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हरदोईः चार साल पहले हुआ था घोटाला, तीन साल चली एसआईटी जांच

Tue, 30 Aug 2022 05:00 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 30 Aug 2022 05:00 PM IST
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Hardoi, Scam happened four years ago, SIT investigation lasted for three years
फोटो-12- पीडीएफ - फोटो : HARDOI
हरदोई। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत डस्टबिन (कूड़ेदान) खरीद में हुए घोटाले में 183 लोगों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद जिले में खलबली मच गई है।
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घोटाले का खुलासा अमर उजाला ने 18 जुलाई 2018 के अंक में किया था। जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया था, लेकिन तत्कालीन जिला पंचायतराज अधिकारी और आपूर्तिकर्ता कंपनी से जुड़ी कथित महिला भाजपा नेता को बचाने की भरपूर कवायद हुई थी।
अमर उजाला के समाचार अभियान के बाद तत्कालीन जिला पंचायतराज अधिकारी अनिल कुमार सिंह को निलंबित किया गया था और मामले की एसआईटी जांच के आदेश 9 मई 2019 को हुए थे।
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स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत जुलाई 2018 में बड़ी संख्या में जिले की ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान रखवा दिए गए थे। कुछ जगहों पर कूड़ेदान रखवाए बिना ही चेक कटवा ली गई थी और बाद में कूड़ेदान लगवाए गए।
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इस खेल की शुरूआत बावन और टड़ियावां विकास खंड से हुई थी। आपूर्तिकर्ता फर्म ने पंचायतराज महकमे में शासन स्तर पर अपनी राजनीतिक पहुंच का लाभ उठाते हुए तत्कालीन जिला पंचायतराज अधिकारी पर दबाव बनाकर सीधे ग्राम प्रधानों और सचिवों से फर्म के नाम पर चेक कटवा लिए थे।
लखनऊ के गोमती नगर इलाके के विभूति खंड में मेसर्स एमएससीओ मैनेजमेंट के नाम से चेक कटवाई गई थीं। जब 18 जुलाई 2018 को इस खेल का खुलासा हुआ तो तत्कालीन डीएम पुलकित खरे ने भुगतान पर रोक लगा दी थी।
इसके कुछ माह बाद गुपचुप ढंग से जिला पंचायतराज अधिकारी के इशारे पर ग्राम प्रधानों और सचिवों पर दबाव बनाकर फिर से भुगतान निकालने की कवायद हुई थी।
इस पूरे मामले की एसआईटी जांच होने के बाद सोमवार को लखनऊ में विजलेंस ने 141 ग्राम पंचायतों के तत्कालीन प्रधानों और तत्कालीन 41 ग्राम सचिवों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। आपूर्तिकर्ता फर्म के निदेशक सुनील कुमार सिंह को भी दोषी माना गया है।
खबरों का लिया था संज्ञान
अमर उजाला में प्रकाशित खबरों को संज्ञान में लेकर पांच दिसंबर 2018 को शासन स्तर से जांच के आदेश हुए थे। तत्कालीन सीडीओ आनंद कुमार, आरईडी के अधिशासी अभियंता ईशम सिंह और वरिष्ठ कोषाधिकारी कंचन भारती की टीम ने जांच की थी।
जांच में बड़ी संख्या में परिषदीय विद्यालयों के अध्यापकों से पूछताछ हुई थी। इस दौरान अधिकांश अध्यापकों के साथ-साथ प्रधानों ने भी कूड़ेदान किसके आदेश से लगे हैं।
इसकी जानकारी होने से इन्कार किया था। ग्राम सचिवों ने तत्कालीन जिला पंचायतराज अधिकारी के मौखिक आदेश पर एक कथित महिला भाजपा नेता के लोगों द्वारा कूड़ेदान लगाए जाने की जानकारी जांच टीम को दी थी।
बीएसए से भी जांच टीम ने मांगी थी रिपोर्ट
तत्कालीन बीएसए से भी कूड़ा दान खरीद प्रकरण में रिपोर्ट मांगी गई थी। वजह यह थी कि अधिकांश कूड़ेदान परिषदीय विद्यालयों के परिसर या इसके बाहर लगवाए गए थे।
आठ दिसंबर 2018 को तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने लिखित रूप से जांच टीम को अवगत कराया था कि टड़ियावां विकास खंड में 207, बावन में 250, सुरसा में 104, कछौना में 38, बिलग्राम में 35, हरपालपुर में 15, भरावन में 19, भरखनी में पांच, हरियावां में 17, अहिरोरी में छह और बेंहदर में दो कूड़ेदान रखवाए गए थे।

खुलासे के बाद नहीं हुआ भुगतान
पूरे खेल का खुलासा 18 जुलाई 2018 को हुआ था। इससे पहले तक लगभग 17 लाख रुपये का भुगतान संबंधित फर्म को चेकों के जरिये 181 ग्राम पंचायतें कर चुकी थीं। खुलासा होने के बाद तत्कालीन डीएम ने भुगतान पर रोक लगा दी। इसके बाद ग्राम सचिवों और प्रधानों ने भी मामले को तूल पकड़ता देख चेक काटने से इन्कार कर दिया।

फोटो-08- पीडीएफ

फोटो-08- पीडीएफ- फोटो : HARDOI

फोटो-09- पीडीएफ

फोटो-09- पीडीएफ- फोटो : HARDOI

फोटो-07- पीडीएफ

फोटो-07- पीडीएफ- फोटो : HARDOI

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