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सरकारी स्कूलों का बदला वेष, कांवेंट छोड़ बच्चे ले रहे प्रवेश
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शहर निवासी व्यवसायी पुत्र यथार्थ का तिलक कर प्रवेश लेते प्रधानाचार्य रविंद्र सिंह। संवाद
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। अहिरोरी ब्लाक के महोनी में स्थित प्राथमिक स्कूल जहां अभिभावक निजी स्कूलों को छोड़कर अपने बच्चों का प्रवेश कर रहे हैं। प्रधानाध्यापक की मेहनत है कि यहां लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास जैसी हर वो सुविधाएं हैं जो पढ़ाई के मामले में निजी स्कूल के बराबर हैं। हाल में यहां व्यापारी और अनुदेशक ने भी अपने बच्चों का प्रवेश कराया है।
अहिरोरी ब्लाक के इस विद्यालय की स्थिति पहले ऐसी नहीं थी। वर्ष 2008 के पहले यह विद्यालय भी अन्य सरकारी विद्यालयों की लाइन में ही था। पंजीकरण 130 के करीब बच्चे रहा करते थे लेकिन स्कूल 30 से 40 बच्चे ही आते थे। बाउंड्रीवाल नहीं थी। स्कूल भी काफी जर्जर था लेकिन 2008 के अंत में ही रविंद्र सिंह के आने के बाद इस विद्यालय के दिन भी बहुरने लगे। आज स्थिति यह है कि यहां 155 बच्चे पंजीकृत हैं। 140 बच्चे नियमित रूप से आते हैं। स्कूल की चहारदीवारी तो है ही, कायाकल्प निजी स्कूलों को भी पीछे छोड़ता है। स्कूल में स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी के अलावा कांवेंट जैसी सभी सुविधाएं हैं। खासकर यहां की शिक्षा की गुणवत्ता की उत्तम है ऐसा अधिकारियों के निरीक्षण में सामने आया है। दो वर्ष पूर्व कायाकल्प व अन्य सुविधाओं के मामले में महानिदेशक स्कूल शिक्षा इस विद्यालय को पुरस्कृत भी कर चुके हैं।
खास बात यह है कि कई सरकारी स्कूलों मेें जहां नामांकन पूरे नहीं हो पाते वहीं इस स्कूल में शहर से भी लोग अपने बच्चों का प्रवेश करा रहे हैं। प्रधानाध्यापक का कहना है कि शहर के मोहल्ला गिप्सनगंज के व्यवसायी संजीव ने अपने 11 वर्षीय पुत्र यथार्थ का नाम यहां के कक्षा तीन में लिखाया। इससे पूर्व वह सीतापुर रोड स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ रहा था। इनसे पूर्व शिक्षा विभाग के ही जूनियर स्कूल धूरा के अनुदेशक विक्रांत ने भी अपने बेटे आर्यन कुमार का प्रवेश यहां कराया था। प्रधानाध्यापक का कहना है कि उन्हें लग रहा है कि उनकी मेहनत सफल हो रही है।
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175 से ऊपर होंगे नामांकन
हरदोई। प्रधानाध्यापक का कहना है कि स्कूलों में नामांकन की अंतिम तिथि 30 सितंबर रखी गई है। अभी नामांकन कराया ही जा रहा है। नामांकन 175 से ऊपर होने की उम्मीद है। 155 बच्चे स्कूल आ रहे हैं। शेष के नाम उनके पास हैं जिनको बुलाकर वह उनके बारे में काउंसलिंग कर रहे हैं और प्रवेश दे रहे हैं।
अब तो स्कूल जाने के लिए बच्चे रोते हैं: प्रधानाध्यापक
हरदोई। महोनी के प्रधानाध्यापक बताते हैं कि पहले स्कूल जानेे को कहने पर बच्चे रोते थे लेकिन कुछ समय उनके स्कूल आने के बाद बच्चों से यह कह दिया जाता है कि खेत पर कुछ काम है आज स्कूल रहने दो तो इस पर बच्चे स्कूल जाने के लिए रोते हैं। बस यही है उनके स्कूल की खासियत।
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अहिरोरी ब्लाक के इस विद्यालय की स्थिति पहले ऐसी नहीं थी। वर्ष 2008 के पहले यह विद्यालय भी अन्य सरकारी विद्यालयों की लाइन में ही था। पंजीकरण 130 के करीब बच्चे रहा करते थे लेकिन स्कूल 30 से 40 बच्चे ही आते थे। बाउंड्रीवाल नहीं थी। स्कूल भी काफी जर्जर था लेकिन 2008 के अंत में ही रविंद्र सिंह के आने के बाद इस विद्यालय के दिन भी बहुरने लगे। आज स्थिति यह है कि यहां 155 बच्चे पंजीकृत हैं। 140 बच्चे नियमित रूप से आते हैं। स्कूल की चहारदीवारी तो है ही, कायाकल्प निजी स्कूलों को भी पीछे छोड़ता है। स्कूल में स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी के अलावा कांवेंट जैसी सभी सुविधाएं हैं। खासकर यहां की शिक्षा की गुणवत्ता की उत्तम है ऐसा अधिकारियों के निरीक्षण में सामने आया है। दो वर्ष पूर्व कायाकल्प व अन्य सुविधाओं के मामले में महानिदेशक स्कूल शिक्षा इस विद्यालय को पुरस्कृत भी कर चुके हैं।
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खास बात यह है कि कई सरकारी स्कूलों मेें जहां नामांकन पूरे नहीं हो पाते वहीं इस स्कूल में शहर से भी लोग अपने बच्चों का प्रवेश करा रहे हैं। प्रधानाध्यापक का कहना है कि शहर के मोहल्ला गिप्सनगंज के व्यवसायी संजीव ने अपने 11 वर्षीय पुत्र यथार्थ का नाम यहां के कक्षा तीन में लिखाया। इससे पूर्व वह सीतापुर रोड स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ रहा था। इनसे पूर्व शिक्षा विभाग के ही जूनियर स्कूल धूरा के अनुदेशक विक्रांत ने भी अपने बेटे आर्यन कुमार का प्रवेश यहां कराया था। प्रधानाध्यापक का कहना है कि उन्हें लग रहा है कि उनकी मेहनत सफल हो रही है।
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175 से ऊपर होंगे नामांकन
हरदोई। प्रधानाध्यापक का कहना है कि स्कूलों में नामांकन की अंतिम तिथि 30 सितंबर रखी गई है। अभी नामांकन कराया ही जा रहा है। नामांकन 175 से ऊपर होने की उम्मीद है। 155 बच्चे स्कूल आ रहे हैं। शेष के नाम उनके पास हैं जिनको बुलाकर वह उनके बारे में काउंसलिंग कर रहे हैं और प्रवेश दे रहे हैं।
अब तो स्कूल जाने के लिए बच्चे रोते हैं: प्रधानाध्यापक
हरदोई। महोनी के प्रधानाध्यापक बताते हैं कि पहले स्कूल जानेे को कहने पर बच्चे रोते थे लेकिन कुछ समय उनके स्कूल आने के बाद बच्चों से यह कह दिया जाता है कि खेत पर कुछ काम है आज स्कूल रहने दो तो इस पर बच्चे स्कूल जाने के लिए रोते हैं। बस यही है उनके स्कूल की खासियत।