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Hardoi News: हरदोईः हर मर्ज की दवा बन गई पैरासिटामॉल
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फोटो-07-लक्ष्मी
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। जिला अस्पताल में आने में वाले हर मरीज का इलाज सिर्फ पैरासिटामॉल से किया जा रहा है। अस्पताल आने वाले मरीजों को दवा के नाम पर पेरासिटामोल और डाइक्लो दी जा रही है। अन्य दवाओं के लिए मरीजों को मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में औसतन प्रतिदिन 1600 मरीज आ रहे हैं। यहां पर्चा बनवाने से लेकर दवा लेने मेें मरीज व तीमारदार का पूरा दिन निकल जाता है। पूरे दिन अस्पताल की लाइन के बाद मरीजों को सिर्फ पैरासिटामॉल और डाइक्लो ही मिलती है।
अन्य दवा बाहर से लेनी पड़ रही है। इससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ता और वह अपना इलाज पूरा नहीं करा पाते हैं और इलाज बंद करना पड़ता है।
यहां झेलनी पड़ी दुश्वारियां
जिला अस्पताल में पर्चा बनवाने के लिए दो काउंटर है। जहां पर सुबह से ही मरीजों की लंबी कतार लग जाती है। पर्चा बनवाने में मरीज को आधा से एक घंटा लग जाता है। उसके बाद चिकित्सक से परामर्श लेने में घंटों लाइन में लगना पड़ता है।
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लाइन में लगने के बाद जब चिकित्सक से मिलने के बाद अगर जांच लिख दी गई। यह दिन मरीज का जांच में ही निकल जाता है। इसके बाद उन्हें दवा लिख दी जाती है। यह लेने में कम से कम एक घंटा लग जाता है। एक घंटा के बाद जब पर्चा काउंटर पर पहुंचता है तो मरीज को एक से दो दिन के लिए पैरासिटामॉल ही सभी मरीज को दे दी जाती है।
- जिला अस्पताल में मानपुर से आए हरिवंश ने बताया कि वह आंख के इलाज के लिए आया था। उसे चिकित्सक ने पांच दवाएं लिखी थी। इसमें आई ड्रॉप भी था, मगर उसे सिर्फ पैरासिटामॉल व एक अन्य दवा दी गई है।
- ग्राम अहरापुर की लक्ष्मी पैर में चोट लगने पर दवा लेने आई थी। उन्होंने हड्डी के डॉक्टर को दिखाया था, पर्चा पर चार दवा लिखी गई थी, मगर सिर्फ दो ही दवा मिलीं। इसमें एक पैरासिटामॉल थी। अन्य पर निशान लगा दिया और कहा गया कि बाहर से ले लेना।
वर्जन
जिला अस्पताल में सभी दवाएं उपलब्ध है। चिकित्सक कुछ दवाएं ऐसी लिख देते हैं। जिनकी आपूर्ति अस्पताल में नहीं होती है। वह मरीजों को नहीं मिल पाती हैं। - डॉ. जेएन तिवारी, चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में औसतन प्रतिदिन 1600 मरीज आ रहे हैं। यहां पर्चा बनवाने से लेकर दवा लेने मेें मरीज व तीमारदार का पूरा दिन निकल जाता है। पूरे दिन अस्पताल की लाइन के बाद मरीजों को सिर्फ पैरासिटामॉल और डाइक्लो ही मिलती है।
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अन्य दवा बाहर से लेनी पड़ रही है। इससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ता और वह अपना इलाज पूरा नहीं करा पाते हैं और इलाज बंद करना पड़ता है।
यहां झेलनी पड़ी दुश्वारियां
जिला अस्पताल में पर्चा बनवाने के लिए दो काउंटर है। जहां पर सुबह से ही मरीजों की लंबी कतार लग जाती है। पर्चा बनवाने में मरीज को आधा से एक घंटा लग जाता है। उसके बाद चिकित्सक से परामर्श लेने में घंटों लाइन में लगना पड़ता है।
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लाइन में लगने के बाद जब चिकित्सक से मिलने के बाद अगर जांच लिख दी गई। यह दिन मरीज का जांच में ही निकल जाता है। इसके बाद उन्हें दवा लिख दी जाती है। यह लेने में कम से कम एक घंटा लग जाता है। एक घंटा के बाद जब पर्चा काउंटर पर पहुंचता है तो मरीज को एक से दो दिन के लिए पैरासिटामॉल ही सभी मरीज को दे दी जाती है।
- जिला अस्पताल में मानपुर से आए हरिवंश ने बताया कि वह आंख के इलाज के लिए आया था। उसे चिकित्सक ने पांच दवाएं लिखी थी। इसमें आई ड्रॉप भी था, मगर उसे सिर्फ पैरासिटामॉल व एक अन्य दवा दी गई है।
- ग्राम अहरापुर की लक्ष्मी पैर में चोट लगने पर दवा लेने आई थी। उन्होंने हड्डी के डॉक्टर को दिखाया था, पर्चा पर चार दवा लिखी गई थी, मगर सिर्फ दो ही दवा मिलीं। इसमें एक पैरासिटामॉल थी। अन्य पर निशान लगा दिया और कहा गया कि बाहर से ले लेना।
वर्जन
जिला अस्पताल में सभी दवाएं उपलब्ध है। चिकित्सक कुछ दवाएं ऐसी लिख देते हैं। जिनकी आपूर्ति अस्पताल में नहीं होती है। वह मरीजों को नहीं मिल पाती हैं। - डॉ. जेएन तिवारी, चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल

फोटो-05- जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी लाइन- फोटो : HARDOI

फोटो-06-हरविंश- फोटो : HARDOI