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मां का दूध अमृत समान, पानी कर सकता नुकसान

Thu, 26 May 2022 11:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 26 May 2022 11:45 PM IST
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फोटो-36- एनआईसी में वेबकास्ट से संचालित पोषण पाठशाला में शामिल डीपीओ बुद्घि मिश्रा व अन्य - फोटो : HARDOI
हरदोई। शीघ्र स्तनपान और केवल स्तनपान विषय पर गुरुवार को वेब कास्ट के माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की पहली पोषण पाठशाला हुई।
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प्रशिक्षण में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बताया गया कि माताओं को शिशु के जन्म के तुरंत बाद से स्तनपान कराने के लिए जागरुक किया जाए। इससे शिशुओं की मृत्यु दर को कम किया जा सकता है।
डीपीओ बुद्वि मिश्रा ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) के अनुसार प्रदेश में जन्म के एक घंटे के अंदर नवजात शिशु को स्तनपान कराने की दर 23.9 प्रतिशत है और छह माह तक के शिशुओं में केवल स्तनपान का दर 59.7 प्रतिशत है।
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जानकारी के अभाव और समाज में प्रचलित विभिन्न मान्यताओं व मिथकों की वजह से कई माताएं स्तनपान समय से नहीं करातीं। साथ ही पानी का प्रयोग भी करती हैं, जोकि शिशुओं के लिए नुकसान देय हो सकता है।
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शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी लाने के लिए यह आवश्यक है कि जन्म के एक घंटे के अंदर शिशु को स्तनपान प्रारंभ करा दिया जाए। छह माह की आयु तक उसे केवल स्तनपान कराया जाए। प्रशिक्षण में सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ता वेबकास्ट से जुड़ीं।

घुट्टी, शर्बत, शहद पिलाना गलत
प्रशिक्षण में बताया गया कि माताओं व परिवार को लगता है कि स्तनपान शिशु के लिए पर्याप्त नहीं है और घुट्टी, शर्बत, शहद, पानी, पिला देती हैं, जबकि स्तनपान से ही शिशु की पानी की भी आवश्यकता पूरी हो जाती है। शिशु में दूषित पानी के सेवन से संक्रमण से दस्त होने की भी संभावना बढ़ जाती है।
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