने के लिए आई थीं। यहां आकर देखा तो कोई है नहीं और ताला पड़ा हुआ है। बताया कि अभी तक रोज ही मरीज देखे जा रहे थे, लेकिन अब आज आए हैं तो कोई डॉक्टर नहीं है। बताया कि काफी दिक्कत हो रही है और चिकित्सक न होने से इमरजेंसी में दिखाना पड़ेगा।





चेस्ट फिजीशियन विभाग में डॉ. शिवम गुप्ता के पास ओपीडी के साथ आईपीडी की भी जिम्मेदारी है। इसके अलावा वह मेडिकल कॉलेज में क्लास भी लेते हैं। जूनियर चिकित्सकों को उनकी गैरहाजिरी में ओपीडी करनी होती है। अगर जूनियर चिकित्सक भी नहीं थे तो यह बेहद गलत है। पूरी जानकारी कर इस मामले में संबंधित लोगों से बात की जाएगी। -डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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