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6 लाख हेक्टेयर रकबा में महज 6 हजार में बागवानी

Wed, 06 Apr 2022 11:24 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 06 Apr 2022 11:24 PM IST
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hardoi news,How to be prosperous farmer, become a gardener of one percent area
हरदोई। जिले में किसान परंपरागत खेती पर ही निर्भर हैं। ऐसे में उनकी आय दोगुनी नहीं हो पा रही है। सरकार भले ही कृषि विविधीकरण पर जोर देते हुए किसानों को बागवानी और सब्जियों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हो लेकिन जिले में इसके बाद भी महज एक फीसदी खेतों पर ही बागवानी हो रही है।
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खास बात ये है कि शाहाबाद क्षेत्र के फल पट्टी घोषित कर रखा गया है लेकिन 20 साल बाद भी यहां बागवानी का क्षेत्रफल नहीं बढ़ सका है।
पिछले 10 वर्ष के आंकड़ों पर गौर करें, तो गन्ने का क्षेत्रफल लगभग 50 हजार हेक्टेयर है। गेहूं का क्षेत्रफल तीन लाख हेक्टेयर और धान व अन्य फसलों व सब्जियों का रकबा दो लाख हेक्टेयर के आसपास रहा है।
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जिलेे का कुल क्षेत्रफल लगभग 6 लाख हेक्टेयर है। इसमें करीब 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन एवं बागवानी है। जिसमें बागवानी का क्षेत्र फल 6 हजार हेक्टेयर है। जिससे एक बात साफ है कि जिले के किसान बागवानी को लेकर रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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जानकार मानते हैं कि बागवानी के जरिये किसानों को अनाज की फसलों की अपेक्षा ज्यादा लाभ प्राप्त हो सकता है। पर्यावरण के दृष्टिकोण से बागवानी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। बागवानी से फलों के रूप लाभ तो आसपास की आबोहवा को साफ रखने में सहायता मिलती है।
जलवायु बागवानी के अनुकूल
उद्यान निरीक्षक हरिओम ने बताया कि जिले में प्रमुख रूप से आम, अमरूद, केला, आंवला आदि की बागवानी हो रही है। जिले की जलवायु बागवानी के अनुकूल है। शाहाबाद, कोथावां, भरावन एवं संडीला क्षेत्र में बागवानी हो रही है। सांडी, हरपालपुर, बावन, बिलग्राम, भरखनी, सुरसा, माधौंगज, मल्लावां आदि ब्लाक क्षेत्रों में किसान बागवानी के प्रति रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस कारण इन क्षेत्रों में बागवानी का क्षेत्रफल काफी कम है।

करनी हो बागवानी तो शुरू करें तैयारी
उद्यान विभाग के अफसरों के अनुसार जो किसान बागवानी करने केे इच्छुक हैं वे गेहूं की कटाई के बाद खेत में गहरे गड्ढे खोद लें। 15 से 25 दिन गड्ढों को खुला रहने दें। इसके बाद गड्ढा़ें को आधी गहराई तक गोबर एवं मिट्टी के मिश्रण से भर दें। मानसून आते ही पौधों को लगाने का काम शुरू कर करें। तीन साल तक पौधों की देखभाल बच्चों की तरह करनी चाहिए। नए बागान लगाने वालों को गर्मी के समय में देर शाम आवश्यकतानुसार सिंचाई करनी चाहिए। अफसरों ने बताया कि बागवानी के संबंध में तकनीकी परामर्श आदि के लिए उद्यान कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
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